{"_id":"24-45816","slug":"Jhansi-45816-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"संकेत में बदलाव का इशारा कर गए रामदेव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संकेत में बदलाव का इशारा कर गए रामदेव
Jhansi
Updated Tue, 22 Apr 2014 05:33 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। चुनाव आयोग की सख्ती के कारण योग गुरु बाबा रामदेव कांग्रेस पर सीधा प्रहार करने से बचे। लेकिन, गीता के चौथे अध्याय में वर्णित श्लोक ‘यदा- यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत, अभ्युथानम् अधर्मस्य तदातमानं सृजाम्यहम॥ परित्राणाय साधुनाम् विनाशाय च: दुष्कृताम, धर्म संस्थापनार्थाय सम्भावमी युगे युगे॥ कह कर इशारों ही इशारों में कांग्रेस पर निशाना साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी। योग गुरु यहीं नहीं थमे उन्होंने भ्रष्टाचार और बढ़ती महंगाई का मुद्दा उठाकर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की।
सोमवार को एसपीआई इंटर कालेज में पतंजलि योग समिति के तत्वावधान में आयोजित योग दीक्षा एवं राष्ट्र निर्माण सभा में करीब पौने दो घंटे विलंब से पहुंचे योग गुरु ने कहा कि ट्रेन चार घंटे लेट आई, जिससे कार्यक्रम में पहुंचने में विलंब हो गया। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान योग शिविर को लेकर काफी हो हल्ला मच रहा है। ऐसे लग रहा है कि वह बाबा नहीं आतंकवादी हैं। वह भ्रष्टाचार और महंगाई बढ़ाने नहीं आए, बल्कि विदेशी कंपनियों की लूटमार से लोगों को बचाने आए हैं।
उन्होंने गीता के श्लोक की चर्चा करते हुए कहा कि जब- जब धर्म की हानि होती है तथा अधर्म की वृद्धि होती है तो भगवान साकार रूप में लोगों के समक्ष प्रकट होते हैं। यह हर युग में होता आया है। इस बार भी ऐसा ही होगा। संबोधन के दौरान उन्होंने जैसे ही कहा अबकी बार... भीड़ ने मोदी सरकार कह कर उनकी बात पूरी कर दी। उन्होंने कहा कि जो संकट रानी लक्ष्मीबाई के समय था, वही अब भी है। 1857 में धोखा खा चुके, परंतु अब धोखा नहीं खाना है। साधु का साथ देना चाहिए, दुष्टों का विनाश होना चाहिए। जो साधु का साथ नहीं देता, वह पापी होता है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि कपालभाती के जरिये शरीर की गड़बड़ियों को बाहर निकाला जाता है। इसी तरह केंद्र सरकार गड़बड़ हो गई है। इसे बाहर निकालना है। एक भी भ्रष्ट और बेईमान संसद में न पहुंचे। यह संकल्प लेकर जाना है। बाबा ने कहा कि उन्होंने 18 साल से खाना नहीं खाया है, परंतु कुछ लोग बोफोर्स, चारा, अनाज व कोयला सब कुछ खा गए। इस दौरान उन्होंने भाजपा के प्रचार के जुमले बुरे दिन जाने वाले हैं, अच्छे दिन आने वाले हैं को भी खूब दोहराया।
बाबा रामदेव ने कहा कि भारत के विकास के लिए सभी मतदान करें। उन्होंने राजनैतिक दलों पर तंज कसते हुए कहा कि वे यहां राजनैतिक दलों की मेहरबानी से नहीं अपितु योग की बदौलत बैठे हैं। राजनैतिक दलों ने हमेशा टांग खींचने का काम किया है।
विज्ञापन
सोमवार को एसपीआई इंटर कालेज में पतंजलि योग समिति के तत्वावधान में आयोजित योग दीक्षा एवं राष्ट्र निर्माण सभा में करीब पौने दो घंटे विलंब से पहुंचे योग गुरु ने कहा कि ट्रेन चार घंटे लेट आई, जिससे कार्यक्रम में पहुंचने में विलंब हो गया। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान योग शिविर को लेकर काफी हो हल्ला मच रहा है। ऐसे लग रहा है कि वह बाबा नहीं आतंकवादी हैं। वह भ्रष्टाचार और महंगाई बढ़ाने नहीं आए, बल्कि विदेशी कंपनियों की लूटमार से लोगों को बचाने आए हैं।
विज्ञापन
उन्होंने गीता के श्लोक की चर्चा करते हुए कहा कि जब- जब धर्म की हानि होती है तथा अधर्म की वृद्धि होती है तो भगवान साकार रूप में लोगों के समक्ष प्रकट होते हैं। यह हर युग में होता आया है। इस बार भी ऐसा ही होगा। संबोधन के दौरान उन्होंने जैसे ही कहा अबकी बार... भीड़ ने मोदी सरकार कह कर उनकी बात पूरी कर दी। उन्होंने कहा कि जो संकट रानी लक्ष्मीबाई के समय था, वही अब भी है। 1857 में धोखा खा चुके, परंतु अब धोखा नहीं खाना है। साधु का साथ देना चाहिए, दुष्टों का विनाश होना चाहिए। जो साधु का साथ नहीं देता, वह पापी होता है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि कपालभाती के जरिये शरीर की गड़बड़ियों को बाहर निकाला जाता है। इसी तरह केंद्र सरकार गड़बड़ हो गई है। इसे बाहर निकालना है। एक भी भ्रष्ट और बेईमान संसद में न पहुंचे। यह संकल्प लेकर जाना है। बाबा ने कहा कि उन्होंने 18 साल से खाना नहीं खाया है, परंतु कुछ लोग बोफोर्स, चारा, अनाज व कोयला सब कुछ खा गए। इस दौरान उन्होंने भाजपा के प्रचार के जुमले बुरे दिन जाने वाले हैं, अच्छे दिन आने वाले हैं को भी खूब दोहराया।
बाबा रामदेव ने कहा कि भारत के विकास के लिए सभी मतदान करें। उन्होंने राजनैतिक दलों पर तंज कसते हुए कहा कि वे यहां राजनैतिक दलों की मेहरबानी से नहीं अपितु योग की बदौलत बैठे हैं। राजनैतिक दलों ने हमेशा टांग खींचने का काम किया है।