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अंतिम घड़ी में सहारा बनी बेटी

Wed, 29 Jan 2014 05:49 AM IST
Jhansi
Jhansi Updated Wed, 29 Jan 2014 05:49 AM IST
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झांसी। बेटियां अंतिम घड़ी में भी मजबूत सहारा साबित होती हैं। 29 साल की रविता मेहरा ने अपनी मां का दाह संस्कार कर इस बात को सही साबित कर दिया।
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डरू भोंडेला निवासी रविता मेहरा की मां विक्षिप्त होने के कारण सालों से शहर के मंदिरों में अपना जीवन काट रही थीं। रविता ने कई बार अपनी मां को घर पर रखना चाहा, लेकिन वह हर बार बाहर चली जातीं। रविता कहती हैं कि सन् 1999 में उनके पिता चुन्नु लाल मेहरा की मौत के बाद से मां की दिमागी हालत खराब हो गई थी, तभी से वह विक्षिप्तों के समान जीवन जीने लगीं। मंगलवार को पंचकुइयां मंदिर के पास उनकी मां का निधन हो गया। मंदिर के आसपास के लोग लाश को लावारिस मानकर पोस्टमार्टम हाउस भेज रहे थे। इसकी सूचना मिलते ही रविता पंचकुइयां मंदिर पहुंचीं। उन्होंने अपनी मां का विधि विधान से बड़ागांव गेट बाहर स्थित मुक्तिधाम में दाह संस्कार किया। रविता के पति रजनीश श्रीवास्तव ने भी उनका सहयोग किया।
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