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बेटी की तरह होगा मां दुर्गा का पूजन
Jhansi
Updated Thu, 10 Oct 2013 05:41 AM IST
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झांसी। बंगाली समाज द्वारा स्थापित होने वाले पंडालों में षष्ठी को प्रतिमाओं के पट खुलेंगे। श्रद्धालुओं द्वारा मां दुर्गा को बेटी के रूप में पूजा जाएगा। इसके अलावा अन्य धार्मिक कार्यक्रम भी होंगे।
गणेश, कार्तिकेय संग होता है मां का पूजन
नगर के सीपरी बाजार स्थित प्रेमगंज में 52 वर्षाें से सीपरी कालीबाड़ी एसोसिएशन द्वारा दस अक्तूबर से 14 तक नवरात्र पर्व मनाया जाएगा। एसोसिएशन के पदाधिकारी प्रियांशु डे ने बताया कि जिस तरह मायके में बेटी का स्वागत व सम्मान किया जाता है उसी तरह बंगाली समाज में मां दुर्गा को सम्मान देने की परंपरा है। यहां षष्ठी से मां दुर्गा का गणेश, कार्तिकेय, मां सरस्वती व मां लक्ष्मी के साथ विधिवत पूजन किया जाता है। स्थापित की जाने वाली दस भुजाधारी मां दुर्गा की प्रतिमा से भक्तजन सुख समृद्धि की कामना करते हैं। इसके अलावा अष्टमी को संधि पूजन किया जाता है।
प्रतिमा की होगी प्राण प्रतिष्ठा
153 वर्षाें से नवरात्र महोत्सव मना रहे दुर्गाबाड़ी फूटा चोपड़ा अंदर सैंयरगेट में तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। बांधव समिति के तत्वावधान में होने वाले इस कार्यक्रम में कडे़ नियमों के बीच मां दुर्गा की आराधना की जाती है। समिति के पदाधिकारी जॉय चटर्जी ने बताया कि बनारस के ब्राह्मणों द्वारा प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की जाती है। इसके बाद प्रतिमा को स्पर्श नहीं किया जाता है। उन्होंने बताया कि महोत्सव के अंतर्गत 14 अक्तूबर तक पुष्पांजलि, बंगला नाटक, संगीत संध्या, संधि पूजा, नृत्य नाटिका, दशमी पूजा, दर्पण विसर्जन आदि सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
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महिलाएं मनाएंगी सिंदूर उत्सव
दुर्गा पूजा कमेटी कैंट के तत्वावधान में तोपखाना ग्राउंड सेना सप्लाई डिपो के सामने दुर्गा उत्सव मनाया जाएगा। कार्यक्रम की तैयारियों में जुटे डा. टी के घोष ने बताया कि यहां महिषासुर मर्दिनी मां दुर्गा के साथ उनके परिवार के सदस्य कार्तिकेय, मां सरस्वती, मां लक्ष्मी, गणेश व केला बहू विराजमान की जाती हैं। दीपक मजूमदार ने बताया कि समाज की रीति रिवाजों के अनुसार दुर्गा पंडाल में विजयदशमी पर महिलाएं सिंदूर उत्सव मनाती हैं। आयोजन में आम नागरिकों के साथ ही सेना का भी सहयोग रहता है।
पूजन में ढाक का विशेष महत्व
झांसी। बंगाली समाज के धार्मिक अनुष्ठानों में वाद्य यंत्र ढाक का विशेष महत्व है। प्रत्येक दिन होने वाली दुर्गा पूजा में पांच बार ढाक का प्रयोग किया जाता है। रविशंकर चटर्जी ने बताया कि आरती, अभिषेक व प्रसाद लगाते समय ढाक का प्रयोग विभिन्न ताल के साथ किया जाता है।
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गणेश, कार्तिकेय संग होता है मां का पूजन
नगर के सीपरी बाजार स्थित प्रेमगंज में 52 वर्षाें से सीपरी कालीबाड़ी एसोसिएशन द्वारा दस अक्तूबर से 14 तक नवरात्र पर्व मनाया जाएगा। एसोसिएशन के पदाधिकारी प्रियांशु डे ने बताया कि जिस तरह मायके में बेटी का स्वागत व सम्मान किया जाता है उसी तरह बंगाली समाज में मां दुर्गा को सम्मान देने की परंपरा है। यहां षष्ठी से मां दुर्गा का गणेश, कार्तिकेय, मां सरस्वती व मां लक्ष्मी के साथ विधिवत पूजन किया जाता है। स्थापित की जाने वाली दस भुजाधारी मां दुर्गा की प्रतिमा से भक्तजन सुख समृद्धि की कामना करते हैं। इसके अलावा अष्टमी को संधि पूजन किया जाता है।
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प्रतिमा की होगी प्राण प्रतिष्ठा
153 वर्षाें से नवरात्र महोत्सव मना रहे दुर्गाबाड़ी फूटा चोपड़ा अंदर सैंयरगेट में तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। बांधव समिति के तत्वावधान में होने वाले इस कार्यक्रम में कडे़ नियमों के बीच मां दुर्गा की आराधना की जाती है। समिति के पदाधिकारी जॉय चटर्जी ने बताया कि बनारस के ब्राह्मणों द्वारा प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की जाती है। इसके बाद प्रतिमा को स्पर्श नहीं किया जाता है। उन्होंने बताया कि महोत्सव के अंतर्गत 14 अक्तूबर तक पुष्पांजलि, बंगला नाटक, संगीत संध्या, संधि पूजा, नृत्य नाटिका, दशमी पूजा, दर्पण विसर्जन आदि सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
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महिलाएं मनाएंगी सिंदूर उत्सव
दुर्गा पूजा कमेटी कैंट के तत्वावधान में तोपखाना ग्राउंड सेना सप्लाई डिपो के सामने दुर्गा उत्सव मनाया जाएगा। कार्यक्रम की तैयारियों में जुटे डा. टी के घोष ने बताया कि यहां महिषासुर मर्दिनी मां दुर्गा के साथ उनके परिवार के सदस्य कार्तिकेय, मां सरस्वती, मां लक्ष्मी, गणेश व केला बहू विराजमान की जाती हैं। दीपक मजूमदार ने बताया कि समाज की रीति रिवाजों के अनुसार दुर्गा पंडाल में विजयदशमी पर महिलाएं सिंदूर उत्सव मनाती हैं। आयोजन में आम नागरिकों के साथ ही सेना का भी सहयोग रहता है।
पूजन में ढाक का विशेष महत्व
झांसी। बंगाली समाज के धार्मिक अनुष्ठानों में वाद्य यंत्र ढाक का विशेष महत्व है। प्रत्येक दिन होने वाली दुर्गा पूजा में पांच बार ढाक का प्रयोग किया जाता है। रविशंकर चटर्जी ने बताया कि आरती, अभिषेक व प्रसाद लगाते समय ढाक का प्रयोग विभिन्न ताल के साथ किया जाता है।