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जिला कारागार में स्थिति ओवरलोड

Jhansi Updated Wed, 26 Dec 2012 05:30 AM IST
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झांसी। जिला कारागार में जेल मैन्युअल के अनुसार निर्धारित की गई धारण क्षमता से दोगुने से भी ज्यादा बंदी निरुद्ध होने के कारण यहां उपलब्ध संसाधन बौने साबित होने लगे हैं। बावजूद, इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। एक वर्ष पूर्व भेजा गया चार नई बैरकों के निर्माण का प्रस्ताव अब भी ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है।
जेल में 15 पुरुष व एक महिला बैरक है, जिनमें 416 बंदियों को रखने की व्यवस्था है। लेकिन, वर्तमान में यहां 886 बंदी निरुद्ध हैं, इनमें 44 महिलाएं शामिल हैं। आमतौर पर जेल में निरुद्ध बंदियों का आंकड़ा नौ सौ के इर्दगिर्द ही रहता है। निर्धारित से दोगुने बंदियों की वजह से यहां उपलब्ध व्यवस्थाएं चरमराने लगी हैं। जेल प्रशासन द्वारा पिछले वर्ष चार नई बैरकों के निर्माण का प्रस्ताव विभागीय मुख्यालय को भेजा गया था। जगह की कमी की वजह से डबल स्टोर बैरकों के निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया था। इन नई बैरकों में लगभग डेढ़ सौ बंदियों को ठिकाना मिलता। लेकिन, यह प्रस्ताव भी ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। शासन स्तर से इस मामले में अब तक कोई पहल नहीं की गई है।

कैदी बढ़े, कर्मचारी घटे
झांसी। जेल में 55 बंदी रक्षक, 10 महिला बंदी रक्षक, 17 रिजर्व वार्डन (आर्म्ड फोर्स) के पद हैं। यह सभी पद जेल में 416 बंदियों के हिसाब से सृजित हैं। लेकिन, बंदियों की संख्या बढ़ने की वजह से सृजित पद कमतर साबित होने लगे हैं। उस पर यहां आधा दर्जन महिला बंदी रक्षकों का टोटा चल रहा है। रिजर्व वार्डन भी सात कम हैं। डिप्टी जेलर के भी दो पद रिक्त हैं। इसके अलावा जेल अस्पताल में एक डाक्टर व एक फार्मासिस्ट का टोटा बना हुआ है। कर्मचारियों की कमी की वजह से तैनात कर्मचारियों पर काम का भार अधिक है। इसकी वजह से तैनात कर्मियों को छुट्टियां भी आसानी से नहीं मिल पाती हैं।

काटे नहीं कटती जाड़े की रात
झांसी। जेल में निरुद्ध बंदियों के लिए सर्दी का मौसम सबसे कठिन होता है। बैरकों में दोनों ओर लोहे के जाल रहते हैं, जिनसे हवा सांय - सांय कर बहती है। बैरक के भीतर की हर गतिविधि पर बाहर से नजर रखी जा सके, इसलिए बैरक के खिड़कियों में दरवाजे नहीं होते हैं। यह खुुली रहती हैं। हालांकि, सर्द मौसम को देखते हुए जेल प्रशासन द्वारा बंदियों की चाय बढ़ा दी गई है तथा बैरकों के बाहर अलाव का भी इंतजाम किया गया है। इसके अलावा प्रत्येक बंदी को तीन से चार कंबल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। लेकिन, भीषण सर्दी में यह सभी इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। ऐसे में स्वैच्छिक संगठन व अन्य संस्थाएं आगे आकर बंदियों को कंबल व गरम कपड़े दान कर सकती हैं।

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