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स्वास्थ्य से खिलवाड़, अभी आधे भी नहीं हुए रजिस्ट्रेशन
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स्वास्थ्य से खिलवाड़, अभी आधे भी नहीं हुए रजिस्ट्रेशन
ललितपुर। जिले में चल रहीं निजी स्वास्थ्य इकाइयां बायो मेडिकल वेस्ट मैटेरियल के निस्तारण में रुचि नहीं दिखा रहीं है। यहां पर लगभग 250 स्वास्थ्य इकाइयां है, जिसके सापेक्ष 120 ने प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड में आवेदन किया है। जबकि तीन इकाइयों का आवेदन गलत जानकारी देने के कारण निरस्त कर दिया गया। इससे प्रदूषण प्रमाण पत्र की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
शासन ने नर्सिंग होम, क्लीनिक, पैथोलॉजी लैब संचालकों को बायो मेडिकल वेस्ट मैटेरियल का निस्तारण करने के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से प्रमाण पत्र लेने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए स्वास्थ्य इकाइयों को प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड झांसी में आवेदन करना होगा। आवेदन के साथ ड्राफ्ट के माध्यम से आवेदन का शुल्क लिया जा रहा है। जिस पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कर्मचारी बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के मानकों की जांच करेंगे। जांच में संतुष्ट होने पर एनओसी जारी की जाएगी।
लेकिन, जिले में संचालित पैथोलॉजी लैब व नर्सिंग होम, क्लीनिक, डेंटल क्लीनिक प्रमाण पत्र लेने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि स्वास्थ्य विभाग के अभिलेखों में 250 स्वास्थ्य इकाइयां पंजीकृत हैं। इनमें से केवल 123 इकाइयों ने ही प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया है। इसमें से तीन इकाइयों के आवेदन गलत विवरण के कारण निरस्त किए गए हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधिकांश नर्सिंग होम, क्लीनिक व पैथोलॉजी लैब संचालक अभी भी खुले में बायो मेडिकल वेस्ट मैटेरियल फेंक रहे हैं, जो आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है। कई क्लीनिक व नर्सिंग होम में मेडिकल कचरा खुले बाक्स में रखा जा रहा है। इंजेक्शन की नीडिल को खुले में फेंका जा रहा है, जिससे सामान्य लोगों को बीमारियां फैलने की संभावना है।
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यह है निजी इकाइयों की स्थिति
जिले में नौ नर्सिंग होम संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा 145 आयुर्वेदिक क्लीनिक, 10 डेंटल क्लीनिक, 30 पैथोलॉजी, 28 एलोपैथी क्लीनिक और 28 होम्योपैथी क्लीनिक स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत हैं।
सरकारी अस्पतालों की स्थिति
जिला पुरुष अस्पताल, महिला अस्पताल के पास पहले से ही प्रमाण पत्र हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित होने वाली सीएससी, पीएससी व नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के अलावा दो अरबन हेल्थ पोस्ट, एक टीवी अस्पताल के आवेदन किए जा चुके हैं। मानक भी पूरे किए जा रहे हैं। इन अस्पतालों को केवल एनओसी मिलने का ही इंतजार है।
नर्सिंग होम, पैथोलॉजी लैब व क्लीनिकों को प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से प्रमाण पत्र लेने के निर्देश दिए गए है। इनमें कुछ इकाइयों ने आवेदन किया है। शेष इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई कर पंजीयन निरस्त किया जाएगा।
- डॉ. प्रताप सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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ललितपुर। जिले में चल रहीं निजी स्वास्थ्य इकाइयां बायो मेडिकल वेस्ट मैटेरियल के निस्तारण में रुचि नहीं दिखा रहीं है। यहां पर लगभग 250 स्वास्थ्य इकाइयां है, जिसके सापेक्ष 120 ने प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड में आवेदन किया है। जबकि तीन इकाइयों का आवेदन गलत जानकारी देने के कारण निरस्त कर दिया गया। इससे प्रदूषण प्रमाण पत्र की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
शासन ने नर्सिंग होम, क्लीनिक, पैथोलॉजी लैब संचालकों को बायो मेडिकल वेस्ट मैटेरियल का निस्तारण करने के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से प्रमाण पत्र लेने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए स्वास्थ्य इकाइयों को प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड झांसी में आवेदन करना होगा। आवेदन के साथ ड्राफ्ट के माध्यम से आवेदन का शुल्क लिया जा रहा है। जिस पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कर्मचारी बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के मानकों की जांच करेंगे। जांच में संतुष्ट होने पर एनओसी जारी की जाएगी।
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लेकिन, जिले में संचालित पैथोलॉजी लैब व नर्सिंग होम, क्लीनिक, डेंटल क्लीनिक प्रमाण पत्र लेने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि स्वास्थ्य विभाग के अभिलेखों में 250 स्वास्थ्य इकाइयां पंजीकृत हैं। इनमें से केवल 123 इकाइयों ने ही प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया है। इसमें से तीन इकाइयों के आवेदन गलत विवरण के कारण निरस्त किए गए हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधिकांश नर्सिंग होम, क्लीनिक व पैथोलॉजी लैब संचालक अभी भी खुले में बायो मेडिकल वेस्ट मैटेरियल फेंक रहे हैं, जो आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है। कई क्लीनिक व नर्सिंग होम में मेडिकल कचरा खुले बाक्स में रखा जा रहा है। इंजेक्शन की नीडिल को खुले में फेंका जा रहा है, जिससे सामान्य लोगों को बीमारियां फैलने की संभावना है।
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यह है निजी इकाइयों की स्थिति
जिले में नौ नर्सिंग होम संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा 145 आयुर्वेदिक क्लीनिक, 10 डेंटल क्लीनिक, 30 पैथोलॉजी, 28 एलोपैथी क्लीनिक और 28 होम्योपैथी क्लीनिक स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत हैं।
सरकारी अस्पतालों की स्थिति
जिला पुरुष अस्पताल, महिला अस्पताल के पास पहले से ही प्रमाण पत्र हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित होने वाली सीएससी, पीएससी व नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के अलावा दो अरबन हेल्थ पोस्ट, एक टीवी अस्पताल के आवेदन किए जा चुके हैं। मानक भी पूरे किए जा रहे हैं। इन अस्पतालों को केवल एनओसी मिलने का ही इंतजार है।
नर्सिंग होम, पैथोलॉजी लैब व क्लीनिकों को प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से प्रमाण पत्र लेने के निर्देश दिए गए है। इनमें कुछ इकाइयों ने आवेदन किया है। शेष इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई कर पंजीयन निरस्त किया जाएगा।
- डॉ. प्रताप सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी