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स्वच्छता के केंद्र में स्वच्छ भारत अभियान को ‘लकवा’
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स्वच्छता के केंद्र में स्वच्छ भारत अभियान को ‘लकवा’
प्रशांत शर्मा
झांसी।
मेडिकल विद्यार्थियों के साथ ही समाज को स्वच्छता और स्वास्थ्य का संदेश देने वाले महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को ‘लकवा’ मार गया है। यहां बने सर्वेंट क्वार्टरों में ‘इज्जत घर’ (शौचालय) की व्यवस्था नहीं है। मजबूरी में कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य ‘खुले में’ जाने के लिए मजबूर हैं। इससे कॉलेज परिसर में भी गंदगी फैल रही है। इस कारण यहां बीमारी फैलने का खतरा बढ़ता जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज में लगभग वर्ष 1970 में सर्वेंट क्वार्टरों का निर्माण कराया गया था। प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसरों के आवास के पास सर्वेंट क्वार्टर बने हुए हैं। जिनमें संबंधित कर्मचारी रहते हैं। मौजूदा समय में ऐसे 25-30 क्वार्टर बने हुए हैं। इन क्वार्टरों में कर्मचारियों को मूलभूत सुविधाओं तक के लिए तरसना पड़ रहा है। क्वार्टर में रहने के लिए सिर्फ एक कमरा होता है। परिवार में चार या उससे अधिक सदस्य होने की वजह से कर्मचारियों ने बरामदा या फिर आसपास पड़ी कुछ जमीन पर टीन शेड डालकर एक और कमरा बना लिया है। ऐसे में किसी तरह गृहस्थी चल रही है मगर क्वार्टरों में शौचालय की व्यवस्था न होने की वजह से कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य खुले में शौच के लिए मजबूर हैं। इससे कॉलेज परिसर में डॉक्टरों के आवासों के पास गंदगी फैली रहती है। गंदगी की वजह से परिसर में बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है।
बॉक्स..
आज तक नहीं आया बजट
मेडिकल कॉलेज के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए बने आवासों के सुदृढ़ीकरण के लिए बजट तो सरकारों द्वारा कभी-कभी भेजा गया मगर सर्वेंट क्वार्टरों के लिए आज तक कुछ नहीं हुआ है। न कभी इनकी मरम्मत हुई, न ही नया निर्माण।
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वर्जन..
सर्वेंट क्वार्टरों में शौचालय नहीं बने हुए हैं। इनका निर्माण कराने के लिए कई बार कॉलेज स्तर पर चर्चा हो चुकी है। साथ ही, शासन को भी प्रस्ताव भेजा गया है। वैकल्पिक व्यवस्था के लिए खेल मैदान के पास दो शौचालय बनवाए गए थे। - डॉ. हरीशचंद्र आर्या, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज।
फोटो..
चालीस साल से सर्वेंट क्वार्टर में रह रहे हैं। अब तक आवास में शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। परिवार में सात सदस्य हैं। सभी को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। - चिंताराम, कर्मचारी।
फोटो..
सर्वेंट क्वार्टर में शौचालय नहीं बने हुए हैं। इसके अलावा फर्श तक कच्ची थी। खुद पैसे खर्च कराकर पक्की करवाई गई। क्वार्टर में एक ही कमरा बना हुआ है। कई समस्याएं हैं। - पूजा, कर्मचारी की परिजन।
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प्रशांत शर्मा
झांसी।
मेडिकल विद्यार्थियों के साथ ही समाज को स्वच्छता और स्वास्थ्य का संदेश देने वाले महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को ‘लकवा’ मार गया है। यहां बने सर्वेंट क्वार्टरों में ‘इज्जत घर’ (शौचालय) की व्यवस्था नहीं है। मजबूरी में कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य ‘खुले में’ जाने के लिए मजबूर हैं। इससे कॉलेज परिसर में भी गंदगी फैल रही है। इस कारण यहां बीमारी फैलने का खतरा बढ़ता जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज में लगभग वर्ष 1970 में सर्वेंट क्वार्टरों का निर्माण कराया गया था। प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसरों के आवास के पास सर्वेंट क्वार्टर बने हुए हैं। जिनमें संबंधित कर्मचारी रहते हैं। मौजूदा समय में ऐसे 25-30 क्वार्टर बने हुए हैं। इन क्वार्टरों में कर्मचारियों को मूलभूत सुविधाओं तक के लिए तरसना पड़ रहा है। क्वार्टर में रहने के लिए सिर्फ एक कमरा होता है। परिवार में चार या उससे अधिक सदस्य होने की वजह से कर्मचारियों ने बरामदा या फिर आसपास पड़ी कुछ जमीन पर टीन शेड डालकर एक और कमरा बना लिया है। ऐसे में किसी तरह गृहस्थी चल रही है मगर क्वार्टरों में शौचालय की व्यवस्था न होने की वजह से कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य खुले में शौच के लिए मजबूर हैं। इससे कॉलेज परिसर में डॉक्टरों के आवासों के पास गंदगी फैली रहती है। गंदगी की वजह से परिसर में बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है।
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आज तक नहीं आया बजट
मेडिकल कॉलेज के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए बने आवासों के सुदृढ़ीकरण के लिए बजट तो सरकारों द्वारा कभी-कभी भेजा गया मगर सर्वेंट क्वार्टरों के लिए आज तक कुछ नहीं हुआ है। न कभी इनकी मरम्मत हुई, न ही नया निर्माण।
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सर्वेंट क्वार्टरों में शौचालय नहीं बने हुए हैं। इनका निर्माण कराने के लिए कई बार कॉलेज स्तर पर चर्चा हो चुकी है। साथ ही, शासन को भी प्रस्ताव भेजा गया है। वैकल्पिक व्यवस्था के लिए खेल मैदान के पास दो शौचालय बनवाए गए थे। - डॉ. हरीशचंद्र आर्या, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज।
फोटो..
चालीस साल से सर्वेंट क्वार्टर में रह रहे हैं। अब तक आवास में शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। परिवार में सात सदस्य हैं। सभी को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। - चिंताराम, कर्मचारी।
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सर्वेंट क्वार्टर में शौचालय नहीं बने हुए हैं। इसके अलावा फर्श तक कच्ची थी। खुद पैसे खर्च कराकर पक्की करवाई गई। क्वार्टर में एक ही कमरा बना हुआ है। कई समस्याएं हैं। - पूजा, कर्मचारी की परिजन।