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पराधीन भारत में राष्ट्रकवि ने नवचेतना का सृजन किया -City

Fri, 03 Aug 2018 07:48 PM IST
Updated Fri, 03 Aug 2018 07:48 PM IST
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पराधीन भारत में राष्ट्रकवि ने नवचेतना का सृजन किया -City
इस कार्यक्रम के साथ मालिनी अवस्थी की प्रस्तुति की खबर भी आएगी, उसका भी फोटो होगा। कृपया ढंग से फ्लैश करें।
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फोटो..
पराधीन भारत में राष्ट्रकवि ने नवचेतना का सृजन किया
- बीयू में महाकाव्यात्मक प्रतिभा मैथिलीशरण गुप्त विषयक संगोष्ठी में बोले प्रो. नंदकिशोर
- भारतीय हिंदी परिषद के प्रो. भरत बोले, गुप्त जी के महाकाव्यों की आज भी प्रासंगिकता
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में महाकाव्यात्मक प्रतिभा मैथिलीशरण गुप्त विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य अतिथि केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के निदेशक प्रो. नंद किशोर पांडेय ने कहा कि मैथिलीशरण गुप्त ने पराधीन भारत में नवचेतना का सृजन किया। उन्होंने छायावाद, प्रगतिवाद तथा प्रयोगवाद को खड़े और विकसित होने के लिए मजबूत आधार तैयार किया। उनके दिए आधार पर ही आज छायावाद, प्रगतिवाद तथा प्रयोगवाद की काव्य धाराएं विकसित हो पाई हैं।
उन्होंने कहा कि मैथिलीशरण गुप्त ने राजनीतिक, सामाजिक आंदोलनों को बहुत सहजता से अपनी रचनाओं में काव्यात्मक रूप में प्रस्तुत किया। गुप्त जी के भारत भारती ने उस समय अतीत का स्मरण दिलाकर सोए हुए भारतीयों को जगाने का काम किया था। विशिष्ट अतिथि बिहार की भारतीय हिंदी परिषद के प्रधानमंत्री प्रो. भरत सिंह ने कहा कि आज के युग में भी मैथिलीशरण गुप्त द्वारा लिखे हुए महाकाव्यों की प्रासंगिकता है। उन्होंने महाकाव्यों के जरिए देशभक्ति का प्रचार किया। यशोधरा के जरिए नारी विमर्श एवं नारीवादी आंदोलन को आगे बढ़ाया। इलाहाबाद के प्रो. रामकिशोर शर्मा ने कहा कि महाकाव्यों की अपनी परंपरा रही है। मैथिलीशरण गुप्त ने अपनी रचनाओं के जरिए नवजागरण क ा उद्घोष किया था। गुप्त जी की रचनाएं सीधे पाठक के मस्तिष्क में घर कर जाती हैं। उन्हें किसी भी अध्यापक व मध्यस्थ की जरूरत नहीं होती है।
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कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि जिस रचनाकार की रचना में काल और समय का समावेश नहीं होता है, उसकी रचनाएं प्रसिद्ध भले हो जाएं पर वे कालजयी नहीं हो सकतीं। राष्ट्रकवि ने अपनी रचनाओं में न सिर्फ काल व वातावरण का अद्भुत समन्वय किया, बल्कि अपनी रचनाओं द्वारा जन जागरण का कार्य भी किया। गुप्त जी ने पुनर्निर्माण के आंदोलनों को अपने साहित्य एवं काव्य में स्थान दिया। उनके काव्य में छायावाद के आने की आहट है। संगोष्ठी में भारतीय हिंदी परिषद की पत्रिका हिंदी अनुशीलन, डॉ. गौरीशंकर उपाध्याय की पुस्तक सरल बुंदेली शब्दकोष का विमोचन किया गया। इस दौरान कुलसचिव सीपी तिवारी, डॉ. पुनीत बिसारिया, डॉ. अचला पांडेय, डॉ. मुन्ना तिवारी, डॉ. नवीन चंद्र पटेल, डॉ. श्रीहरि त्रिपाठी, नरेंद्र मिश्र, अश्विनी कुमार शुक्ल, सभापति मिश्र, लक्ष्मण नारायण भारद्वाज, डॉ. नवेंदु कुमार सिंह, पन्नालाल ‘असर’ मौजूद रहे।
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