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साई सेंटर की खबर-City
Updated Fri, 13 Oct 2017 09:15 PM IST
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विदा नहीं होता साई सेंटर, अगर जिम्मेदार जागरूक होते
- बराबर कोशिश होती रही, इसे बंद करने की
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) क ा सेंटर झांसी से विदा नहीं होता, अगर बुंदेलखंड के विकास की बात करने वाले जागरूक रहते। इसे बंद करने की योजना पिछले काफी लंबे समय से चल रही थी। वर्ष 2012 के बाद हॉकी के नए कोच की तैनाती नहीं होने पर सेंटर में हॉकी की डी-बोर्डिंग व्यवस्था फेल हो गई। जिमनास्ट कोच के 2016 में दिल्ली में स्थानांतरण होने के बाद सेंटर में ताला लगा दिया गया। इसके बावजूद भी कोई नहीं चेता। ऐसे में मंगलवार को सेंटर झांसी से हमेशा के लिए विदा हो गया।
कई अवसर आए, जागरूक हो सकते थे
हॉकी और अन्य खेलों को प्रभावित करने की कोशिश स्थानीय स्तर पर हमेशा रही है। 80 के दशक में प्रदेश खेल विभाग ने हॉकी का हॉस्टल खोला था, जिसे बंद करा दिया गया था। वहीं, साई सेंटर को भी बंद कराने की कोशिश लगातार चलती रही। कई अवसर आए, जब साई सेंटर को लेकर सभी जागरूक हो सकते थे।
हीरालाल कुशवाहा, सेवानिवृत्त हॉकी कोच, साई सेंटर झांसी।
वापस लाने की मुहिम चले
झांसी खेलों का गढ़ है। ध्यानचंद सहित कई अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय खिलाड़ी इस धरती ने दिए हैं। जरूरत थी कि साई सेंटर को लेकर जिम्मेदार जागरूक रहते। अब आवश्यकता है कि हमारे जनप्रतिनिधि और पूर्व एवं वर्तमान खिलाड़ी साई सेंटर को वापस लाने के लिए मिलकर प्रयास करें। चाहे इसके लिए आंदोलन ही क्यों न करना पडे़।
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सुनीता तिवारी, पूर्व राष्ट्रीय महिला हॉकी खिलाड़ी।
सक्रिय हों जनप्रतिनिधि
झांसी में स्पोर्ट्स हॉस्टल हॉकी था, जिसे रामपुर भेज दिया गया। किसी ने भी आपत्ति नहीं उठाई। यहां के खिलाड़ियों का हक हमेशा अन्य जिलों में भेजा जाता रहा है। आवश्यकता है कि साई का सेंटर पुन: शुरू हो, स्थानीय सांसद और अन्य जनप्रतिनिधि भारत सरकार और साई निदेशक को इसके लिए पत्र भेजें और जोरदार पहल करें।
सुबोध खंडकर, पूर्व अंतर्राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी।
जी जान लगा दें राजनेता
सेंटर पर पहले हॉकी, जिमनास्ट व खो - खो का प्रशिक्षण मिलता था। खिलाड़ियों को आर्थिक मदद भी मिलती थी, जिससे वह अपनी डाइट का खयाल रख सकें। सेंटर के बंद होने से यहां के खेल को बहुत क्षति हुई है। राजनेताओं को चाहिए कि वह सेंटर की वापसी के लिए जी जान लगा दें।
बृजेंद्र यादव, जिला क्रिकेट संघ सचिव एवं पूर्व क्रिकेटर।
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विदा नहीं होता साई सेंटर, अगर जिम्मेदार जागरूक होते
- बराबर कोशिश होती रही, इसे बंद करने की
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) क ा सेंटर झांसी से विदा नहीं होता, अगर बुंदेलखंड के विकास की बात करने वाले जागरूक रहते। इसे बंद करने की योजना पिछले काफी लंबे समय से चल रही थी। वर्ष 2012 के बाद हॉकी के नए कोच की तैनाती नहीं होने पर सेंटर में हॉकी की डी-बोर्डिंग व्यवस्था फेल हो गई। जिमनास्ट कोच के 2016 में दिल्ली में स्थानांतरण होने के बाद सेंटर में ताला लगा दिया गया। इसके बावजूद भी कोई नहीं चेता। ऐसे में मंगलवार को सेंटर झांसी से हमेशा के लिए विदा हो गया।
कई अवसर आए, जागरूक हो सकते थे
हॉकी और अन्य खेलों को प्रभावित करने की कोशिश स्थानीय स्तर पर हमेशा रही है। 80 के दशक में प्रदेश खेल विभाग ने हॉकी का हॉस्टल खोला था, जिसे बंद करा दिया गया था। वहीं, साई सेंटर को भी बंद कराने की कोशिश लगातार चलती रही। कई अवसर आए, जब साई सेंटर को लेकर सभी जागरूक हो सकते थे।
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हीरालाल कुशवाहा, सेवानिवृत्त हॉकी कोच, साई सेंटर झांसी।
वापस लाने की मुहिम चले
झांसी खेलों का गढ़ है। ध्यानचंद सहित कई अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय खिलाड़ी इस धरती ने दिए हैं। जरूरत थी कि साई सेंटर को लेकर जिम्मेदार जागरूक रहते। अब आवश्यकता है कि हमारे जनप्रतिनिधि और पूर्व एवं वर्तमान खिलाड़ी साई सेंटर को वापस लाने के लिए मिलकर प्रयास करें। चाहे इसके लिए आंदोलन ही क्यों न करना पडे़।
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सुनीता तिवारी, पूर्व राष्ट्रीय महिला हॉकी खिलाड़ी।
सक्रिय हों जनप्रतिनिधि
झांसी में स्पोर्ट्स हॉस्टल हॉकी था, जिसे रामपुर भेज दिया गया। किसी ने भी आपत्ति नहीं उठाई। यहां के खिलाड़ियों का हक हमेशा अन्य जिलों में भेजा जाता रहा है। आवश्यकता है कि साई का सेंटर पुन: शुरू हो, स्थानीय सांसद और अन्य जनप्रतिनिधि भारत सरकार और साई निदेशक को इसके लिए पत्र भेजें और जोरदार पहल करें।
सुबोध खंडकर, पूर्व अंतर्राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी।
जी जान लगा दें राजनेता
सेंटर पर पहले हॉकी, जिमनास्ट व खो - खो का प्रशिक्षण मिलता था। खिलाड़ियों को आर्थिक मदद भी मिलती थी, जिससे वह अपनी डाइट का खयाल रख सकें। सेंटर के बंद होने से यहां के खेल को बहुत क्षति हुई है। राजनेताओं को चाहिए कि वह सेंटर की वापसी के लिए जी जान लगा दें।
बृजेंद्र यादव, जिला क्रिकेट संघ सचिव एवं पूर्व क्रिकेटर।