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90 फीसदी भवनों में अभी भी नहीं लगा सिस्टम
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jun 2016 12:54 AM IST
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rain, jhansi news
- फोटो : demo
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झांसी। 300 वर्ग मीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल के भवनों के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम (वर्षा जल संचयन संयत्र) अनिवार्य है। लेकिन महानगर के 90 फीसदी भवनों में यह सिस्टम नहीं लगा है। झांसी विकास प्राधिकरण (जेडीए) को भी इसकी चिंता नहीं है। हां, कभी-कभी कुछ भवन मालिकों को नोटिस भेजकर खानापूर्ति कर ली जाती है।
शासन ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि 300 वर्ग मीटर या इससे अधिक क्षेत्रफल में बनाए जाने वाले नए भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य है। इससे वर्षा के जल को एकत्र कर जमीन में प्रवाहित किया जाता है, ताकि भूगर्भ जल स्तर ऊंचा बना रहे। इसे लगाने में ज्यादा खर्च न होने के बावजूद नए भवनों के निर्माण में इसकी अनिवार्यता को अनदेखा किया जा रहा है। जेडीए द्वारा पास किए गए प्रत्येक नक्शे में यह शर्त होती है कि नवनिर्मित भवन में यह सिस्टम लगाया जाएगा, मगर ऐसा होता नहीं है।
सिस्टम न लगा होने पर विकास प्राधिकरण के पास कार्रवाई का अधिकार हैं। लेकिन, जेडीए अधिकारियों को न तो सर्वे करने की फुर्सत है और न ही कार्रवाई की। हां, कभी-कभी कुछ भवन मालिकों को नोटिस जारी कर अपनी ड्यूटी पूरी कर ली जाती है।
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प्राधिकरण को यह तक नहीं मालूम कि कितने सरकारी और गैर सरकारी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया है। प्राधिकरण के सहायक अभियंता आर.के.वर्मा का कहना है कि इस मामले में शीघ्र ही भवनों का मौके पर सत्यापन किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो कार्रवाई भी होगी।
इन भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
---------------------------------
-कमिश्नरी के मीटिंग हॉल में एक ,विकास भवन में एक ,अरबन हाट में दो, अशोका सनफ्रॉन सिटी में पांच,श्री रायल सिटी में चार।
ऐसे लगाया जाता है सिस्टम
-----------------------
- छत पर पानी के लिए टैंक बनाया जाता है। उसमें होल कर पाइप जमीन तक लाया जाता है। बीच में पिट (फिल्टर) बनाई जाती है। इस पीट में जाली, गिट्टी, मौरंग, बालू भरी जाती है। पाइप को जमीन में बोरिंग कर डाला जाता है। यह पाइप भवन की छत से जमीन के भीतर तक होता है। इसके जरिए ही छत पर बने टैंक में एकत्र बारिश के पानी को जमीन के भीतर पहुंचा दिया जाता है।
फायदे ही फायदे
-------------
- वर्षा का पानी बेकार नहीं जाता।
- भूगर्भ जल स्तर संतुलित रहता है।
- हैंडपंप, कुएं और कुएं लंबे समय तक चलते हैं।
-पेयजल की समस्या नहीं होती।
कम लागत, बड़ा काम
-300 वर्ग मीटर के भवन में निर्माण के समय ही इसे बनाया जाना चाहिए। रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लगाने में कम से कम दस हजार रुपये का खर्च आता है। यदि लंबे समय तक के लिए लाभ लेना है तो लगभग 50 हजार रुपये खर्च होंगे।
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शासन ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि 300 वर्ग मीटर या इससे अधिक क्षेत्रफल में बनाए जाने वाले नए भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य है। इससे वर्षा के जल को एकत्र कर जमीन में प्रवाहित किया जाता है, ताकि भूगर्भ जल स्तर ऊंचा बना रहे। इसे लगाने में ज्यादा खर्च न होने के बावजूद नए भवनों के निर्माण में इसकी अनिवार्यता को अनदेखा किया जा रहा है। जेडीए द्वारा पास किए गए प्रत्येक नक्शे में यह शर्त होती है कि नवनिर्मित भवन में यह सिस्टम लगाया जाएगा, मगर ऐसा होता नहीं है।
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सिस्टम न लगा होने पर विकास प्राधिकरण के पास कार्रवाई का अधिकार हैं। लेकिन, जेडीए अधिकारियों को न तो सर्वे करने की फुर्सत है और न ही कार्रवाई की। हां, कभी-कभी कुछ भवन मालिकों को नोटिस जारी कर अपनी ड्यूटी पूरी कर ली जाती है।
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प्राधिकरण को यह तक नहीं मालूम कि कितने सरकारी और गैर सरकारी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया है। प्राधिकरण के सहायक अभियंता आर.के.वर्मा का कहना है कि इस मामले में शीघ्र ही भवनों का मौके पर सत्यापन किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो कार्रवाई भी होगी।
इन भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
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-कमिश्नरी के मीटिंग हॉल में एक ,विकास भवन में एक ,अरबन हाट में दो, अशोका सनफ्रॉन सिटी में पांच,श्री रायल सिटी में चार।
ऐसे लगाया जाता है सिस्टम
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- छत पर पानी के लिए टैंक बनाया जाता है। उसमें होल कर पाइप जमीन तक लाया जाता है। बीच में पिट (फिल्टर) बनाई जाती है। इस पीट में जाली, गिट्टी, मौरंग, बालू भरी जाती है। पाइप को जमीन में बोरिंग कर डाला जाता है। यह पाइप भवन की छत से जमीन के भीतर तक होता है। इसके जरिए ही छत पर बने टैंक में एकत्र बारिश के पानी को जमीन के भीतर पहुंचा दिया जाता है।
फायदे ही फायदे
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- वर्षा का पानी बेकार नहीं जाता।
- भूगर्भ जल स्तर संतुलित रहता है।
- हैंडपंप, कुएं और कुएं लंबे समय तक चलते हैं।
-पेयजल की समस्या नहीं होती।
कम लागत, बड़ा काम
-300 वर्ग मीटर के भवन में निर्माण के समय ही इसे बनाया जाना चाहिए। रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लगाने में कम से कम दस हजार रुपये का खर्च आता है। यदि लंबे समय तक के लिए लाभ लेना है तो लगभग 50 हजार रुपये खर्च होंगे।