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तर्पण की खबर-City
Updated Tue, 12 Sep 2017 06:59 PM IST
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तर्पण में अर्पण नहीं करना अशुद्ध जल
सब हेड: जलाशयों में गंदगी के कारण अब घर से ही पूर्वजों को पूज रहे लोग
क्रासर
नदी, तालाब के घाटों पर है पूजन का विधान
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
पितृ पक्ष में पुरखों के तर्पण के लिए नदी या तालाबों के घाट पर स्नान करके पूजन करने का विधान है। लेकिन, महानगर के सभी जलाशयों में गंदगी और दूषित जल होने के कारण लोग इससे अपने पूर्वजों का पूजन नहीं करना चाहते हैं। इसलिए ज्यादातर लोग अपने घर पर ही पूर्वजों का पूजन कर रहे हैं।
हिन्दू धर्म ग्रंथ निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु के अनुसार पितृ पक्ष में पूर्वजों का जल से तर्पण करना जरूरी है। इन ग्रंथों में जल को अमृत और प्राण कहा गया है। इसके तर्पण से पुरखों की तृप्ति होती है। महंत विष्णु दत्त स्वामी ने बताया कि इन धर्म ग्रंथों के मुताबिक जलाशयों में तर्पण के लिए इसलिए जाना जरूरी है कि नदी, तालाब व जल कुंड के तट पर देवता अंश रूप में वास करते है। इसलिए पितृ पक्ष में जलाशयों में जाकर पुरखों को तर्पण का विशेष महत्व है।
महानगर के प्रमुख जलाशयों में पानी वाली धर्मशाला, लक्ष्मी तालाब और सीपरी-शिवपुरी मार्ग स्थित पहूज नदी की हालत बेहद खराब हैं। क ाई, कचरा और पानी से उठती बदबू लोगों को तट पर खड़ा भी नहीं होने दे रही है। ऐसे में कई लोगों ने पितृ पक्ष के पहले दिन इन जलाशयों में जाकर तर्पण किया, फिर घर में जल तर्पण करना बेहतर समझा।
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दोपहर तक लगती थी भीड़
पानी वाली धर्मशाला में महाराष्ट्र समाज सहित कई समाजों के लोग जल तर्पण को आते थे। दोपहर तक भीड़ लगती थी। लेकिन सफाई न होने पर लोग घरों पर ही तर्पण कर देते है। हम खुद भी नहीं जाते है।
गजानन खानवलकर निवासी नरसिंह राव टौरिया
नालों का पानी घुसता है तालाबों में
तर्पण शुद्ध जल से करना चाहिए। महानगर के तालाबों व पानी वाली धर्मशाला में नालों का गंदा पानी प्रवेश आने से वह दूषित हो जाता है। साफ सफाई भी नहीं होती है। ऐसे में घर पर ही तर्पण करना ठीक समझते है।
प्रसून वर्मा निवासी इंद्रपुरी कॉलोनी
जल शुद्ध होना जरूरी है
पुरखों को जल तर्पण के अवसर पर जल व मन दोनों शुद्ध होना चाहिए। क्योंकि तर्पण करना धार्मिक कार्य है। हालांकि जलाशयों का पानी शुद्ध नहीं है, तो विवश होकर घर पर ही तर्पण कर देते है।
अनिल दीक्षित निवासी पंचकुइयां
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तर्पण में अर्पण नहीं करना अशुद्ध जल
सब हेड: जलाशयों में गंदगी के कारण अब घर से ही पूर्वजों को पूज रहे लोग
क्रासर
नदी, तालाब के घाटों पर है पूजन का विधान
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
पितृ पक्ष में पुरखों के तर्पण के लिए नदी या तालाबों के घाट पर स्नान करके पूजन करने का विधान है। लेकिन, महानगर के सभी जलाशयों में गंदगी और दूषित जल होने के कारण लोग इससे अपने पूर्वजों का पूजन नहीं करना चाहते हैं। इसलिए ज्यादातर लोग अपने घर पर ही पूर्वजों का पूजन कर रहे हैं।
हिन्दू धर्म ग्रंथ निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु के अनुसार पितृ पक्ष में पूर्वजों का जल से तर्पण करना जरूरी है। इन ग्रंथों में जल को अमृत और प्राण कहा गया है। इसके तर्पण से पुरखों की तृप्ति होती है। महंत विष्णु दत्त स्वामी ने बताया कि इन धर्म ग्रंथों के मुताबिक जलाशयों में तर्पण के लिए इसलिए जाना जरूरी है कि नदी, तालाब व जल कुंड के तट पर देवता अंश रूप में वास करते है। इसलिए पितृ पक्ष में जलाशयों में जाकर पुरखों को तर्पण का विशेष महत्व है।
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महानगर के प्रमुख जलाशयों में पानी वाली धर्मशाला, लक्ष्मी तालाब और सीपरी-शिवपुरी मार्ग स्थित पहूज नदी की हालत बेहद खराब हैं। क ाई, कचरा और पानी से उठती बदबू लोगों को तट पर खड़ा भी नहीं होने दे रही है। ऐसे में कई लोगों ने पितृ पक्ष के पहले दिन इन जलाशयों में जाकर तर्पण किया, फिर घर में जल तर्पण करना बेहतर समझा।
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दोपहर तक लगती थी भीड़
पानी वाली धर्मशाला में महाराष्ट्र समाज सहित कई समाजों के लोग जल तर्पण को आते थे। दोपहर तक भीड़ लगती थी। लेकिन सफाई न होने पर लोग घरों पर ही तर्पण कर देते है। हम खुद भी नहीं जाते है।
गजानन खानवलकर निवासी नरसिंह राव टौरिया
नालों का पानी घुसता है तालाबों में
तर्पण शुद्ध जल से करना चाहिए। महानगर के तालाबों व पानी वाली धर्मशाला में नालों का गंदा पानी प्रवेश आने से वह दूषित हो जाता है। साफ सफाई भी नहीं होती है। ऐसे में घर पर ही तर्पण करना ठीक समझते है।
प्रसून वर्मा निवासी इंद्रपुरी कॉलोनी
जल शुद्ध होना जरूरी है
पुरखों को जल तर्पण के अवसर पर जल व मन दोनों शुद्ध होना चाहिए। क्योंकि तर्पण करना धार्मिक कार्य है। हालांकि जलाशयों का पानी शुद्ध नहीं है, तो विवश होकर घर पर ही तर्पण कर देते है।
अनिल दीक्षित निवासी पंचकुइयां