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102 वर्ष की उम्र में दिखा मतदान का जोश
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102 वर्ष की उम्र में दिखा मतदान का जोश
झांसी। बूथों पर मतदान करने पहुंच रहे मतदाताओं में खासा जोश दिखाई दिया। कई मतदाता ऐसे पहुंचे जो चलने में असमर्थ थे पर अपने वोट को खराब नहीं जाने दिया। संसाधनों के जरिये बूथ पर पहुंचकर वोट डाला। वोट करने पहुंचे सबसे उम्र दराज मतदाता स्वामी शरण रहे।
कलेक्ट्रेट में पेशगार के पद से रिटायर 102 वर्ष के स्वामी शरण सुभाष गंज के रहने वाले हैं। उनकी पत्नी महाराज किशोरी जो शिक्षिका के पद से रिटायर हैं ने अपने कर्तव्यों को निभाया। स्वामी शरण ने बताया कि अपने जीवनकाल में उन्होंने एक भी मतदान नहीं छोड़ा और उस कर्तव्य को वह आज भी निभा रहे हैं। जबकि, दंपति चलने फिरने में असमर्थ हैं। बावजूद, व्हीलचेयर की मदद से बूथ पर पहुंचे और मतदान किया।
वहीं, रेलवे से डिप्टी एसएस पद से सेवानिवृत्त 92 वर्षीय प्रमोद चंद अग्रवाल सुबह साढ़े ग्यारह बजे हाफिज सिद्दीकी आदर्श मतदान केंद्र पहुंचे। उनके परिजनों ने बताया कि ऐसा कोई भी चुनाव नहीं रहा, जिसमें उन्होंने मतदान नहीं किया है। इसी प्रकार से कई और मतदाता बूथों पर व्हील चेयर या फिर अन्य संसाधनों के माध्यम से बुजुर्ग अपने-अपने मताधिकार का प्रयोग करने पहुंचे। बुजुर्ग मतदाताओं की बूथों पर तैनात सुरक्षा और मतदान कर्मियों ने भरपूर मदद की।
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झांसी। बूथों पर मतदान करने पहुंच रहे मतदाताओं में खासा जोश दिखाई दिया। कई मतदाता ऐसे पहुंचे जो चलने में असमर्थ थे पर अपने वोट को खराब नहीं जाने दिया। संसाधनों के जरिये बूथ पर पहुंचकर वोट डाला। वोट करने पहुंचे सबसे उम्र दराज मतदाता स्वामी शरण रहे।
कलेक्ट्रेट में पेशगार के पद से रिटायर 102 वर्ष के स्वामी शरण सुभाष गंज के रहने वाले हैं। उनकी पत्नी महाराज किशोरी जो शिक्षिका के पद से रिटायर हैं ने अपने कर्तव्यों को निभाया। स्वामी शरण ने बताया कि अपने जीवनकाल में उन्होंने एक भी मतदान नहीं छोड़ा और उस कर्तव्य को वह आज भी निभा रहे हैं। जबकि, दंपति चलने फिरने में असमर्थ हैं। बावजूद, व्हीलचेयर की मदद से बूथ पर पहुंचे और मतदान किया।
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वहीं, रेलवे से डिप्टी एसएस पद से सेवानिवृत्त 92 वर्षीय प्रमोद चंद अग्रवाल सुबह साढ़े ग्यारह बजे हाफिज सिद्दीकी आदर्श मतदान केंद्र पहुंचे। उनके परिजनों ने बताया कि ऐसा कोई भी चुनाव नहीं रहा, जिसमें उन्होंने मतदान नहीं किया है। इसी प्रकार से कई और मतदाता बूथों पर व्हील चेयर या फिर अन्य संसाधनों के माध्यम से बुजुर्ग अपने-अपने मताधिकार का प्रयोग करने पहुंचे। बुजुर्ग मतदाताओं की बूथों पर तैनात सुरक्षा और मतदान कर्मियों ने भरपूर मदद की।
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