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बदलते मौसम में बच्चों को निमोनिया का खतरा-City
Updated Thu, 23 Aug 2018 04:40 AM IST
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बदलते मौसम में बच्चों को निमोनिया का खतरा
- आम बीमारियों से काफी मिलते-जुलते हैं लक्षण
- बीमारी से छाती में संक्रमण व लगातार खांसी होती
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बदलते मौसम के साथ बच्चों को डायरिया, हैजा के साथ-साथ निमोनिया भी हो सकता है। इसके लक्षण भी आम बीमारियों से काफी मिलते-जुलते हैं लेकिन निमोनिया को लोग आमतौर पर मामूली बीमारी मानकर नजर अंदाज करने की गलती करते हैं। इस कारण यह बीमारी रोगी के लिए बेहद खतरनाक हो जाती है। भारत में बाल निमोनिया एक गंभीर बीमारी हैं। पांच साल से कम उम्र के किसी भी बच्चे को यह बीमारी कभी भी हो सकती है।
बुखार, खांसी और सांस तेजी से चलना निमोनिया के लक्षण हैं। यह बीमारी अक्सर जीवाणु या कभी-कभी विषाणुओं से होती है। निमोनिया सामान्य बीमारी है लेकिन अगर सही इलाज न हो तो यह बड़ी परेशानी का सबब भी बन सकती है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए। सेव द चिल्ड्रेन द्वारा फाइटिंग फॉर ब्रीथ 2017 की रिपोर्ट के अनुसार बताया गया कि वर्ष 2015 में निमोनिया की वजह से भारत में पांच साल से कम आयु के 178717 बच्चों की मृत्यु हो गई थी। इसका मतलब है कि उस दौरान हर घंटे 20 बच्चे इस बीमारी से मर गए थे।
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डब्ल्यूएचओ के अनुसार भारत में तीन मौतों में से एक निमोनिया के कारण हेाती है। भारत में निमोनिया शिशु मौत का प्रमुख कारण है। वर्ष 2015 में 9,20,136 बच्चों की मृत्यु सिर्फ निमोनिया के कारण हुई थी। स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार जिले में जनवरी से दिसंबर 2016 तक 4370 निमोनिया के मरीज पाए गए। वहीं, फरवरी 2017 से दिसंबर 2017 तक 5296। फरवरी 2018 से मार्च 2018 तक 270 निमोनिया से ग्रसित मरीज मिले।
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क्या है निमोनिया
निमोनिया सांस से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, जिसमें फेफड़ों में संक्रमण हो जाता है। आमतौर पर बुखार या जुकाम होने के बाद निमोनिया होता है और यह 10-12 दिन में ठीक हो जाता है लेकिन कई बार यह खतरनाक भी हो जाता है। खासकर 5 साल से छोटे बच्चों और 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में, क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। निमोनिया होने पर फेफड़ों में सूजन आ जाती है और कई बार पानी भी भर जाता हैं। बच्चों में आमतौर पर वायरल से निमोनिया होता है। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल गुप्ता ने बताया कि सर्दी से बचाव के लिए नवजात शिशु को हमेशा मौसम के अनुसार कपड़े पहनाएं। बच्चे को उल्टी, दस्त व बुखार होने पर शिशु को तुरंत अस्पताल ले जाएं। साथ ही निमोनिया से बचाव के लिए बच्चे को निमोनिया का टीका भी लगवाएं।
क्यों होता है निमोनिया
यह बीमारी ज्यादातर बैक्टीरिया, वायरस या फंगस के हमले से होती है। मौसम बदलने, सर्दी लगने, खसरा और चिकनपाक्स जैसी बीमारियों के बाद भी इसकी आशंका बढ़ जाती हैं। टीबी, एचआईवी पॉजिटिव, अस्थमा, मधुमेह, कैंसर और ह्रदय रोगियों को निमोनिया होने की आशंका ज्यादा होती है।