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भारत युवा शक्ति, चीन बुड्ढा और जापान बहुत बुड्ढा हो गया-City

Fri, 10 Nov 2017 07:38 PM IST
Updated Fri, 10 Nov 2017 07:38 PM IST
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भारत युवा शक्ति, चीन बुड्ढा और जापान बहुत बुड्ढा हो गया-City
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भारत युवा शक्ति, चीन बुड्ढा और जापान बहुत बुड्ढा
- लेफ्टिनेंट जरनल भंडारी ने युवाओं से देश को प्रगति की ओर ले जाने को कहा
- विश्व के शीर्ष 200 विश्वविद्यालय में शामिल होने के लिए बीयू पर बड़ी जिम्मेदारी: नाईक
टैग: दीक्षांत समारोह
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के 22वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जरनल डॉ. मोहन भंडारी ने कहा कि चीन बुड्ढा और जापान बहुत बुड्ढा हो चुका है। मौजूदा समय में भारत युवा शक्ति बनकर उभरा है। ऐसे में युवाओं को 25-30 साल में देश को प्रगति की ओर ले जाना चाहिए। नई पीढ़ी की दशा-दिशा सुधारने की जरूरत शिक्षण संस्थानों के कंधों पर है।
1971 भारत-पाक युद्ध के नायक रहे भंडारी ने कहा कि अमेरिका में हर साल 65,000 इंजीनियर निकलते हैं और भारत में साढ़े चार लाख। संख्यात्मक की जगह गुणात्मक दृष्टिकोण में विश्वास करना चाहिए। विश्व के श्रेष्ठ 200 विश्वविद्यालय में एक भी भारत का नहीं है, जबकि अपने देश से महान वैज्ञानिक, डॉक्टर आदि निकलते हैं। उन्होंने कहा कि भारत को आइंस्टीन-न्यूटन की नहीं बल्कि नेतृत्व करने वालों की जरूरत है। विश्वविद्यालय में क्षमता से अधिक विद्यार्थी हैं और श्रेष्ठ शिक्षकों का घोर अभाव है। शिक्षण संस्थानों को सिर्फ किताबी ज्ञान देने के बजाए विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। सुझाव दिया कि अधिकांश विश्वविद्यालयों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करना चाहिए। इससे गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। मुख्य अतिथि ने ‘वो पथ क्या पथिक कुशलता क्या, जिस पथ पर बिखरें शूल न हों, नाविक की धैर्य कुशलता क्या, जब धाराएं प्रतिकूल न हों’ कविता पढ़कर युवाओं में जोश भरने का प्रयास किया।
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राज्यपाल/कुलाधिपति राम नाईक ने कहा कि आज भारत का छात्र विदेश जाकर अनुसंधान करता है और वहीं बस जाता है। इसलिए उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाई जानी चाहिए। अच्छे अनुसंधान करने की भी जरूरत है। राज्यपाल बोले कि बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी प्रदेश का सर्वोच्च विश्वविद्यालय है। ऐसे में विश्व के टॉप 200 यूनिवर्सिटी में अपनी जगह बनानी की बड़ी जिम्मेदारी भी बीयू पर है। कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने अतिथियों का आभार जताते हुए विश्वविद्यालय की उपलब्धियों के बारे में बताया। कार्यक्रम में 33 कुलाधिपति पदक बांटे गए। झांसी के मंडलायुक्त रह चुके पीवी जगनमोहन को डीलिट उपाधि दी गई। समापन पर कुलसचिव सीपी तिवारी ने आभार जताया।
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इस दौरान श्रम एवं सेवायोजन मंत्री मनोहरलाल पंथ, रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अरविंद कुमार, डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अरविंद दीक्षित, इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरपी यादव, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. सदानंद प्रसाद गुप्ता, प्रो. एमएल मौर्या, प्रो. सुनील काबिया, प्रो. सीबी सिंह, प्रो. प्रतीक अग्रवाल, प्रो. मुन्ना तिवारी, डॉ. पुनीत बिसारिया, इंजीनियर राहुल शुक्ला, डॉ. श्वेता पांडेय, डॉ. ऋषि सक्सेना, डॉ. यशोधरा शर्मा, डॉ. काव्या दुबे, डॉ. संतोष पांडेय, डॉ. धीरेंद्र यादव, डॉ. सुनील त्रिवेदी, डॉ. विनम्रसेन सिंह, इंजीनियर बृजेश लोधी, संदीप मिश्रा, डॉ. अनु सिंघला, डॉ. सीपी पैन्यूली, जीके नायक, मायाशंकर सिंह, वीरेंद्र राजपूत, रतन सिंह, उमेश शुक्ला मौजूद रहे।
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