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जलसंस्थान में पांच साल से धूल खा रहे पेंशन के 55 मामले
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झांसी। जलसंस्थान में भी अजब किस्से सामने आते हैं। जब महाप्रबंधक ने पेंशन पत्रावलियों की समीक्षा की तो पता चला कि 55 कर्मचारियों की पेंशन पत्रावलियां अभी धूल खा रही हैं, उन्हें स्वीकृति भी प्रदान नहीं की गई है। इस पर उन्होंने लिपिक का वेतन रोक दिया और दस दिन में सात अक्तूबर तक सभी कर्मचारियों की पेंशन पत्रावलियां पूर्ण करने के निर्देश दिए।
जलसंस्थान में 2016 से कर्मचारियों को पेंशन नहीं मिली है। पांच साल से कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन अभी भी 55 कर्मचारियों की पेंशन पत्रावलियां पूरी नहीं होने के कारण उन्हें पेंशन नहीं मिल रही है। परेशान होकर सेवानिवृत्त पंप ऑपरेटर राजेंद्र प्रसाद तिवारी एवं ड्राइवर बालक दास ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए जून 2021 को आदेश जारी कर सभी भुगतान करने के निर्देश दिए। जवाब में जलसंस्थान ने कोर्ट को जुलाई 2021 में सूचना दे दी कि सभी भुगतान कर दिए गए। लेकिन, सेवानिवृत्त पंप ऑपरेटर ने बताया कि उन्हें किसी प्रकार का भुगतान नहीं मिला है। इस पर कोर्ट ने जलसंस्थान को कड़ी फटकार लगाई। इससे विभाग की खासी किरकिरी हुई।
महाप्रबंधक कुलदीप सिंह के संज्ञान में यह मामला आने पर उन्होंने लिपिक से स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने लिपिक का जुलाई का वेतन भी रोक दिया, लेकिन लिपिक की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं आया। 55 कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गए और अब तक उनकी पेंशन से संबंधित पत्रावलियां विभाग में अटकी पड़ी हैं। महाप्रबंधक ने जब इसकी समीक्षा की तो पता चला कि संबंधित लिपिक पत्रावलियाें में रुचि नहीं दिखा रहा है। इस पर महाप्रबंधक ने लिपिक का सितंबर महीने का भी वेतन रोक दिया। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि प्रतिदिन दस पत्रावलियां पूरी की जाएं और सात अक्तूबर तक काम पूरा कर लिया जाए।
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जलसंस्थान में 2016 से कर्मचारियों को पेंशन नहीं मिली है। पांच साल से कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन अभी भी 55 कर्मचारियों की पेंशन पत्रावलियां पूरी नहीं होने के कारण उन्हें पेंशन नहीं मिल रही है। परेशान होकर सेवानिवृत्त पंप ऑपरेटर राजेंद्र प्रसाद तिवारी एवं ड्राइवर बालक दास ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए जून 2021 को आदेश जारी कर सभी भुगतान करने के निर्देश दिए। जवाब में जलसंस्थान ने कोर्ट को जुलाई 2021 में सूचना दे दी कि सभी भुगतान कर दिए गए। लेकिन, सेवानिवृत्त पंप ऑपरेटर ने बताया कि उन्हें किसी प्रकार का भुगतान नहीं मिला है। इस पर कोर्ट ने जलसंस्थान को कड़ी फटकार लगाई। इससे विभाग की खासी किरकिरी हुई।
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महाप्रबंधक कुलदीप सिंह के संज्ञान में यह मामला आने पर उन्होंने लिपिक से स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने लिपिक का जुलाई का वेतन भी रोक दिया, लेकिन लिपिक की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं आया। 55 कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गए और अब तक उनकी पेंशन से संबंधित पत्रावलियां विभाग में अटकी पड़ी हैं। महाप्रबंधक ने जब इसकी समीक्षा की तो पता चला कि संबंधित लिपिक पत्रावलियाें में रुचि नहीं दिखा रहा है। इस पर महाप्रबंधक ने लिपिक का सितंबर महीने का भी वेतन रोक दिया। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि प्रतिदिन दस पत्रावलियां पूरी की जाएं और सात अक्तूबर तक काम पूरा कर लिया जाए।
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