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मिनटों में बुक हो गए 54 लाख सब्सिडी के आनाज गोदाम
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झांसी। किसानों को कृषि उपकरणों पर मिलने वाली सब्सिडी पर सिंडीकेट हावी है। आज सब्सिडी के लिए ऑनलॉइन पंजीकरण आरंभ हुआ लेकिन, चंद मिनट के भीतर कुल करीब 54 लाख की सब्सिडी वाले यह आनाज गोदाम बुक कर लिए गए। किसानों ने इसकी शिकायत उपनिदेशक, कृषि से की। उपनिदेशक ने इस मामले की जांच के लिए शासन को पत्र भेजा है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत सरकार किसानों को कृषि उपकरणों के लिए साठ से अस्सी फीसद तक अनुदान देती है। अनुदान की यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। इसके लिए पारदर्शी किसान सेवा योजना नामक साइट पर पंजीकरण कराना होता है लेकिन, किसानों का आरोप है यही गड़बड़ी की सबसे बड़ी वजह है। प्रक्रिया के ऑनलाइन होने से किसान अपना पंजीकरण ही नहीं करा पाते। पंजीकरण आरंभ होने पर साइट नहीं खुलती। सेटिंग-गेटिंग के चलते अचानक किसी समय थोड़ी देर के लिए साइट खुलती है।
कुछ मिनटों में ही सारे अनुदान बुक हो जाते हैं। उसके बाद साइट बंद हो जाती है। बुधवार को अनाज गोदाम के लिए पंजीकरण आरंभ हुआ। साढ़े छह लाख रुपये की लागत के इन गोदामों के लिए साठ फीसदी अनुदान दिया जाना था। सुबह नौ बजे इसे खुलना था लेकिन, साइट दोपहर 11.03 बजे खुली। इसके चंद मिनट के भीतर सभी नौ गोदाम बुक हो गए। पंजीकरण केंद्रों पर इंतजार कर रहे किसान देखते रह गए। पंजीकरण में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए तमाम कृषक उपनिदेशक कार्यालय पहुंच गए। उनकी शिकायत पर प्रभारी उपनिदेशक ने पूरे मामले की जांच कराने को लेकर पत्र भेजा है।
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पहले भी कई बार उठ चुके सवाल
कृषि अनुदान हड़पने के कई मामले पहले भी उजागर हो चुके। कुछ दिनों पहले फर्जी एफपीओ के नाम पर अनुदान हड़पने की कोशिश हुई लेकिन, इस मामले का भंडाफोड़ हो जाने से अफसरों को आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करानी पड़ी। इसी तरह कुछ माह पहले भी एक मामला पकड़ा गया था। इस मामले में कृषि विभाग के एक संविदाकर्मी की भूमिका सामने आने पर उसके खिलाफ कार्रवाई भी हुई लेकिन, इसके बावजूद फर्जीवाड़ा थम नहीं रहा।
ऑनलाइन अनुदान योजना को लेकर काफी शिकायतें मिल रही हैं। शासन को जांच कराने के लिए पत्र भेजा जा रहा है।
केके सिंह प्रभारी उपनिदेशक, कृषि
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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत सरकार किसानों को कृषि उपकरणों के लिए साठ से अस्सी फीसद तक अनुदान देती है। अनुदान की यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। इसके लिए पारदर्शी किसान सेवा योजना नामक साइट पर पंजीकरण कराना होता है लेकिन, किसानों का आरोप है यही गड़बड़ी की सबसे बड़ी वजह है। प्रक्रिया के ऑनलाइन होने से किसान अपना पंजीकरण ही नहीं करा पाते। पंजीकरण आरंभ होने पर साइट नहीं खुलती। सेटिंग-गेटिंग के चलते अचानक किसी समय थोड़ी देर के लिए साइट खुलती है।
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कुछ मिनटों में ही सारे अनुदान बुक हो जाते हैं। उसके बाद साइट बंद हो जाती है। बुधवार को अनाज गोदाम के लिए पंजीकरण आरंभ हुआ। साढ़े छह लाख रुपये की लागत के इन गोदामों के लिए साठ फीसदी अनुदान दिया जाना था। सुबह नौ बजे इसे खुलना था लेकिन, साइट दोपहर 11.03 बजे खुली। इसके चंद मिनट के भीतर सभी नौ गोदाम बुक हो गए। पंजीकरण केंद्रों पर इंतजार कर रहे किसान देखते रह गए। पंजीकरण में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए तमाम कृषक उपनिदेशक कार्यालय पहुंच गए। उनकी शिकायत पर प्रभारी उपनिदेशक ने पूरे मामले की जांच कराने को लेकर पत्र भेजा है।
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पहले भी कई बार उठ चुके सवाल
कृषि अनुदान हड़पने के कई मामले पहले भी उजागर हो चुके। कुछ दिनों पहले फर्जी एफपीओ के नाम पर अनुदान हड़पने की कोशिश हुई लेकिन, इस मामले का भंडाफोड़ हो जाने से अफसरों को आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करानी पड़ी। इसी तरह कुछ माह पहले भी एक मामला पकड़ा गया था। इस मामले में कृषि विभाग के एक संविदाकर्मी की भूमिका सामने आने पर उसके खिलाफ कार्रवाई भी हुई लेकिन, इसके बावजूद फर्जीवाड़ा थम नहीं रहा।
ऑनलाइन अनुदान योजना को लेकर काफी शिकायतें मिल रही हैं। शासन को जांच कराने के लिए पत्र भेजा जा रहा है।
केके सिंह प्रभारी उपनिदेशक, कृषि