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पांच साल में नहीं बना 500 बेड का अस्पताल
Mon, 10 Jun 2019 12:38 AM IST
देवेंद्र कुमार
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Mon, 10 Jun 2019 12:38 AM IST
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- फोटो : demo
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज में बन रहे पांच सौ बेड के अस्पताल का काम पांच साल में भी पूरा नहीं हो सका है। हालात ये हैं कि बजट की कमी से पिछले दो साल काम बंद है। जबकि इसका निर्माण 2017 में पूरा होना था। अस्पताल के निर्माण पर अब तक 123 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। 60 करोड़ रुपये की और जरूरत है।
प्रदेश की सत्ता की बागडोर संभालने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव 27 सितंबर 2012 को पहली बार झांसी आए थे। उस दौरान उन्होंने कन्या विद्या धन और बेरोजगारी भत्ता योजना का शुभारंभ किया था। दिन में राजकीय इंटर कालेज में आयोजित इस कार्यक्रम के बाद शाम को अचानक उनका काफिला महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज पहुंच गया था। यहां उन्हें सरकारी चिकित्सा सेवा के बदतर हालात देखने को मिले थे। अस्पताल में पलंगों की कमी की वजह से मरीज जमीन पर लेटे मिले थे। इस स्थिति पर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई थी। साथ ही मेडिकल कालेज में अलग से एक पांच सौ बेड के अस्पताल की घोषणा कर दी थी।
औपचारिकताएं पूरी होने के बाद 2014 में इसका निर्माण शुरू हुआ था। निर्माण की जिम्मेदारी राजकीय निर्माण निगम को सौंपी गई थी। काम 2017 में पूरा किया जाना था। अस्पताल के निर्माण के लिए शासन की ओर से किस्तों में एक अरब 23 करोड़ रुपये की धनराशि अब तक उपलब्ध कराई गई है। अस्पताल भवन का 73 फीसदी निर्माण पूरा हो चुका है। शेष 27 प्रतिशत काम पूरा करने के लिए 60 करोड़ रुपये की और जरूरत है लेकिन, पिछले दो साल से एक पाई भी नहीं मिल पाई है।
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उल्लेखनीय है कि महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज में केवल झांसी ही नहीं बल्कि आसपास उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के जिलों के मरीज भी आते हैं। इससे यहां मरीजों की खासी भीड़ रहती है। अक्सर जगह के अभाव में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। यहां तक कि उन्हें निजी अस्पतालों में जाना पड़ जाता है। नए पांच सौ बेड के अस्पताल के बनने से मरीजों को इस समस्या से छुटकारा मिलेगा।
बजट के अभाव में दो साल से काम बंद है। बजट मिलते ही तीन महीने में अस्पताल बनाकर तैयार कर दिया जाएगा। इसका निर्माण पूरा करने के लिए 60 करोड़ रुपये की और आवश्यकता है।
मुकेश सिंघल, परियोजना प्रबंधक - राजकीय निर्माण निगम।
बुंदेलखंड के विकास के लिए सपा सरकार ने यहां विकास की कई परियोजनाएं शुरू की थीं लेकिन, भाजपा सरकार में ज्यादातर योजनाओं से हाथ पीछे खींच लिए गए हैं। इन्हीं में से एक पांच सौ बेड का अस्पताल भी है। प्रदेश सरकार इसका बाकी का निर्माण पूरा कराने के लिए बजट आवंटित नहीं कर रही है। विकास पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। अस्पताल भाजपा या सपा की जरूरत नहीं बल्कि आम आदमी की सुविधा के लिए है। इसका काम पूरा कराया जाना चाहिए। डा. चंद्रपाल सिंह यादव, सपा राज्यसभा सदस्य।
केंद्र और प्रदेश, दोनों सरकारों का बुंदेलखंड के विकास पर पूरा फोकस है। इसी का नतीजा है कि यहां बुंदेलखंड डिफेंस कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। इससे यहां की बेरोजगारी दूर होगी और औद्योगिक माहौल पैदा होगा। मेडिकल कॉलेज में भी हाल ही में सुपर स्पेशियलिटी ब्लाक का निर्माण किया गया है, जो जल्द शुरू होने वाला है। पांच सौ बेड के अस्पताल के लिए शासन से बजट की मांग की गई है। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के चलते ये नहीं मिल पाया, लेकिन अब जल्द ही इसके जारी होने की उम्मीद है। रवि शर्मा, भाजपा विधायक।
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प्रदेश की सत्ता की बागडोर संभालने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव 27 सितंबर 2012 को पहली बार झांसी आए थे। उस दौरान उन्होंने कन्या विद्या धन और बेरोजगारी भत्ता योजना का शुभारंभ किया था। दिन में राजकीय इंटर कालेज में आयोजित इस कार्यक्रम के बाद शाम को अचानक उनका काफिला महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज पहुंच गया था। यहां उन्हें सरकारी चिकित्सा सेवा के बदतर हालात देखने को मिले थे। अस्पताल में पलंगों की कमी की वजह से मरीज जमीन पर लेटे मिले थे। इस स्थिति पर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई थी। साथ ही मेडिकल कालेज में अलग से एक पांच सौ बेड के अस्पताल की घोषणा कर दी थी।
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औपचारिकताएं पूरी होने के बाद 2014 में इसका निर्माण शुरू हुआ था। निर्माण की जिम्मेदारी राजकीय निर्माण निगम को सौंपी गई थी। काम 2017 में पूरा किया जाना था। अस्पताल के निर्माण के लिए शासन की ओर से किस्तों में एक अरब 23 करोड़ रुपये की धनराशि अब तक उपलब्ध कराई गई है। अस्पताल भवन का 73 फीसदी निर्माण पूरा हो चुका है। शेष 27 प्रतिशत काम पूरा करने के लिए 60 करोड़ रुपये की और जरूरत है लेकिन, पिछले दो साल से एक पाई भी नहीं मिल पाई है।
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उल्लेखनीय है कि महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज में केवल झांसी ही नहीं बल्कि आसपास उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के जिलों के मरीज भी आते हैं। इससे यहां मरीजों की खासी भीड़ रहती है। अक्सर जगह के अभाव में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। यहां तक कि उन्हें निजी अस्पतालों में जाना पड़ जाता है। नए पांच सौ बेड के अस्पताल के बनने से मरीजों को इस समस्या से छुटकारा मिलेगा।
बजट के अभाव में दो साल से काम बंद है। बजट मिलते ही तीन महीने में अस्पताल बनाकर तैयार कर दिया जाएगा। इसका निर्माण पूरा करने के लिए 60 करोड़ रुपये की और आवश्यकता है।
मुकेश सिंघल, परियोजना प्रबंधक - राजकीय निर्माण निगम।
बुंदेलखंड के विकास के लिए सपा सरकार ने यहां विकास की कई परियोजनाएं शुरू की थीं लेकिन, भाजपा सरकार में ज्यादातर योजनाओं से हाथ पीछे खींच लिए गए हैं। इन्हीं में से एक पांच सौ बेड का अस्पताल भी है। प्रदेश सरकार इसका बाकी का निर्माण पूरा कराने के लिए बजट आवंटित नहीं कर रही है। विकास पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। अस्पताल भाजपा या सपा की जरूरत नहीं बल्कि आम आदमी की सुविधा के लिए है। इसका काम पूरा कराया जाना चाहिए। डा. चंद्रपाल सिंह यादव, सपा राज्यसभा सदस्य।
केंद्र और प्रदेश, दोनों सरकारों का बुंदेलखंड के विकास पर पूरा फोकस है। इसी का नतीजा है कि यहां बुंदेलखंड डिफेंस कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। इससे यहां की बेरोजगारी दूर होगी और औद्योगिक माहौल पैदा होगा। मेडिकल कॉलेज में भी हाल ही में सुपर स्पेशियलिटी ब्लाक का निर्माण किया गया है, जो जल्द शुरू होने वाला है। पांच सौ बेड के अस्पताल के लिए शासन से बजट की मांग की गई है। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के चलते ये नहीं मिल पाया, लेकिन अब जल्द ही इसके जारी होने की उम्मीद है। रवि शर्मा, भाजपा विधायक।