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Jhansi News: 50 दिन बाद घायल कृतिका ने दर्ज कराया बयान, दोस्त ने गोली मारकर कर दिया था घायल
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पास सिरफिरे युवक की गोली से घायल कृतिका चौबे ने घटना के करीब पचास दिन बाद अपना बयान दर्ज कराया है। पुलिस ने दिल्ली स्थित एम्स में जाकर कृतिका का बयान दर्ज किया। कृतिका ने उस दिन की घटना के बारे में पुलिस को बताया। कृतिका का अभी एम्स में उपचार चल रहा है। कृतिका ने पुलिस को बताया कि 9 नवंबर को वह विश्वविद्यालय कैंपस में थी। दोपहर में उसके साथ ग्यारहवीं में पढ़ने वाले दोस्त मनीष साहू का फोन आया। उसने कहा कि वह कैंपस के बाहर खड़ा है। उसने आखिरी बार मिलने के लिए उसे बुलाया। फोन पर उसने कहा कि अब इसके बाद वह दोबारा उसे परेशान नहीं करेगा। यह सुनकर वह उससे मिलने के लिए राजी हो गई। कैंपस के बाहर आने पर मनीष अकेले उससे मिला। मनीष उसे बस स्टैंड के पास स्थित हवाना रेस्टोरेंट लेकर गया। यहां उन दोनों ने नाश्ता किया। काफी देर तक दोनों उस रेस्टोरेंट में रहे। बातचीत करते रहे। मनीष ऑटो से विश्वविद्यालय तक उसे छोड़ने आया। यहां से जब वह हॉस्टल की ओर जाने लगी तब मनीष उससे बोला कि कृतिका थोड़ा साइड में चलो। तुमको कुछ देना है। विश्वविद्यालय के पास फुटपाथ की पट्टी पर बैठ गया। वह वहां खड़ी थी, तभी मनीष ने अपने पास रखी गन निकाल ली। उसके सीने पर रखकर गन चला दी। इसके बाद उसे कुछ भी याद नहीं। दिन दहाड़े मनीष ने कृतिका को गोली मारने के बाद खुद को गोली से उड़ा लिया था। उसकी मौत हो गई थी जबकि कृतिका गंभीर रूप से घायल हो गई थी। पहले उसका उपचार भोपाल में चल रहा था। इसके बाद उसे एम्स ले जाया गया।
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पास सिरफिरे युवक की गोली से घायल कृतिका चौबे ने घटना के करीब पचास दिन बाद अपना बयान दर्ज कराया है। पुलिस ने दिल्ली स्थित एम्स में जाकर कृतिका का बयान दर्ज किया। कृतिका ने उस दिन की घटना के बारे में पुलिस को बताया। कृतिका का अभी एम्स में उपचार चल रहा है। कृतिका ने पुलिस को बताया कि 9 नवंबर को वह विश्वविद्यालय कैंपस में थी। दोपहर में उसके साथ ग्यारहवीं में पढ़ने वाले दोस्त मनीष साहू का फोन आया। उसने कहा कि वह कैंपस के बाहर खड़ा है। उसने आखिरी बार मिलने के लिए उसे बुलाया। फोन पर उसने कहा कि अब इसके बाद वह दोबारा उसे परेशान नहीं करेगा। यह सुनकर वह उससे मिलने के लिए राजी हो गई। कैंपस के बाहर आने पर मनीष अकेले उससे मिला। मनीष उसे बस स्टैंड के पास स्थित हवाना रेस्टोरेंट लेकर गया। यहां उन दोनों ने नाश्ता किया। काफी देर तक दोनों उस रेस्टोरेंट में रहे। बातचीत करते रहे। मनीष ऑटो से विश्वविद्यालय तक उसे छोड़ने आया। यहां से जब वह हॉस्टल की ओर जाने लगी तब मनीष उससे बोला कि कृतिका थोड़ा साइड में चलो। तुमको कुछ देना है। विश्वविद्यालय के पास फुटपाथ की पट्टी पर बैठ गया। वह वहां खड़ी थी, तभी मनीष ने अपने पास रखी गन निकाल ली। उसके सीने पर रखकर गन चला दी। इसके बाद उसे कुछ भी याद नहीं। दिन दहाड़े मनीष ने कृतिका को गोली मारने के बाद खुद को गोली से उड़ा लिया था। उसकी मौत हो गई थी जबकि कृतिका गंभीर रूप से घायल हो गई थी। पहले उसका उपचार भोपाल में चल रहा था। इसके बाद उसे एम्स ले जाया गया।