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मोबाइल हैल् थ टीम
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एप से पता चलेगा बच्चे को क्या है दिक्कत
झांसी। प्रदेश में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का नया एप लागू हो गया है। बच्चा सेहतमंद है अथवा बीमार, इसकी निगरानी एप के जरिए होगी। बृहस्पतिवार को चिकित्सा, आईसीडीएस, शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया। इसमें बताया कि एप के माध्यम से स्कूल, कालेजों व आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के स्वास्थ्य की सटीक मानीटरिंग होगी।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के अपर निदेशक डा. सुमन बाबू मिश्रा ने कहा कि मोबाइल हेल्थ टीम मौके पर जाए बगैर अब रिपोर्ट नहीं लगा सकती हैं। टीम को बच्चों की फ ोटो के साथ पूरी रिपोर्ट एप पर अपलोड करनी होगी। एप में स्वास्थ्य, शिक्षा, बाल विकास पुष्टाहार विभाग के सभी अधिकारी जुडे़ होंगे। उन्होंने कहा कि इससे कोई भी बच्चा इलाज से वंचित नहीं रह सकेगा।
सिफ्सा के मंडल कार्यक्रम प्रबंधक आनंद चौबे ने बताया कि इसकी शुरूआत झांसी मंडल से की गई थी, जो अब पूरे उत्तर प्रदेश में लागू हो रही है। तकनीकी दिक्कते थी, उन्हें ठीक करके पुन: इस एप को शुरू किया जा रहा है। डीईआईसी मैनेजर राम बाबू ने बताया कि नए एप में 38 प्रकार के रोगों का विवरण है। जनपद के आठ ब्लाकों में कार्यरत दो मोबाइल टीमें जब स्कूलों में बच्चों की सेहत की जांच करेंगी, तो संबंधित बच्चे को क्या दिक्कत है, इसका विवरण एप में दर्ज हो जाएगा। बच्चों को अस्पताल में रेफर किया जाएगा। इनमें से कितने बच्चे अस्पताल पहुंचे, यह भी जांचा जाएगा।
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झांसी। प्रदेश में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का नया एप लागू हो गया है। बच्चा सेहतमंद है अथवा बीमार, इसकी निगरानी एप के जरिए होगी। बृहस्पतिवार को चिकित्सा, आईसीडीएस, शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया। इसमें बताया कि एप के माध्यम से स्कूल, कालेजों व आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के स्वास्थ्य की सटीक मानीटरिंग होगी।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के अपर निदेशक डा. सुमन बाबू मिश्रा ने कहा कि मोबाइल हेल्थ टीम मौके पर जाए बगैर अब रिपोर्ट नहीं लगा सकती हैं। टीम को बच्चों की फ ोटो के साथ पूरी रिपोर्ट एप पर अपलोड करनी होगी। एप में स्वास्थ्य, शिक्षा, बाल विकास पुष्टाहार विभाग के सभी अधिकारी जुडे़ होंगे। उन्होंने कहा कि इससे कोई भी बच्चा इलाज से वंचित नहीं रह सकेगा।
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सिफ्सा के मंडल कार्यक्रम प्रबंधक आनंद चौबे ने बताया कि इसकी शुरूआत झांसी मंडल से की गई थी, जो अब पूरे उत्तर प्रदेश में लागू हो रही है। तकनीकी दिक्कते थी, उन्हें ठीक करके पुन: इस एप को शुरू किया जा रहा है। डीईआईसी मैनेजर राम बाबू ने बताया कि नए एप में 38 प्रकार के रोगों का विवरण है। जनपद के आठ ब्लाकों में कार्यरत दो मोबाइल टीमें जब स्कूलों में बच्चों की सेहत की जांच करेंगी, तो संबंधित बच्चे को क्या दिक्कत है, इसका विवरण एप में दर्ज हो जाएगा। बच्चों को अस्पताल में रेफर किया जाएगा। इनमें से कितने बच्चे अस्पताल पहुंचे, यह भी जांचा जाएगा।
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