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कारोबारियों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं करेंगे
Updated Mon, 03 Jul 2017 09:19 PM IST
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कारोबारियों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं करेंगे
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जिला उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने जिला प्रभारी मंत्री सूर्यप्रताप शाही को एक ज्ञापन देकर जीएसटी की खामियों को दूर करने की मांग की है। कहा कि वह उत्पीड़न किसी भी कीमत में बर्दाश्त नहीं करेंगे।
ज्ञापन में बताया कि एक जुलाई से देश में जीएसटी लागू हो गया है। जिसका वह स्वागत करते हैं, लेकिन जीएसटी में कुछ खामियां रह गई हैं, जिन्हें दूर किया जाना चाहिए। विश्व में 155 देशों में जीएसटी लागू है। इसमें 16 प्रतिशत से ज्यादा टैक्स की प्रणाली नहीं है, लेकिन भारत में 28 प्रतिशत तक टैक्स लगाया गया है, जो उचित नहीं है। इसके पंजीकरण, रिटर्न, धाराएं एवं अन्य कानूनों की जानकारी देने के लिए तहसील स्तर पर सभी व्यापारियों को प्रशिक्षण देने का कार्यक्रम चलाया जाए। इसके कानून की जानकारी देने के लिए सौ पेज की पुस्तिका छपवाकर व्यापारियों में वितरित कराई जाए। मंडी शुल्क को जीएसटी में शामिल नहीं किया गया है। इस कारण किराना और गल्ला व्यापारियों को भारी कठिनाई होगी। जीएसटी में एक ट्रेड कम्युनिटी पर केवल एक दर ही रखने का प्रावधान रखा जाए, इससे व्यापारियों को टैक्स की गणना करने में आसानी होगी। वर्तमान में किराने पर दो दरें पांच व बारह, स्टेशनरी पर तीन दरें पांच, बारह व अट्ठाईस, दवा व्यापार पर चार दरें, जनरल मर्चेंट व्यापार पर चार दरें रखी गई हैं। यह उचित नहीं है। कूलर, पंखे, जीवन की आवश्यक वस्तुएं को 28 प्रतिशत टैक्स की श्रेणी से 18 प्रतिशत श्रेणी में किया जाए। खाद्य पदार्थ चाहे ब्रांडेड हो, उन ब्रांडेड हो सभी को कर मुक्त किया जाए। जीएसटी का रिटर्न तीन माह में एक बार भरने की व्यवस्था की जाए।
ज्ञापन पर जिलाध्यक्ष सुरेश बड़ेरा, जिला संगठन मंत्री शैलेंद्र सिंघई, जिनेंद्र गंगचारी, अजय जैन, प्रदीप खजुरिया, कमलेश सर्राफ, जितेंद्र सोनी, राजेश सिंधी, मगनलाल सोनी आदि के हस्ताक्षर हैं।
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- व्यापार मंडल ने प्रभारी मंत्री को दिए ज्ञापन में चेताया
- सरकार से जीएसटी की खामियां दूर करने की मांग की
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जिला उद्योग व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने जिला प्रभारी मंत्री सूर्यप्रताप शाही को एक ज्ञापन देकर जीएसटी की खामियों को दूर करने की मांग की है। कहा कि वह उत्पीड़न किसी भी कीमत में बर्दाश्त नहीं करेंगे।
ज्ञापन में बताया कि एक जुलाई से देश में जीएसटी लागू हो गया है। जिसका वह स्वागत करते हैं, लेकिन जीएसटी में कुछ खामियां रह गई हैं, जिन्हें दूर किया जाना चाहिए। विश्व में 155 देशों में जीएसटी लागू है। इसमें 16 प्रतिशत से ज्यादा टैक्स की प्रणाली नहीं है, लेकिन भारत में 28 प्रतिशत तक टैक्स लगाया गया है, जो उचित नहीं है। इसके पंजीकरण, रिटर्न, धाराएं एवं अन्य कानूनों की जानकारी देने के लिए तहसील स्तर पर सभी व्यापारियों को प्रशिक्षण देने का कार्यक्रम चलाया जाए। इसके कानून की जानकारी देने के लिए सौ पेज की पुस्तिका छपवाकर व्यापारियों में वितरित कराई जाए। मंडी शुल्क को जीएसटी में शामिल नहीं किया गया है। इस कारण किराना और गल्ला व्यापारियों को भारी कठिनाई होगी। जीएसटी में एक ट्रेड कम्युनिटी पर केवल एक दर ही रखने का प्रावधान रखा जाए, इससे व्यापारियों को टैक्स की गणना करने में आसानी होगी। वर्तमान में किराने पर दो दरें पांच व बारह, स्टेशनरी पर तीन दरें पांच, बारह व अट्ठाईस, दवा व्यापार पर चार दरें, जनरल मर्चेंट व्यापार पर चार दरें रखी गई हैं। यह उचित नहीं है। कूलर, पंखे, जीवन की आवश्यक वस्तुएं को 28 प्रतिशत टैक्स की श्रेणी से 18 प्रतिशत श्रेणी में किया जाए। खाद्य पदार्थ चाहे ब्रांडेड हो, उन ब्रांडेड हो सभी को कर मुक्त किया जाए। जीएसटी का रिटर्न तीन माह में एक बार भरने की व्यवस्था की जाए।
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ज्ञापन पर जिलाध्यक्ष सुरेश बड़ेरा, जिला संगठन मंत्री शैलेंद्र सिंघई, जिनेंद्र गंगचारी, अजय जैन, प्रदीप खजुरिया, कमलेश सर्राफ, जितेंद्र सोनी, राजेश सिंधी, मगनलाल सोनी आदि के हस्ताक्षर हैं।
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- व्यापार मंडल ने प्रभारी मंत्री को दिए ज्ञापन में चेताया
- सरकार से जीएसटी की खामियां दूर करने की मांग की