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स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों के 40 फीसदी पद रिक्त
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झांसी। जन-जन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दिलाने के उद्देश्य से शासन की तरफ से मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला लगाया जा रहा है। मगर स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों के 40 फीसदी से ज्यादा पद खाली पड़े हुए हैं। कुछ केंद्रों पर तो सिर्फ एनेस्थेटिस्ट की ही तैनाती है। ऐसे में कैसे मरीजों को बेहतर इलाज मिले, यह बड़ा सवाल है।
जिले में बड़ागांव, चिरगांव, गुरसराय, बबीना, बंगरा, बामौर, मऊरानीपुर और मोंठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इसके अलावा 13 नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। सभी स्वास्थ्य केंद्रों को मिलाकर डॉक्टरों के 160 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 40 फीसदी से अधिक पद खाली चल रहे हैं। वहीं, कोरोना काल के बाद अब फिर से मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला शुरू हो चुका है। बीते रविवार को जिले के 13 शहरी और 32 ग्रामीण इलाकों सहित 45 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। लोगों की खून की जांच से लेकर दवा भी बांटी गई। इस मेले के समक्ष सबसे बड़ी समस्या डॉक्टरों के रिक्त पद हैं। बताया गया कि कई केंद्रों पर सिर्फ एनेस्थीसिया के चिकित्सक की तैनाती है। ऐसे में वह भला कैसे सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार के मरीजों का उपचार कर सकेंगे। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का नुकसान मरीजों को उठाना पड़ रहा है। उन्हें सामान्य मौसमी बीमारी का इलाज कराने के लिए भी गांव से शहर तक की दौड़ लगानी पड़ रही है।
ये है स्थिति
स्वीकृत पद: 160
कार्यरत: 92
रिक्त: 68
हाल ही मैंने चार्ज संभाला है। जल्द ही चिकित्सकों की स्थिति के संबंध में बैठक कर चर्चा करूंगी। कमी को दूर करने के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा। - डॉ. अल्पना बरतारिया, एडी हेल्थ, झांसी।
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जिले में बड़ागांव, चिरगांव, गुरसराय, बबीना, बंगरा, बामौर, मऊरानीपुर और मोंठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इसके अलावा 13 नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। सभी स्वास्थ्य केंद्रों को मिलाकर डॉक्टरों के 160 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 40 फीसदी से अधिक पद खाली चल रहे हैं। वहीं, कोरोना काल के बाद अब फिर से मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला शुरू हो चुका है। बीते रविवार को जिले के 13 शहरी और 32 ग्रामीण इलाकों सहित 45 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। लोगों की खून की जांच से लेकर दवा भी बांटी गई। इस मेले के समक्ष सबसे बड़ी समस्या डॉक्टरों के रिक्त पद हैं। बताया गया कि कई केंद्रों पर सिर्फ एनेस्थीसिया के चिकित्सक की तैनाती है। ऐसे में वह भला कैसे सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार के मरीजों का उपचार कर सकेंगे। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का नुकसान मरीजों को उठाना पड़ रहा है। उन्हें सामान्य मौसमी बीमारी का इलाज कराने के लिए भी गांव से शहर तक की दौड़ लगानी पड़ रही है।
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ये है स्थिति
स्वीकृत पद: 160
कार्यरत: 92
रिक्त: 68
हाल ही मैंने चार्ज संभाला है। जल्द ही चिकित्सकों की स्थिति के संबंध में बैठक कर चर्चा करूंगी। कमी को दूर करने के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा। - डॉ. अल्पना बरतारिया, एडी हेल्थ, झांसी।
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