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Jhansi News: 37 फीसदी गर्भवती महिलाएं एनीमिया की शिकार

Sat, 12 Jul 2025 12:45 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 12 Jul 2025 12:45 AM IST
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37 percent of pregnant women suffer from anemia
- सात फीसदी महिलाएं हैं एनीमिक
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संवाद न्यज एजेंसी
ललितपुर। जनपद में गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन की कमी दूर नहीं हो पा रही है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 तक 29,987 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। जिसमें 11,917 महिलाएं एनीमिया की शिकार मिलीं। इस प्रकार 37 फीसदी महिलाओं में खून की कमी पाई गई। इनमें सात फीसदी महिलाएं अधिक गंभीर मिलीं। चिकित्सक गर्भावस्था में नियमित रूप से जांच कराएं, हरी सब्जी व दवाइयाें का सेवन करने की सलाह दे रहे हैं।
शासन द्वारा गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन की कमी दूर करने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें गर्भावस्था में प्रतिमाह जांचें की जा रही हैं। साथ ही चिकित्सीय परामर्श पर दवाइयां उपलब्ध की गई हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार भी वितरण किया जा रहा है। लेकिन खून की कमी दूर नहीं हो पा रही है।
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एनीमिया दूर करने के लिए है ये व्यवस्था
मेडिकल कॉलेज, सीएचसी, पीएचसी और उप स्वास्थ्य केंद्र समेत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर गर्भवती महिलाओं की जांच की जाती है। साथ ही प्रत्येक सीएचसी व मेडिकल कॉलेज में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान चलाया जाता है, जो प्रत्येक माह की एक, नौ, 16 व 24 तारीख को लगता है। इसमें गर्भवती महिलाओं की जरूरी जांच होती है। साथ ही टीकाकरण व दवाइयां उपलब्ध कराईं जाती हैं। साथ ही खान-पान के लिए जागरूक किया जाता है।
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यह हैं एनीमिया के कारण
- जल्दी-जल्द बच्चे पैदा करना।
- पर्याप्त दवा व आहार न लेना
- लंबे समय तक बीमार रहना।
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गर्भावस्था में एनीमिया पर नुकसान
- गर्भ में बच्चे का ठीक से विकास न होना।
- समय से पूर्व प्रसव होने पर शिशु की मृत्यु का खतरा।
- प्रसव के बाद अधिक रक्तस्राव होने से जच्चा को खतरा।
- गर्भपात होने का खतरा।

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इस तरह करें बचाव
- विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह लें।
- नियमित उपचार कराएं।
- आयरन समेत सभी दवाइयों का सेवन करें।
- पर्याप्त मात्रा में आयरन वाली सब्जी व पालक का सेवन करें।
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सामान्य व्यक्ति में होता है 11.5 हीमोग्लोबिन
चिकित्सकों का कहना है कि सामान्य महिला में 11.5 से 15 ग्राम प्रति डेसीलीटर खून होता है। लेकिन, वर्तमान में लगातार रक्त की कमी के चलते अब 10 ग्राम डेसीलीटर को भी सामान्य माना जाता है। 10 से कम होने पर खून की कमी मानी जाती है। कई महिलाओं में सात से कम डेसीलीटर खून होता है। ऐसे में इन महिलाओं को अधिक गंभीर माना जाता है।

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महिलाओं को स्वस्थ रखने व खून की कमी पूरा करने के लिए गर्भावस्था में नियमित जांच कराई जाती है। साथ ही दवाइयां व संतुलित आहार सेवन करने की सलाह दी जा रही है। - डॉ. इम्तियाज अहमद, सीएमओ
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