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जिले में एक महीने में फुंक गए 362 ट्रांसफार्मर
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जिले में एक महीने में फुंक गए 362 ट्रांसफार्मर
झांसी। जुलाई में बिजली विभाग के 362 ट्रांसफार्मर फुंक गए। एक तो सिंचाई के लिए किसानों ने बिजली मोटर का भरपूर इस्तेमाल किया और दूसरे गर्मी व उमस के कारण लोगों के घरों में भी बिजली की खपत अधिक हो रही थी। अब बारिश से राहत है, क्योंकि सिंचाई बंद हो गई है और घरों में भी बिजली की खपत घट गई है।
जुलाई में बहुत कम बरसात हुई। महीने के अंत में ही बदरा बरसे थे। किसानों को फसल की बुवाई समय पर करना पड़ती है, भले ही पानी बरसे या नहीं। यदि पानी नहीं बरसता है तो किसान सिंचाई करके खेतों में नमी लाते हैं और बुवाई कर देते हैं। खरीफ फसल की बुवाई जुलाई में शुरू हो जाती है। लेकिन, इस बार पानी नहीं बरसने के कारण जिन किसानों के पास सिंचाई के साधन थे, उन्होंने बिजली की मोटर चलाकर सिंचाई की। इसमें वह किसान अधिक रहे, जिन्होंने खेतों में धान की रोपाई की थी। धान ऐसी फसल है जो कि पानी में रहती है, यदि पानी न मिले तो फसल सूखने का खतरा रहता है। इसके अलावा पानी नहीं बरसने के कारण घरों में बिजली की मांग थी। कूलर और पंखे चल रहे थे।
इसका असर ट्रांसफार्मरों पर पड़ा और जुलाई में 362 ट्रांसफार्मर फुंक गए। जबकि, जून में 240 ट्रांसफार्मर ही फुंके थे। धान की खेती के अलावा पारीछा नहर के पानी में किसानों ने मोटर लगाकर सिंचाई की। इससे भी ट्रांसफार्मर पर लोड बढ़ा। लेकिन, अगस्त की शुरूआत से लगातार हो रही बारिश से अब सिंचाई के सभी साधन बंद हैं और घरों में बिजली की खपत कम हो गई है। इससे बिजली विभाग को राहत है।
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धान की खेती में पानी की जरूरत पड़ती है। जुलाई में बारिश नहीं होने के कारण बिजली की डिमांड बढ़ने से किसानों ने सिंचाई की और खेतों में पानी भरा। इस कारण ट्रांसफार्मर ओवरलोड हो गए और 362 ट्रांसफार्मर फुंक गए। अब ऐसी कोई दिक्कत नहीं है।
- योगेश त्रिपाठी, अधिशासी अभियंता
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झांसी। जुलाई में बिजली विभाग के 362 ट्रांसफार्मर फुंक गए। एक तो सिंचाई के लिए किसानों ने बिजली मोटर का भरपूर इस्तेमाल किया और दूसरे गर्मी व उमस के कारण लोगों के घरों में भी बिजली की खपत अधिक हो रही थी। अब बारिश से राहत है, क्योंकि सिंचाई बंद हो गई है और घरों में भी बिजली की खपत घट गई है।
जुलाई में बहुत कम बरसात हुई। महीने के अंत में ही बदरा बरसे थे। किसानों को फसल की बुवाई समय पर करना पड़ती है, भले ही पानी बरसे या नहीं। यदि पानी नहीं बरसता है तो किसान सिंचाई करके खेतों में नमी लाते हैं और बुवाई कर देते हैं। खरीफ फसल की बुवाई जुलाई में शुरू हो जाती है। लेकिन, इस बार पानी नहीं बरसने के कारण जिन किसानों के पास सिंचाई के साधन थे, उन्होंने बिजली की मोटर चलाकर सिंचाई की। इसमें वह किसान अधिक रहे, जिन्होंने खेतों में धान की रोपाई की थी। धान ऐसी फसल है जो कि पानी में रहती है, यदि पानी न मिले तो फसल सूखने का खतरा रहता है। इसके अलावा पानी नहीं बरसने के कारण घरों में बिजली की मांग थी। कूलर और पंखे चल रहे थे।
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इसका असर ट्रांसफार्मरों पर पड़ा और जुलाई में 362 ट्रांसफार्मर फुंक गए। जबकि, जून में 240 ट्रांसफार्मर ही फुंके थे। धान की खेती के अलावा पारीछा नहर के पानी में किसानों ने मोटर लगाकर सिंचाई की। इससे भी ट्रांसफार्मर पर लोड बढ़ा। लेकिन, अगस्त की शुरूआत से लगातार हो रही बारिश से अब सिंचाई के सभी साधन बंद हैं और घरों में बिजली की खपत कम हो गई है। इससे बिजली विभाग को राहत है।
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धान की खेती में पानी की जरूरत पड़ती है। जुलाई में बारिश नहीं होने के कारण बिजली की डिमांड बढ़ने से किसानों ने सिंचाई की और खेतों में पानी भरा। इस कारण ट्रांसफार्मर ओवरलोड हो गए और 362 ट्रांसफार्मर फुंक गए। अब ऐसी कोई दिक्कत नहीं है।
- योगेश त्रिपाठी, अधिशासी अभियंता