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Jhansi News: 350 मलखंभ खिलाड़ियों ने बनाया विश्व रिकॉर्ड
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान के तत्वावधान में किले की तलहटी में स्थित राजा गंगाधर राव कला मंच पर मलखंभ का प्रदर्शन किया। पहली बार एक मंच पर 350 खिलाड़ियों ने प्रतिभाग कर हैरतअंगेज प्रदर्शन कर मलखंभ का विश्व रिकॉर्ड कायम किया। वर्ल्ड रिकॉर्ड बुक ऑफ इंडिया की चीफ एडिटर सुषमा नारवेकर ने खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया।
मलखंभ के प्रदर्शन में ललितपुर, मथुरा, आगरा, गोरखपुर, छतरपुर सहित प्रदेश के कई जिले के प्रतिभागियों ने प्रतिभाग कर रोम मलखंभ और पोल मल्लखंभ पर खिलाड़ियों ने कई हैरतअंगेज करतब दिखाकर आयोजकों और दर्शकों को आश्चर्यचकित कर दिया। विश्व कीर्तिमान बनाने पर खिलाड़ियों को मेडल और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।
एमेच्योर मलखंभ एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव कुमार सरावगी ने बताया कि मलखंभ प्राचीन खेल है। यह गदा युद्ध और मल युद्ध के नाम से भी जाना जाता है। 12वीं शताब्दी में पेशवा बाजीराव द्वितीय के समय में अफगान के दो पहलवान गुलाम और अली नासिक पहुंचे वहां पर उन्होेंने बलम भट्ट दादा देवधर के सभी पहलवानों को युद्ध की चुनौती दी।
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दादा ने चुनौती को स्वीकार करते हुए उनसे समय मांगा और छह माह बाद मलखंभ का अभ्यास कर दोनों अफगानी पहलवानों को ललकारते हुए चित कर दिया। उत्तर प्रदेश के वाराणसी, कानपुरा के बाद झांसी एवं अन्य जिलों में मल्लखंभ खेल की शुरुआत हुई।
मुख्य अतिथि महापौर बिहारी लाल आर्य, विशिष्ट अतिथि शिक्षक विधायक डॉ. बाबू लाल तिवारी, पूर्व शिक्षा मंत्री रविंद्र शुक्ल, विधान परिषद सदस्य रामतीर्थ सिंघल, राज्य मंत्री हरगोविंद कुशवाहा, प्रदीप सरावगी, नरेश चंद्र अग्रवाल, मलखंभ फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनपाल सिंह आदि मौजूद रहे। उत्तर प्रदेश लोक एंव जनजाति संस्कृति संस्थान के निदेशक अतुल द्विवेदी ने आभार व्यक्त किया।ा
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मलखंभ के प्रदर्शन में ललितपुर, मथुरा, आगरा, गोरखपुर, छतरपुर सहित प्रदेश के कई जिले के प्रतिभागियों ने प्रतिभाग कर रोम मलखंभ और पोल मल्लखंभ पर खिलाड़ियों ने कई हैरतअंगेज करतब दिखाकर आयोजकों और दर्शकों को आश्चर्यचकित कर दिया। विश्व कीर्तिमान बनाने पर खिलाड़ियों को मेडल और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।
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एमेच्योर मलखंभ एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव कुमार सरावगी ने बताया कि मलखंभ प्राचीन खेल है। यह गदा युद्ध और मल युद्ध के नाम से भी जाना जाता है। 12वीं शताब्दी में पेशवा बाजीराव द्वितीय के समय में अफगान के दो पहलवान गुलाम और अली नासिक पहुंचे वहां पर उन्होेंने बलम भट्ट दादा देवधर के सभी पहलवानों को युद्ध की चुनौती दी।
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दादा ने चुनौती को स्वीकार करते हुए उनसे समय मांगा और छह माह बाद मलखंभ का अभ्यास कर दोनों अफगानी पहलवानों को ललकारते हुए चित कर दिया। उत्तर प्रदेश के वाराणसी, कानपुरा के बाद झांसी एवं अन्य जिलों में मल्लखंभ खेल की शुरुआत हुई।
मुख्य अतिथि महापौर बिहारी लाल आर्य, विशिष्ट अतिथि शिक्षक विधायक डॉ. बाबू लाल तिवारी, पूर्व शिक्षा मंत्री रविंद्र शुक्ल, विधान परिषद सदस्य रामतीर्थ सिंघल, राज्य मंत्री हरगोविंद कुशवाहा, प्रदीप सरावगी, नरेश चंद्र अग्रवाल, मलखंभ फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनपाल सिंह आदि मौजूद रहे। उत्तर प्रदेश लोक एंव जनजाति संस्कृति संस्थान के निदेशक अतुल द्विवेदी ने आभार व्यक्त किया।ा