लॉकडाउन के कारण पंजाब व अन्य स्थानों से चूजे न आने के कारण मुर्गी फार्मों पर गिनती के मुर्गे बचे हैं। इस कारण पिछले डेढ़ महीने में मुर्गा का भाव बढ़कर तीन सौ रुपये हो गया है। हालांकि, लॉकडाउन के चलते जिला प्रशासन ने मांस की दुकानों को बंद कर रखा है। मांस गुपचुप तरीके से बिक रहा है। लॉकडाउन में मांस की बिक्री पर रोक चल रही है। पिछले तीन महीने में मुर्गा कारोबार ठप पड़ गया है। शुरूआत में कोरोना महामारी के चलते मुर्गा 30 रुपये किलो तक बिकने लगा था। दाने की कमी के कारण हजारों की संख्या में मुर्गे मर गए। मगर, जो कारोबारी अपने मुर्गों को जिंदा बचाए रहे, उनको अब अच्छे दाम मिल रहे हैं। चूजे न आने के कारण गिने चुने मुर्गे बचे हैं। इस कारण मुर्गे का एक किलो मांस तीन सौ रुपये में बिकने लगा है। शौकीनों की यह जरूरत कई दुकानदार पूरी कर रहे हैं। शहर के कई दुकानदार व मांस काटने वाले अपने घर से इसकी बिक्री कर रहे हैं। ये लोग एक दिन पहले मोबाइल पर ऑर्डर ले लेते हैं। अगली सुबह ही जानवर काटने के बाद ऑर्डर के हिसाब से पैकिंग कर दी जाती है। इसके बाद लोग गुपचुप तरीके से ही मांस लेकर चले जाते हैं। या उनके घर तक पहुंचा देते हैं। इतना ही नहीं बकरे के मांस के दाम भी छह सौ रुपये से बढ़ाकर सात सौ रुपये तक कर दिए हैं। शहर क्षेत्र में दस, पुलिया नंबर नौ में दो, सीपरी बाजार में तीन, नंदनपुरा में दो, बस स्टैंड पर दो व आसपास के गांवों में छह लोग बकरे का मांस बेच रहे हैं। इधर, सिमरधा, सुकुवां- ढुकुवां, बिजौली, पारीछा बांध व नहर के आसपास वाले क्षेत्रों में दोपहर बाद मछली मिलने लगती है। मछली तीन सौ से चार सौ रुपये तक बेची जा रही है। बाजार लग जाता है। लोग दूर- दूर से मछली खरीदने पहुंच रहे हैं। पुलिस को भी इस बात की भनक है, लेकिन कोई दखल नहीं दे रहा है।