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मंडियों में काम नहीं करने वाली तीस फार्मों को नोटिस
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झांसी। बुंदेलखंड पैकेज से बनी गल्ला मंडियों के ताले में बंद होने को लेकर प्रशासन सख्त हो गया है। जिला प्रशासन ने ऐसी तीस फर्मों को नोटिस जारी किया है, जिन्होंने आवंटन के बाद आज तक काम शुरू नहीं किया है। मंडियों बंद होने के कारण करोड़ों रुपये खर्च करके तैयार हुई मंडियों का फायदा किसानों को नहीं मिल पा रहा था। मंडियां आरंभ करने को नए सिरे से आवंटन की तैयारी शुरू हुई है।
किसानों को उपज बेचने के लिए सही स्थान उपलब्ध हो सके, इसके लिए 2009 में बुंदेलखंड पैकेज से छह ग्रामीण अवस्थापना केंद्र (रिन) एवं तीन एग्रीकल्चर मार्केटिंग हब तैयार किए गए थे। इन पर करीब 65 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, लेकिन, भोजला मंडी को छोड़कर बाकी मंडियों में कामकाज ही शुरू नहीं हुआ, जबकि कई एग्रो फर्मों को न्यूनतम दरों में जगह आवंटित कर दी गई। लेकिन, फर्मों ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। लिहाजा, मंडियां कचराघर में तब्दील हो गईं। अमर उजाला ने 30 जनवरी के अंक में इन मंडियों की दुर्दशा के बारे में विस्तार से समाचार प्रकाशित किया।
इस पर जिलाधिकारी आंद्रा वामसी सक्रिय हो गए और उन्होंने मंडी समिति के अधिकारियों को तुरंत दशा सुधारने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके बाद मंडी समिति ने ऐसी तीस फर्म चिह्नित कीं, जिन्होंने आवंटन के बाद काम शुरू नहीं किया। जबकि, इनको मंडी का अधिकांश हिस्सा आवंटित था। इनके काम नहीं करने से मंडी नहीं चल पा रही हैं। अब मंडी समिति ने इनको नोटिस जारी किया, इनमें अंबाबाय मंडी में अशोक इंटरप्राइजेज, वैभव ट्रेडर्स, दिव्यांश ट्रेडर्स, पवन एंड ब्रदर्स, गढ़मऊ मंडी में राजेंद्र कुमार एंड कंपनी, महावीर शरण, रामराजा ट्रेडर्स, भार्गव ट्रेडर्स, बछौनी मंडी में शिवानी, केके इंटरप्राइजेज, राजा गुर्जर, जय हीरामन, पुनावली मंडी के आराध्या, आकांक्षा, अमरया, आशी एजेंसी, दिगारा मंडी में संत एंड कंपनी, निहाल टेडर्स, मेजर टेडर्स, राहुल ट्रेडिंग व मानपुर मंडी में ज्योति, अग्रवाल एजेंसी, राजेंद्र कुमार, कनक इंटरप्राइजेज शामिल हैं।। इसी तरह मार्केटिंग हब बबीना में इदरीश खान, सुनील गुप्ता, राजापुर में अंकित, नरेंद्र कुमार, जितेंद्र एवं बेदौरा में कमलेश कुमार साहू शामिल हैं।
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मंडियां जल्द आरंभ होंगी। इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इनके जरिए किसानों को फायदा पहुंचे, इसकी कोशिश की जा रही है। नए वित्तीय वर्ष की शुरूआत से इनके आरंभ हो जाने की पूरी उम्मीद है।
- आंद्रा वामसी, जिलाधिकारी
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किसानों को उपज बेचने के लिए सही स्थान उपलब्ध हो सके, इसके लिए 2009 में बुंदेलखंड पैकेज से छह ग्रामीण अवस्थापना केंद्र (रिन) एवं तीन एग्रीकल्चर मार्केटिंग हब तैयार किए गए थे। इन पर करीब 65 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, लेकिन, भोजला मंडी को छोड़कर बाकी मंडियों में कामकाज ही शुरू नहीं हुआ, जबकि कई एग्रो फर्मों को न्यूनतम दरों में जगह आवंटित कर दी गई। लेकिन, फर्मों ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। लिहाजा, मंडियां कचराघर में तब्दील हो गईं। अमर उजाला ने 30 जनवरी के अंक में इन मंडियों की दुर्दशा के बारे में विस्तार से समाचार प्रकाशित किया।
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इस पर जिलाधिकारी आंद्रा वामसी सक्रिय हो गए और उन्होंने मंडी समिति के अधिकारियों को तुरंत दशा सुधारने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके बाद मंडी समिति ने ऐसी तीस फर्म चिह्नित कीं, जिन्होंने आवंटन के बाद काम शुरू नहीं किया। जबकि, इनको मंडी का अधिकांश हिस्सा आवंटित था। इनके काम नहीं करने से मंडी नहीं चल पा रही हैं। अब मंडी समिति ने इनको नोटिस जारी किया, इनमें अंबाबाय मंडी में अशोक इंटरप्राइजेज, वैभव ट्रेडर्स, दिव्यांश ट्रेडर्स, पवन एंड ब्रदर्स, गढ़मऊ मंडी में राजेंद्र कुमार एंड कंपनी, महावीर शरण, रामराजा ट्रेडर्स, भार्गव ट्रेडर्स, बछौनी मंडी में शिवानी, केके इंटरप्राइजेज, राजा गुर्जर, जय हीरामन, पुनावली मंडी के आराध्या, आकांक्षा, अमरया, आशी एजेंसी, दिगारा मंडी में संत एंड कंपनी, निहाल टेडर्स, मेजर टेडर्स, राहुल ट्रेडिंग व मानपुर मंडी में ज्योति, अग्रवाल एजेंसी, राजेंद्र कुमार, कनक इंटरप्राइजेज शामिल हैं।। इसी तरह मार्केटिंग हब बबीना में इदरीश खान, सुनील गुप्ता, राजापुर में अंकित, नरेंद्र कुमार, जितेंद्र एवं बेदौरा में कमलेश कुमार साहू शामिल हैं।
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मंडियां जल्द आरंभ होंगी। इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इनके जरिए किसानों को फायदा पहुंचे, इसकी कोशिश की जा रही है। नए वित्तीय वर्ष की शुरूआत से इनके आरंभ हो जाने की पूरी उम्मीद है।
- आंद्रा वामसी, जिलाधिकारी