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कोटा से झांसी लाए गए 2500 छात्र-छात्राएं

Sun, 19 Apr 2020 12:54 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 19 Apr 2020 12:54 AM IST
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2500 student retun from kota
2500 student retun from kota
झांसी। राजस्थान के कोटा में सिविल सर्विसेज, इंजीनियरिंग, मेडिकल आदि की कोचिंग कर रहे ढाई हजार छात्र-छात्राओं को शनिवार को झांसी डिपो की 105 रोडवेज बसें लेकर आईं। इनमें अधिकतर विद्यार्थी कानपुर, प्रयागराज और चित्रकूट मंडल के हैं। जबकि, झांसी मंडल के 200 छात्र-छात्राएं हैं। झांसी के छात्रों, बस ड्राइवर व कंडेक्टर को पैरामेडिकल कॉलेज समेत तीन स्थानों पर क्वारंटीन किया गया है। बाकी छात्र-छात्राओं को उनके घरों पर भेजने की व्यवस्था की गई। यह सभी लॉकडाउन होने की वजह से अपने घर नहीं लौटा पा रहे थे।
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कोटा को देश कह्य मुख्य कोचिंग हब के तौर पर जाना जाता है। देश भर से लाखों छात्र-छात्राएं आईएएस, आईपीएस, पीसीएस, डॉक्टर, इंजीनियर आदि बनने का सपना सजोकर कोटा कोचिंग करने के लिए जाते हैं। कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन होने के कारण यातायात सेवाएं बंद हो जाने के कारण छात्र-छात्राएं कोटा में ही फंसकर रह गए थे। इन छात्र-छात्राओं ने अपने घर लौटने के लिए सोशल मीडिया पर मुहिम छेड़ रखी थी। प्रदेश सरकार तक इसकी जानकारी पहुंची तो विद्यार्थियों को लाने के लिए यूपी परिवहन निगम की बसें लगा दी गईं। झांसी डिपो की 105 बसें शनिवार को ढाई हजार छात्र-छात्राओं को लेकर लौटीं। इनमें झांसी मंडल के 200 विद्यार्थी शामिल हैं। इसके अलावा प्रयागराज, कानपुर, चित्रकूट मंडल के सर्वाधिक छात्र हैं। पूर्वांचल के भी विद्यार्थी लौटे हैं। झांसी लौटे विद्यार्थियों को पैरामेडिकल कॉलेज, बीआईईटी और एसआर कॉलेज में क्वारंटीन किया गया है। इससे पहले कोटा से चलने और झांसी में उतरने के दौरान सभी की स्क्रीनिंग की गई। वहीं अन्य छात्रों को उनके गृह जनपद भेजा गया।
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छात्र बोले
कोटा में रहने वाले सभी बाहरी छात्र लॉकडाउन में घर लौटने को बेताब थे। इसलिए छात्रों ने घर वापसी के लिए सोशल मीडिया पर मुहिम छेड़ी थी। इसका प्रदेश सरकार ने संज्ञान लिया और हमारे लिए रोडवेज की बस भेजीं। - प्रशांत कुशवाहा, उल्दन।
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लॉकडाउन की वजह से कोटा में फंसकर रह गए थे। लगातार कोशिश कर रहे थे कि कैसे भी अपने घर लौट आएं। यह भी पता नहीं था कि कब घर लौट पाएंगे। अब अपने शहर आ गए हैं तो सुकून मिल गया है। - अंकित पटेल, महाराणा प्रताप नगर।
एक साल से कोटा में ही हूं। पहले तो तीन-चार दिनों में घरवालों से बात होती थी लेकिन लॉकडाउन होने से परिजन भी घबरा गए थे। वो रोज फोन करके हालचाल पूछते थे। दुकानें बंद होने से खाने-पीने की भी परेशानी हो गई थी। - माधव, चिरगांव।

आईआईटी की तैयारी करने के लिए इसी साल कोटा में कोचिंग ज्वाइन की थी। लॉकडाउन होने के बाद हॉस्टल के कमरे में बंद होकर रह गया था। घर की बहुत याद आ रही थी। घर लौटने पर अब राहत महसूस हो रही है। - यश वर्मा, खातीबाबा।
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