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Jhansi News: जल संचयन परियोजना से 25 गांवों को मिलेगा लाभ
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। मुख्य विकास अधिकारी रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड ने ग्राम नागर में जल संचयन परियोजना का भ्रमण किया। यह परियोजना आईसीआरआईएसएटी और उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से संचालित है। इसका उद्देश्य कृषि आजीविका को मजबूत करना और भूजल स्तर में सुधार लाना है।
यह परियोजना बामौर और गुरसराय विकासखंड के 25 गांवों में 13,872 हेक्टेयर क्षेत्र में चल रही है। इसका लक्ष्य भूमि व जल संसाधनों का संरक्षण कर कृषि उत्पादन बढ़ाना है। साथ ही, भूजल स्तर में सुधार लाना और जलवायु सहिष्णु कृषि को बढ़ावा देना भी शामिल है। इस दौरान सीडीओ ने नागर गांव में पुनर्जीवित हवेली प्रणाली का निरीक्षण किया। उन्होंने नालों के गहरीकरण, चौड़ीकरण और खेतों पर मेड़बंदी कार्यों को भी देखा।
इस दौरान किसानों ने बताया कि परियोजना से गांवों में जल उपलब्धता बेहतर हुई है। इससे कृषि कार्यों को सीधा लाभ मिल रहा है। परियोजना के तहत मोटे अनाज, दलहन और तिलहन की उन्नत किस्मों को बढ़ावा दिया जा रहा है। सीडीओ ने निर्देश दिए कि ऐसे भूमि और जल संरक्षण कार्यों को जिले के अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जाए।
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आईसीआरआईएसएटी की ओर से आरके उत्तम, अशोक शुक्ला, शुवेन्द्र कुमार, अभियंता दीपक त्रिपाठी, सुनील कुमार निरंजन और शैलेंद्र सोनी ने कार्यों की जानकारी दी।
इस मौके पर ग्राम प्रधान अनुज द्विवेदी, सचिव देवेंद्र कुमार, तकनीक सहायक महेंद्र नामदेव, हर्ष कुमार द्विवेदी, महेंद्र कुमार, कैलाश पाल, राजू शर्मा, हरि आर्य उपस्थित रहे।
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झांसी। मुख्य विकास अधिकारी रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड ने ग्राम नागर में जल संचयन परियोजना का भ्रमण किया। यह परियोजना आईसीआरआईएसएटी और उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से संचालित है। इसका उद्देश्य कृषि आजीविका को मजबूत करना और भूजल स्तर में सुधार लाना है।
यह परियोजना बामौर और गुरसराय विकासखंड के 25 गांवों में 13,872 हेक्टेयर क्षेत्र में चल रही है। इसका लक्ष्य भूमि व जल संसाधनों का संरक्षण कर कृषि उत्पादन बढ़ाना है। साथ ही, भूजल स्तर में सुधार लाना और जलवायु सहिष्णु कृषि को बढ़ावा देना भी शामिल है। इस दौरान सीडीओ ने नागर गांव में पुनर्जीवित हवेली प्रणाली का निरीक्षण किया। उन्होंने नालों के गहरीकरण, चौड़ीकरण और खेतों पर मेड़बंदी कार्यों को भी देखा।
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इस दौरान किसानों ने बताया कि परियोजना से गांवों में जल उपलब्धता बेहतर हुई है। इससे कृषि कार्यों को सीधा लाभ मिल रहा है। परियोजना के तहत मोटे अनाज, दलहन और तिलहन की उन्नत किस्मों को बढ़ावा दिया जा रहा है। सीडीओ ने निर्देश दिए कि ऐसे भूमि और जल संरक्षण कार्यों को जिले के अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जाए।
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आईसीआरआईएसएटी की ओर से आरके उत्तम, अशोक शुक्ला, शुवेन्द्र कुमार, अभियंता दीपक त्रिपाठी, सुनील कुमार निरंजन और शैलेंद्र सोनी ने कार्यों की जानकारी दी।
इस मौके पर ग्राम प्रधान अनुज द्विवेदी, सचिव देवेंद्र कुमार, तकनीक सहायक महेंद्र नामदेव, हर्ष कुमार द्विवेदी, महेंद्र कुमार, कैलाश पाल, राजू शर्मा, हरि आर्य उपस्थित रहे।