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रोजाना खुले में फेंका जा रहा 225 मीट्रिक टन कूड़ा

Sat, 12 Dec 2020 01:26 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 12 Dec 2020 01:26 AM IST
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225 mitric tan garbage throw
झांसी। देश भर के शहरों के बीच स्वच्छता सर्वेक्षण-21 की दौड़ आरंभ हो चुकी है। लेकिन जिस वजह से पिछली बार झांसी को दौड़ में पीछे रह जाना पड़ा, उसका इंतजाम कर पाने में अब तक निगम प्रशासन फिसड्डी रहा। पिछले सर्वेक्षण में वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट न होने का खामियाजा झांसी को उठाना पड़ा था। अभी भी इस वजह से करीब 225 मीट्रिक टन कूड़ा रोजाना खुले में ही फेंका जा रहा।
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स्वच्छता सर्वेक्षण में रैंकिंग सुधारने को निगम प्रशासन इन दिनों स्लोगन, नारे, वॉल राइटिंग आदि में उलझा हुआ है लेकिन, स्वच्छता के अहम सवाल पर अफसरों की चिंताएं नदारद हैं। पिछले सर्वेक्षण के दौरान झांसी 27वें नंबर पर रही। सबसे अधिक नुकसान यहां कचरा निस्तारण के लिए प्लांट न होने से हुआ था। इसके लिए 1500 अंक तय किए थे।
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खुले में कूड़ा निस्तारित करने पर एनजीटी भी एतराज जताता रहा है लेकिन, इसके बावजूद अफसर इसको लेकर गंभीरता नहीं दिखा रहे। कुछ वर्ष पहले प्रोसेसिंग प्लांट काम कर रहा था लेकिन, अग्निकांड में नष्ट होने के बाद इसे भी दुबारा काम लायक नहीं बनाया जा सका। मेडिकल वेस्ट नष्ट करने के भी यहां पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। इसे भी असुरक्षित तरीके से ही नष्ट किया जा रहा। नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक यहां रोजाना करीब 250 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है, जिसमें कुछ प्लास्टिक वेस्ट ही रिसाइकिल किया जा रहा।
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गीला-सूखा कूड़ा भी नहीं हो रहा अलग
स्वच्छता सर्वेक्षण के मानकों के मुताबिक गीला-सूखा कूड़ा अलग-अलग एकत्रित किया जाना चाहिए लेकिन, इसमें भी जमकर लापरवाही बरती जा रही है। सभी साठ वार्डों में कहीं भी इसके लिए पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए जबकि निगम को इसके लिए अलग-अलग कंटेनर स्थापित करने थे। घरों से भी इस तरह का कूड़ा अलग-अलग नहीं लिया जा रहा। इसका खामियाजा भी सर्वेक्षण के दौरान उठाना पड़ सकता है।

प्रोसेसिंग प्लांट के न होने का खामियाजा जरूर पिछली बार उठाना पड़ा था लेकिन, नए प्लांट के लिए कोशिश की जा रही है। इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। कोविड-19 के प्रकोप के चलते इसे बनाने में विलंब हुआ लेकिन, अगले वित्तीय वर्ष में इसे आरंभ कराने की कोशिश की जाएगी।
रामतीर्थ सिंघल, महापौर
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