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झांसी में भी मकर संक्रांति की धूम, दतिया के बालाजी सूर्य मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

Tue, 15 Jan 2019 03:34 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी Published by: Priyesh Mishra Updated Tue, 15 Jan 2019 03:34 AM IST
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उन्नाव बालाजी-City
मकर संक्रांति
सूर्य की आराधना का पर्व मकर संक्रांति मंगलवार को मनाया जा jरहा है। इस अवसर पर उनाव स्थित बालाजी सूर्य मंदिर में श्रद्धालुओं की खासी भीड़ उमड़ी। इसके लिए प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली हैं। साथ ही गोताखोर तैनात किए गए हैं।
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मकर संक्रांति पर्व पर जलाशयों में स्नान कर भगवान सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। यही वजह है कि इस पर्व पर झांसी से 15 किलोमीटर दूर दतिया जिले के उनाव में स्थित बालाजी सूर्य मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। परंपरानुसार लोग नदी में स्नान कर गीले बदन भगवान सूर्य को जल अर्पित करने मंदिर जाते हैं। हालांकि, यह क्रम यहां वर्ष भर प्रत्येक रविवार को जारी रहता है, लेकिन मकर संक्रांति पर आसपास के जिलों से भी लोग यहां पहुंचते हैं।
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भीड़ के मद्देनजर यहां प्रशासन की ओर से खासी व्यवस्थाएं की गईं हैं। नदी में गोताखोरों की टीम तैनात कर दी गई है। लोग डुबकी लगाने के लिए नदी के गहरे पानी में न उतरें, इसके लिए नदी में तार फेंसिंग कर दी गई है। आवागमन की व्यवस्था दुरुस्त रखने और सुरक्षा की दृष्टि से मंदिर मार्ग पर जगह-जगह पुलिस की तैनाती की गई है। वाहनों को मंदिर मार्ग से पहले ही रोकने की व्यवस्था की गई है, ताकि जाम की स्थिति न बने।
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प्राचीन है मंदिर का इतिहास
उनाव में मंदिर की स्थापना सोलहवीं शताब्दी में हुई थी। तब एक चबूतरे पर सूर्य यंत्र स्थापित किया गया था। बाद में झांसी के राजा नारायण राव (नारूशंकर) ने इसे मंदिर का रूप दिया। दतिया के राजा नरेश रावराजा ने सन् 1736 से 1762 के बीच मंदिर को भव्य रूप दिया। दतिया स्टेट गजेटियर के अनुसार 1854 में सिंधिया के मंत्री मामा साहब जाधव ने मंदिर का और विस्तार कराया। मंदिर के गर्भ गृह के ठीक सामने से पहूज (पुष्पावती) नदी निकली हुई है। ऐसी मान्यता है कि रविवार के दिन नदी में स्नान के बाद मंदिर में सूर्य यंत्र पर जल अर्पित करने से चर्म रोगों से छुटकारा मिलता है।


सोमवार को भी ली गई डुबकी
मकर संक्रांति पर्व भले ही पिछले दो सालों से 15 जनवरी को मनाया जा रहा है, लेकिन इससे पहले कई दशकों तक 14 जनवरी को मनाया जाता रहा। यही वजह है कि तमाम लोगों ने सोमवार को ये पर्व मनाया। उनाव में सुबह से ही श्रद्धालुओं का जमावड़ा रहा। लोगों ने नदी में स्नान का भगवान सूर्य को जल अर्पित किया।
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