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रमजान-City

Fri, 25 May 2018 04:08 AM IST
Updated Fri, 25 May 2018 04:08 AM IST
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रमजान-City
रमजान को दो बार कहना पड़ सकता है ‘अलविदा’
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- 23वें और 30वें रोजा शुक्रवार को है, इस बीच अगर चांद न दिखा तो दोनों बार होगी जुमातुल विदा की नमाज
साजिद शेख
झांसी।
इस रमजान दो अलविदा जुमा (महीने का अंतिम शुक्रवार) हो सकते हैं। दरअसल, जून की 8 तारीख को 23वां रोजा होगा और इस दिन मस्जिदों में अलविदा जुमा मानकर ही नमाज अदा की जाएगी। अब अगर 29वें रोजे (14 जून) के इफ्तार के बाद ईद का चांद नजर नहीं आता है, तो इसके ठीक अगले दिन शुक्रवार 15 जून का 30वां रोजा होगा। ऐसे में इस दिन भी अलविदा जुमा की ही नमाज पढ़ी जाएगी। इसे जुमातुल विदा भी कहते हैं। दो जुमातुल विदा होने कि संभावना इसलिए भी प्रबल है, क्योंकि पिछले दो सालों से माह-ए-रमजान 29 दिनों का रहा है, इसलिए इस बार तीस दिन का होने की संभावना है।
रमजान इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना है। इसके अगले 10वें महीने को शव्वाल कहा जाता है। इस महीने की पहली तारीख को ईद-उल-फितर मनाते हैं। इस्लामी पंचांग न सिर्फ मुस्लिम देशों में प्रयोग होता है, बल्कि इसे पूरे विश्व के मुस्लिम भी इस्लामिक धार्मिक पर्वों को मनाने का सही समय जानने के लिए प्रयोग करते हैं। यह कैलेंडर चांद पर आधारित है। कभी महीना 29 दिन का होता है, तो कभी 30 दिन का। वर्ष में बारह महीने एवं 354 या 355 दिन होते हैं। सूरज पर आधारित कैलेंडर से यह 11 दिन छोटा होता है। इसलिए इस्लामी धार्मिक तिथियां हर वर्ष पिछले सौर कैलेंडर के हिसाब से 11 दिन पीछे हो जाती हैं।
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जानिए इस्लामी कैलेंडर
इस्लामी कैलेंडर को हिजरी सन कहा जाता है। इसका पहला साल तब से माना जाता है, जब पैगंबर मोहम्मद की मक्का शहर से मदीना की ओर हिजरत (प्रवास) हुई थी। हर वर्ष के साथ वर्ष संख्या के बाद में ‘एच’, जो हिज्र को संदर्भित करता है, या ‘एएच’ (आफ्टर हिजरत यानी हिजरत के बाद) लगाया जाता है। हिज्र से पहले के कुछ वर्ष के लिए ‘बीएच’ (बिफोर हिजरत यानी हिजरत से पहले) का प्रयोग इस्लामिक इतिहास से संबंधित घटनाओं के संदर्भ में किया जाता है।
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फोटो
सभी जुमा बराबर
इस्लाम में सभी जुमा बराबर हैं। अलविदा जुमा माह-ए-रमजान का आखिरी शुक्रवार होता है, इसलिए लोग इसे महत्व देते हैं। नमाज आम जुमों की तरह ही होती है, सिर्फ खुत्बे (नमाज से पहले पढ़ा जाने वाला धर्मोपदेश, जिसे खामोशी से बैठकर सुनना होता है) और जुमों से अलग होता है।
कारी महमूद अहमद
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