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2021 में सूर्य और चंद्र के ग्रहण से मुक्त रहेगा उत्तर व पश्चिम भारत
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झांसी। वर्ष 2021 नई खुशियां लेकर आएगा। नए साल में झांसी सहित संपूर्ण उत्तर एवं पश्चिम भारत खगोलीय घटनाओं सूर्य और चंद्र ग्रहण के प्रभाव से मुक्त रहेगा। ज्योतिषविदें का कहना है कि ग्रहणों के प्रभाव न होने से देश का मान - सम्मान बढे़गा और आम नागरिक भी खूब प्रगति करेंगे।
सनातन धर्म में सूर्य और चंद्रग्रहण का बड़ा महत्व है। भारतीय ग्रंथों की मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का प्रभाव धरती के प्रत्येक मनुष्य व जीव जगत पर रहता है। वर्तमान साल 2020 में पांच ग्रहण पडे़ है। इनमें पहला चंद्र ग्रहण पांच जून को पड़ा था। हालांकि यह उपच्छाया ग्रहण था। दूसरा 21 जून को सूर्य ग्रहण था, जिसका प्रभाव रहा। तीसरा पांच जुलाई को और चौथा 30 नवंबर को चंद्र उपच्छाया ग्रहण था। इस ग्रहण का प्रभाव भारत के कुछेक ही हिस्सों में रहा था। अब पांचवां और अंतिम ग्रहण 14 दिसंबर को सोमवती अमावस्या पर रहेगा। हालांकि इसका सूतक नहीं लगेगा। ज्योतिषविद् डॉ. नाथूराम पांडेय के अनुसार वर्ष 2021 में चार ग्रहण है। लेकिन इनमें से किसी भी ग्रहण का प्रभाव भारत के उत्तर, पश्चिम हिस्सों पर नहीं रहेगा। साल 2021 का पहला ग्रहण चंद्रग्रहण 26 मई को वैशाख पूर्णिमा पर रहेगा। इसका प्रभाव पूर्वी व दक्षिण भारत के कुछेक हिस्सों में रहेगा। दूसरा दस जून को सूर्य ग्रहण है। इसका प्रभाव नहीं है। तीसरा ग्रहण 19 नवंबर को चंद्र ग्रहण है। इसका प्रभाव पूर्वी भारत में ही रहेगा। चौथा व अंतिम ग्रहण सूर्य ग्रहण चार दिसंबर को है। इसका भी कोई प्रभाव भारत पर नहीं है। इधर ज्योतिषविद् अशोक तिवारी के अनुसार ग्रहणों का प्रभाव न होने से देश में व्यापारिक प्रगति होगी और कोरोना से निजात मिलने की संभावना प्रबल है। इधर ज्योतिषविद पंडित शांतनु पांडेय ने बताया कि साल का अंतिम सूर्य ग्रहण 14 दिसंबर को है। लेकिन इसका प्रभाव व सूतक नहीं लगेगा। यह सूर्य ग्रहण भारतीय समय के अनुसार रात 7:3 बजे से प्रारंभ होगा और मध्य रात्रि 12:23 मिनट तक रहेगा। ऐसे में इस ग्रहण का प्रभाव विदेशों में रहेगा।
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सनातन धर्म में सूर्य और चंद्रग्रहण का बड़ा महत्व है। भारतीय ग्रंथों की मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का प्रभाव धरती के प्रत्येक मनुष्य व जीव जगत पर रहता है। वर्तमान साल 2020 में पांच ग्रहण पडे़ है। इनमें पहला चंद्र ग्रहण पांच जून को पड़ा था। हालांकि यह उपच्छाया ग्रहण था। दूसरा 21 जून को सूर्य ग्रहण था, जिसका प्रभाव रहा। तीसरा पांच जुलाई को और चौथा 30 नवंबर को चंद्र उपच्छाया ग्रहण था। इस ग्रहण का प्रभाव भारत के कुछेक ही हिस्सों में रहा था। अब पांचवां और अंतिम ग्रहण 14 दिसंबर को सोमवती अमावस्या पर रहेगा। हालांकि इसका सूतक नहीं लगेगा। ज्योतिषविद् डॉ. नाथूराम पांडेय के अनुसार वर्ष 2021 में चार ग्रहण है। लेकिन इनमें से किसी भी ग्रहण का प्रभाव भारत के उत्तर, पश्चिम हिस्सों पर नहीं रहेगा। साल 2021 का पहला ग्रहण चंद्रग्रहण 26 मई को वैशाख पूर्णिमा पर रहेगा। इसका प्रभाव पूर्वी व दक्षिण भारत के कुछेक हिस्सों में रहेगा। दूसरा दस जून को सूर्य ग्रहण है। इसका प्रभाव नहीं है। तीसरा ग्रहण 19 नवंबर को चंद्र ग्रहण है। इसका प्रभाव पूर्वी भारत में ही रहेगा। चौथा व अंतिम ग्रहण सूर्य ग्रहण चार दिसंबर को है। इसका भी कोई प्रभाव भारत पर नहीं है। इधर ज्योतिषविद् अशोक तिवारी के अनुसार ग्रहणों का प्रभाव न होने से देश में व्यापारिक प्रगति होगी और कोरोना से निजात मिलने की संभावना प्रबल है। इधर ज्योतिषविद पंडित शांतनु पांडेय ने बताया कि साल का अंतिम सूर्य ग्रहण 14 दिसंबर को है। लेकिन इसका प्रभाव व सूतक नहीं लगेगा। यह सूर्य ग्रहण भारतीय समय के अनुसार रात 7:3 बजे से प्रारंभ होगा और मध्य रात्रि 12:23 मिनट तक रहेगा। ऐसे में इस ग्रहण का प्रभाव विदेशों में रहेगा।
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