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बीस हजार मीट्रिक टन अधिक हुई खरीद
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झांसी। रबी सीजन में इस साल पिछली बार के मुकाबले करीब 20 हजार मीट्रिक टन गेहूं की रिकॉर्ड खरीद हुई है। पिछले वर्ष जहां सरकारी क्रय केंद्रों में 73793 एमटी गेहूं बेचा गया वहीं, इस बार यह आंकड़ा 93,300 एमटी तक पहुंच गया। यह स्थिति तब है जब सरकार ने खरीद केंद्रों में तुलाई की क्षमता निर्धारित किए जाने के साथ हीकिसानों की उपज बेचने की क्षमता भी तय कर दी।
किसान आंदोलन के बीच पहली बार रबी सीजन में खरीद शुरू हुई। इस बार एक अप्रैल से झांसी के 45 केंद्रों में खरीद शुरू कराई गई। यहां खाद्य विभाग के 10, पीसीएफ के 29, पीसीयू के 2, भारतीय खाद्य निगम के 3, कृषि उत्पादन मंडी समिति के एक केंद्र खोले गए। शुरूआत मेें पंचायत चुनाव एवं उसके बाद कोरोना की दूसरी लहर के चलते खरीद काफी धीमी रही लेकिन, बाद में मई महीने में खरीद ने रफ्तार पकड़ी। पिछले वर्ष कोरोना के चलते बड़ी संख्या में किसानों ने गेहूं बेचने से परहेज किया था। इस बार गेहूं खरीद के लिए सरकार ने कोई लक्ष्य भी तय नहीं किया था लेकिन, खरीद इस बार पिछली बार के मुकाबले इस वर्ष खरीद अधिक रही। पिछले वर्ष 73793 एमटी खरीद हुई थी वहीं, इस वर्ष 93300 एमटी खरीद हुई। इसके पहले 2019-2020 में 75255 एमटी खरीद हुई थी। इस बार कुल 20242 किसानों ने अपना पंजीकरण कराया था। इनमें से अधिकांश ने केंद्रोें में पहुंचकर अपनी उपज बेची। उपज बेचने के एवज में किसानों को 17133 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया जबकि कुल 18426 लाख का भुगतान किया जाना था। जिला विपणन अधिकारी अनूप कुमार के मुताबिक शेष बकाया रकम भी जल्द ही किसानों के खाते में भेज दी जाएगी।
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किसान आंदोलन के बीच पहली बार रबी सीजन में खरीद शुरू हुई। इस बार एक अप्रैल से झांसी के 45 केंद्रों में खरीद शुरू कराई गई। यहां खाद्य विभाग के 10, पीसीएफ के 29, पीसीयू के 2, भारतीय खाद्य निगम के 3, कृषि उत्पादन मंडी समिति के एक केंद्र खोले गए। शुरूआत मेें पंचायत चुनाव एवं उसके बाद कोरोना की दूसरी लहर के चलते खरीद काफी धीमी रही लेकिन, बाद में मई महीने में खरीद ने रफ्तार पकड़ी। पिछले वर्ष कोरोना के चलते बड़ी संख्या में किसानों ने गेहूं बेचने से परहेज किया था। इस बार गेहूं खरीद के लिए सरकार ने कोई लक्ष्य भी तय नहीं किया था लेकिन, खरीद इस बार पिछली बार के मुकाबले इस वर्ष खरीद अधिक रही। पिछले वर्ष 73793 एमटी खरीद हुई थी वहीं, इस वर्ष 93300 एमटी खरीद हुई। इसके पहले 2019-2020 में 75255 एमटी खरीद हुई थी। इस बार कुल 20242 किसानों ने अपना पंजीकरण कराया था। इनमें से अधिकांश ने केंद्रोें में पहुंचकर अपनी उपज बेची। उपज बेचने के एवज में किसानों को 17133 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया जबकि कुल 18426 लाख का भुगतान किया जाना था। जिला विपणन अधिकारी अनूप कुमार के मुताबिक शेष बकाया रकम भी जल्द ही किसानों के खाते में भेज दी जाएगी।
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