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युवा पीढ़ी को बनाए गुणवान व संस्कारवान
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युवा पीढ़ी को बनाए गुणवान व संस्कारवान
झांसी। आज की भावी पीढ़ी जब तक गुणवान और संस्कारवान नहीं होगी, तब तक मानव के जीवन में सुख शांति प्राप्त नहीं हा सकती। यह बात आचार्य प्रतिनिधि सुखदेवी शर्मा ने संगीतमय प्रवचन के बाद श्रोताओं को जन-जन तक पहुंचाने की अपील की। इससे पूर्व प्रेमनगर स्थित प्रज्ञापीठ में 24 कुंडीय महायज्ञ का आयोजन हुआ।
गायत्री तीर्थ कुंज हरिद्वार की तरफ से प्रेमनगर स्थित एक विवाह घर में सुबह यज्ञ का वैज्ञानिक एवं अध्यात्मिक बताते हुए यज्ञ संपन्न कराया। शाम को संगीतमय प्रवचन का आयोजन हुआ। आचार्य प्रतिनिधि ने श्रोताओं को युवाओं को गुणवान और संस्कारवान बनाने के श्रोताओं से कहा कि जिस प्रकार से मिट्टी से प्राप्त सोने को तपाया व गढ़ा नहीं जाएगा तब तक श्रेष्ठ गहने गहने का स्वरूप धारण नहीं कर सकता। इसी प्रकार से जब तक पत्थर को जब तक खरादा नहीं जाएगा तब तक देवता की प्रतिमा नहीं बन सकती। इसी प्रकार से मानव जन्म जन्मांतरों के कुसंस्कार लेकर आता है। इसलिए ऋषियों की परंपरा के अनुसार गर्भ से लेकर मृत्यु तक संस्कारों के माध्यम से अनगढ़ से सुगढ़ बनता है तथा मानव से महामानव, देवमानव बनता है। इसके बाद संगीत के माध्यम से सस्कारों की परंपरा पर प्रकाश डाला। इस मौके पर पवन कौशिक, सुरेश साहू, सुभाष चंद्र, पंकज शर्मा, रमेश पांडेय, पुष्पा शिवहरे, रामदेवी वर्मा, शांति शाक्या, किरन नामदेव, नंदनी शर्मा मौजूद रहीं। संचालन राजेंद्र द्विवेदी ने किया।
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झांसी। आज की भावी पीढ़ी जब तक गुणवान और संस्कारवान नहीं होगी, तब तक मानव के जीवन में सुख शांति प्राप्त नहीं हा सकती। यह बात आचार्य प्रतिनिधि सुखदेवी शर्मा ने संगीतमय प्रवचन के बाद श्रोताओं को जन-जन तक पहुंचाने की अपील की। इससे पूर्व प्रेमनगर स्थित प्रज्ञापीठ में 24 कुंडीय महायज्ञ का आयोजन हुआ।
गायत्री तीर्थ कुंज हरिद्वार की तरफ से प्रेमनगर स्थित एक विवाह घर में सुबह यज्ञ का वैज्ञानिक एवं अध्यात्मिक बताते हुए यज्ञ संपन्न कराया। शाम को संगीतमय प्रवचन का आयोजन हुआ। आचार्य प्रतिनिधि ने श्रोताओं को युवाओं को गुणवान और संस्कारवान बनाने के श्रोताओं से कहा कि जिस प्रकार से मिट्टी से प्राप्त सोने को तपाया व गढ़ा नहीं जाएगा तब तक श्रेष्ठ गहने गहने का स्वरूप धारण नहीं कर सकता। इसी प्रकार से जब तक पत्थर को जब तक खरादा नहीं जाएगा तब तक देवता की प्रतिमा नहीं बन सकती। इसी प्रकार से मानव जन्म जन्मांतरों के कुसंस्कार लेकर आता है। इसलिए ऋषियों की परंपरा के अनुसार गर्भ से लेकर मृत्यु तक संस्कारों के माध्यम से अनगढ़ से सुगढ़ बनता है तथा मानव से महामानव, देवमानव बनता है। इसके बाद संगीत के माध्यम से सस्कारों की परंपरा पर प्रकाश डाला। इस मौके पर पवन कौशिक, सुरेश साहू, सुभाष चंद्र, पंकज शर्मा, रमेश पांडेय, पुष्पा शिवहरे, रामदेवी वर्मा, शांति शाक्या, किरन नामदेव, नंदनी शर्मा मौजूद रहीं। संचालन राजेंद्र द्विवेदी ने किया।
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