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प्रो कबड्डी लीग से मिली है नए खिलाड़ियों को पहचान-City
Updated Fri, 29 Sep 2017 10:11 PM IST
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प्रो कबड्डी लीग से मिली है नए खिलाड़ियों को पहचान
- अर्जुन अवॉर्डी संजीव बालियान ने साझा किए विचार
- बोले, एक दिन जरूर क्रिकेट की बराबरी करेगा कबड्डी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
प्रो कबड्डी लीग से नए खिलाड़ियों को पहचान मिली है। नई प्रतिभा उभर रही है। बहुत खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर नहीं खेल पाते हैं। ऐसे में इस लीग ने उनको प्लेटफॉर्म देने का काम किया है। अमर उजाला से खास बातचीत में यह बात अर्जुन अवार्ड से सम्मानित पूर्व कबड्डी खिलाड़ी संजीव बालियान ने की।
ध्यानचंद स्टेडियम में चल रही प्रदेशीय कबड्डी प्रतियोगिता में आए संजीव ने कहा कि अखबारों, न्यूज चैनलों में क्रिकेट को ज्यादा तवज्जो दी जाती है। किसी खिलाड़ी को चोट लगती है, तो अखबार के लिए वह बड़ी खबर बनती है लेकिन कबड्डी को अपेक्षानुसार कवरेज नहीं मिल पाती। इसलिए राष्ट्रीय खेल होने के बावजूद क्रिकेट देश में ज्यादा प्रचलित हो गया। हालांकि, उनका मानना है कि अब कबड्डी के प्रति भी लोगों का आकर्षण बढ़ा है। संजीव के अनुसार एक दिन कबड्डी जरूर क्रिकेट की बराबरी कर लेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि स्कूल स्तर पर कबड्डी को लागू कर दिया जाए, तो खेल को बढ़ावा मिल सकता है। चूंकि, कबड्डी में संसाधन आदि खरीद के लिए पैसा खर्च नहीं करना पड़ता है, इसलिए निर्धन परिवार का बच्चा भी यह खेल खेल सकता है।
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प्रो कबड्डी लीग से मिली है नए खिलाड़ियों को पहचान
- अर्जुन अवॉर्डी संजीव बालियान ने साझा किए विचार
- बोले, एक दिन जरूर क्रिकेट की बराबरी करेगा कबड्डी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
प्रो कबड्डी लीग से नए खिलाड़ियों को पहचान मिली है। नई प्रतिभा उभर रही है। बहुत खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर नहीं खेल पाते हैं। ऐसे में इस लीग ने उनको प्लेटफॉर्म देने का काम किया है। अमर उजाला से खास बातचीत में यह बात अर्जुन अवार्ड से सम्मानित पूर्व कबड्डी खिलाड़ी संजीव बालियान ने की।
ध्यानचंद स्टेडियम में चल रही प्रदेशीय कबड्डी प्रतियोगिता में आए संजीव ने कहा कि अखबारों, न्यूज चैनलों में क्रिकेट को ज्यादा तवज्जो दी जाती है। किसी खिलाड़ी को चोट लगती है, तो अखबार के लिए वह बड़ी खबर बनती है लेकिन कबड्डी को अपेक्षानुसार कवरेज नहीं मिल पाती। इसलिए राष्ट्रीय खेल होने के बावजूद क्रिकेट देश में ज्यादा प्रचलित हो गया। हालांकि, उनका मानना है कि अब कबड्डी के प्रति भी लोगों का आकर्षण बढ़ा है। संजीव के अनुसार एक दिन कबड्डी जरूर क्रिकेट की बराबरी कर लेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि स्कूल स्तर पर कबड्डी को लागू कर दिया जाए, तो खेल को बढ़ावा मिल सकता है। चूंकि, कबड्डी में संसाधन आदि खरीद के लिए पैसा खर्च नहीं करना पड़ता है, इसलिए निर्धन परिवार का बच्चा भी यह खेल खेल सकता है।
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