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पेयजल महायोजना: काम के पहले जांच शुरू,,-Lalitpur
Updated Fri, 23 Jun 2017 09:47 PM IST
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जांच की आंच में फिर फंसी पेयजल महायोजना
लागत 264 करोड़ से बढ़कर 916 करोड़ पहुंची
3 जुलाई को दोबारा टेंडर खुलने हैं, कमेटी बनी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। झांसी के लिए बेहद महत्वपूर्ण पेयजल महायोजना एक बार फिर फंस गई है। शुरू होने से पहले ही इस पर जांच की आंच आ गई है। आगामी 3 जुलाई को इसके टेंडर दोबारा खुलने हैं। इसके पहले भी टेंडर मांगे थे पर रेट के चक्कर में बात नहीं बन सकी थी। अब आगे क्या होगा, यह तो वक्त ही बताएगा।
एलएंडटी कंपनी का टेंडर निरस्त होने के बाद जल निगम ने अब नये सिरे से पेयजल महायोजना के लिए निविदाएं (टेंडर) आमंत्रित किए हैं। इस बार पहले चरण के काम को पांच भागों में बांट दिया गया है। निविदाओं को तीन जुलाई कोे खोला जाएगा। मगर, 21 जून को जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह ने महायोजना के पहले चरण के काम को पांच भागों में करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करते हुए जांच के आदेश दे दिए। जिलाधिकारी को इस मामले में तीन सदस्यीय समिति का गठन करने के आदेश दिए गए हैं। शुक्रवार को मुख्य विकास अधिकारी ए. दिनेश कुमार ने जल निगम के अधिशासी अभियंता एपी यादव को बुलाकर महायोजना से जुड़े कागजात देखे। प्रभारी मंत्री के जांच के आदेश का उद्देश्य क्या है? यह तो आगे पता लगेगा, लेकिन यह जरूर है कि इससे टेंडर प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है।
मालूम हो कि, पिछले सात साल में यह योजना 264 करोड़ से बढ़कर 916 करोड़ पर पहुंच गई हैं, जिसका तीन चरणों में काम पूरा होना है। इस योजना के लिए केंद्र सरकार पचास प्रतिशत, प्रदेश सरकार तीस प्रतिशत और नगर निगम बीस प्रतिशत बजट देगा। जल निगम ने इस योजना का पहले चरण का काम कराने के लिए 220 करोड़ का एस्टीमेट तैयार किया है। इसमें 36 करोड़ रुपये जल निगम को काम शुरू करने के लिए मिल चुके हैं।
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‘ महायोजना की टेंडर प्रक्रिया जल निगम की उच्च स्तरीय कमेटी की अनुमति पर पूरी कराई जा रही है। आगे उच्च अधिकारी जैसा आदेश देंगे, वैसा काम होगा।’
एपी यादव, अधिशासी अभियंता, जल निगम।
इसलिए बांटा गया काम
जल निगम ने इस योजना का पहले चरण का काम कराने के लिए 220 करोड़ का एस्टीमेट तैयार किया है। इसके लिए आठ दस पहले टेंडर आमंत्रित किए थे। तीन नामी कंपनियों ने टेंडर डाले थे। एलएंडटी कंपनी ने सबसे कम रेट डाले थे, लेकिन कंपनी कुछ शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं थे। इसके लिए जल निगम ने कंपनी को कई बार नोटिस जारी किया, लेकिन कंपनी तैयार नहीं हुई। इस कारण जल निगम की उच्च स्तरीय कमेटी ने कंपनी का टेंडर निरस्त कर दिया था। इसके बाद नए सिरे से टेंडर मांगने की प्रक्रिया शुरू की। तय किया गया है कि अब पहले चरण का काम पांच ठेका कंपनियों के बीच बांटा जाएगा, ताकि इसे जल्द पूरा किया जा सके।
मंत्री ही देते हैं 25 करोड़ से ऊपर की की मंजूरी
जल निगम लखनऊ की उच्च स्तरीय कमेटी के आदेश पर ही योजनाओं की टेंडरिंग कराई जाती हैं। 25 करोड़ से कम लागत की योजनाओं को उच्च स्तरीय कमेटी ही मंजूरी दे देती हैं। इससे ऊपर की योजनाओं में संबंधित विभाग की मंत्री की स्वीकृति आवश्यक है। महायोजना के पहले चरण के काम 25 करोड़ से ऊपर के हैं। मंत्री की अनुमति के बाद ही योजना को मंजूरी दी गई थी।
लागत 264 करोड़ से बढ़कर 916 करोड़ पहुंची
3 जुलाई को दोबारा टेंडर खुलने हैं, कमेटी बनी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। झांसी के लिए बेहद महत्वपूर्ण पेयजल महायोजना एक बार फिर फंस गई है। शुरू होने से पहले ही इस पर जांच की आंच आ गई है। आगामी 3 जुलाई को इसके टेंडर दोबारा खुलने हैं। इसके पहले भी टेंडर मांगे थे पर रेट के चक्कर में बात नहीं बन सकी थी। अब आगे क्या होगा, यह तो वक्त ही बताएगा।
एलएंडटी कंपनी का टेंडर निरस्त होने के बाद जल निगम ने अब नये सिरे से पेयजल महायोजना के लिए निविदाएं (टेंडर) आमंत्रित किए हैं। इस बार पहले चरण के काम को पांच भागों में बांट दिया गया है। निविदाओं को तीन जुलाई कोे खोला जाएगा। मगर, 21 जून को जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह ने महायोजना के पहले चरण के काम को पांच भागों में करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करते हुए जांच के आदेश दे दिए। जिलाधिकारी को इस मामले में तीन सदस्यीय समिति का गठन करने के आदेश दिए गए हैं। शुक्रवार को मुख्य विकास अधिकारी ए. दिनेश कुमार ने जल निगम के अधिशासी अभियंता एपी यादव को बुलाकर महायोजना से जुड़े कागजात देखे। प्रभारी मंत्री के जांच के आदेश का उद्देश्य क्या है? यह तो आगे पता लगेगा, लेकिन यह जरूर है कि इससे टेंडर प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है।
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मालूम हो कि, पिछले सात साल में यह योजना 264 करोड़ से बढ़कर 916 करोड़ पर पहुंच गई हैं, जिसका तीन चरणों में काम पूरा होना है। इस योजना के लिए केंद्र सरकार पचास प्रतिशत, प्रदेश सरकार तीस प्रतिशत और नगर निगम बीस प्रतिशत बजट देगा। जल निगम ने इस योजना का पहले चरण का काम कराने के लिए 220 करोड़ का एस्टीमेट तैयार किया है। इसमें 36 करोड़ रुपये जल निगम को काम शुरू करने के लिए मिल चुके हैं।
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‘ महायोजना की टेंडर प्रक्रिया जल निगम की उच्च स्तरीय कमेटी की अनुमति पर पूरी कराई जा रही है। आगे उच्च अधिकारी जैसा आदेश देंगे, वैसा काम होगा।’
एपी यादव, अधिशासी अभियंता, जल निगम।
इसलिए बांटा गया काम
जल निगम ने इस योजना का पहले चरण का काम कराने के लिए 220 करोड़ का एस्टीमेट तैयार किया है। इसके लिए आठ दस पहले टेंडर आमंत्रित किए थे। तीन नामी कंपनियों ने टेंडर डाले थे। एलएंडटी कंपनी ने सबसे कम रेट डाले थे, लेकिन कंपनी कुछ शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं थे। इसके लिए जल निगम ने कंपनी को कई बार नोटिस जारी किया, लेकिन कंपनी तैयार नहीं हुई। इस कारण जल निगम की उच्च स्तरीय कमेटी ने कंपनी का टेंडर निरस्त कर दिया था। इसके बाद नए सिरे से टेंडर मांगने की प्रक्रिया शुरू की। तय किया गया है कि अब पहले चरण का काम पांच ठेका कंपनियों के बीच बांटा जाएगा, ताकि इसे जल्द पूरा किया जा सके।
मंत्री ही देते हैं 25 करोड़ से ऊपर की की मंजूरी
जल निगम लखनऊ की उच्च स्तरीय कमेटी के आदेश पर ही योजनाओं की टेंडरिंग कराई जाती हैं। 25 करोड़ से कम लागत की योजनाओं को उच्च स्तरीय कमेटी ही मंजूरी दे देती हैं। इससे ऊपर की योजनाओं में संबंधित विभाग की मंत्री की स्वीकृति आवश्यक है। महायोजना के पहले चरण के काम 25 करोड़ से ऊपर के हैं। मंत्री की अनुमति के बाद ही योजना को मंजूरी दी गई थी।