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कुतों की नसबंदी का काम शुरू-City
Updated Sun, 18 Feb 2018 01:04 AM IST
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श्रेणी- सिविक एमीनिटीज
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कुत्तों की नसबंदी फिर से शुरू
- एक दिन में दस ऑपरेशन किया जा रहे हैं
एंटी रैबीज का इंजेक्शन भी लगाया जा रहा
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
नगर निगम ने आवारा कुत्तों की जनसंख्या पर रोक लगाने के लिए कुत्तों की नसबंदी करने का काम फिर से शुरू कर दिया है। साथ ही एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाया जा रहा है। यह काम छह महीने से रुका था।
बिजौली स्थित आपरेशन थियेटर में कुत्तों को पकड़कर ले जाया जाता है, जहां आपरेशन कर चार दिन तक भर्ती रखने के बाद कुत्ते को छोड़ दिया जाता है। कुत्ता तीन साल में बच्चे पैदा करने लगता है। एक साल में एक कुतिया दो बार में सोलह से बीस बच्चे पैदा करती है, जिससे कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ती है। खानपान के अभाव में आधे कुत्तों की मौत हो जाती है। इसके बाद भी आवारा कुत्तों की संख्या दिनोंदिन बढ़ रही है। यह कुत्ते रात में आने-जाने वालों को अक्सर काट लेते हैं, जिससे उन्हें इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं। आवारा कुत्तों से बचने के लिए लोगों को डंडे का सहारा लेना पड़ता है।
नगर निगम ने कुत्तों की नसबंदी करने के लिए बिजौली में आपरेशन थियेटर बनवाया है, जहां पर कुत्तों को बेहोश करने के लिए एनेस्थीसिया दवा देकर आपरेशन किया जाता है। टांके लगाने के बाद तीन से चार दिन कुत्ते को उपचार दिया जाता है, इसके बाद छोड़ दिया जाता है। कुत्ते को एंटीरैबीज इंजेक्शन भी दिया जाता है, ताकि वह किसी को काटे तो रैबीज का खतरा न रहे।
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पशु चिकित्साधिकारी डा. आरके सिंह ने बताया कि कुत्तों की नसबंदी का काम शुरू हो गया है। प्रतिदिन दस कुत्तों की नसबंदी की जा रही है। सूचना मिलने पर चंद्रविहार कालोनी से कुत्ते पकड़वाए गए थे।
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कुत्तों की नसबंदी फिर से शुरू
- एक दिन में दस ऑपरेशन किया जा रहे हैं
एंटी रैबीज का इंजेक्शन भी लगाया जा रहा
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
नगर निगम ने आवारा कुत्तों की जनसंख्या पर रोक लगाने के लिए कुत्तों की नसबंदी करने का काम फिर से शुरू कर दिया है। साथ ही एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाया जा रहा है। यह काम छह महीने से रुका था।
बिजौली स्थित आपरेशन थियेटर में कुत्तों को पकड़कर ले जाया जाता है, जहां आपरेशन कर चार दिन तक भर्ती रखने के बाद कुत्ते को छोड़ दिया जाता है। कुत्ता तीन साल में बच्चे पैदा करने लगता है। एक साल में एक कुतिया दो बार में सोलह से बीस बच्चे पैदा करती है, जिससे कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ती है। खानपान के अभाव में आधे कुत्तों की मौत हो जाती है। इसके बाद भी आवारा कुत्तों की संख्या दिनोंदिन बढ़ रही है। यह कुत्ते रात में आने-जाने वालों को अक्सर काट लेते हैं, जिससे उन्हें इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं। आवारा कुत्तों से बचने के लिए लोगों को डंडे का सहारा लेना पड़ता है।
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नगर निगम ने कुत्तों की नसबंदी करने के लिए बिजौली में आपरेशन थियेटर बनवाया है, जहां पर कुत्तों को बेहोश करने के लिए एनेस्थीसिया दवा देकर आपरेशन किया जाता है। टांके लगाने के बाद तीन से चार दिन कुत्ते को उपचार दिया जाता है, इसके बाद छोड़ दिया जाता है। कुत्ते को एंटीरैबीज इंजेक्शन भी दिया जाता है, ताकि वह किसी को काटे तो रैबीज का खतरा न रहे।
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पशु चिकित्साधिकारी डा. आरके सिंह ने बताया कि कुत्तों की नसबंदी का काम शुरू हो गया है। प्रतिदिन दस कुत्तों की नसबंदी की जा रही है। सूचना मिलने पर चंद्रविहार कालोनी से कुत्ते पकड़वाए गए थे।