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Jhansi News: वन विभाग से अनुमति लिए बिना ही डीजल लोकोशेड में काटे गए 17 पेड़
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झांसी। डीजल लोकोशेड में कोच केयर डिपो का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। जिसके चलते लोको शेड के अधिकारियों द्वारा वन विभाग से 17 पेड़ों का मूल्यांकन कराकर पेड़ों की नीलामी कर दी गई थी। लेकिन ठेकेदार द्वारा वन विभाग की अनुमति लिए बिना ही पेड़ों को काट दिया गया है। वन विभाग के अफसरों के मुताबिक संबंधित के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा।
शेड में कोच केयर डिपो के निर्माण के दौरान बाधक बने पेड़ों के कटान के लिए शेड के अधिकारियों द्वारा वन विभाग द्वारा पेड़ों का मूल्यांकन तो करा लिया गया था। लेकिन नीलामी एवं कटान की सूचना वन विभाग को नहीं दी गई थी। नियमानुसार ठेकेदार अथवा शेड के अधिकारियों द्वारा वन विभाग से पेड़ों को काटने की अनुमति को प्रदान करने के साथ ही वन विभाग में एनएससी (नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट) जमा की जाती है। एनएससी जमा होने के बाद ही वन विभाग द्वारा कटान और निकासी की अनुमति को प्रदान किया जाता है। लेकिन डीजल लोको शेड के अधिकारियों की मौजूदगी में ही ठेकेदार ने बिना अनुमति के पेड़ों को काट दिया है। प्रभारी डीएफओ एमपी गौतम ने बताया कि पेड़ों को काटने की अनुमति को प्रदान नहीं किया गया है। मामले की पड़ताल की जाएगी। संबंधित के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा। वहीं रेलवे पीआरओ मनोज कुमार ने बताया कि रेलवे द्वारा सभी औपचारिकताओं को पूरा कर पेड़ों की नीलामी की गई थी। वन विभाग से अनुमति लेना ठेकेदार की जिम्मेदारी है।
यह है एनएससी (नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट)
किसी भी पेड़ को काटने के लिए एक हजार रुपये प्रति पेड़ की एनएससी डाक विभाग से बनवाकर वन विभाग में जमा की जाती है। एक पेड़ काटने के एवज में कटान करने वाले को दस पेड़ लगाने पड़ते हैं। पांच साल के बाद वन विभाग द्वारा लगाए गए पेड़ों की स्थिति देखने के बाद एनएससी को वापस कर दिया जाता है।
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शेड में कोच केयर डिपो के निर्माण के दौरान बाधक बने पेड़ों के कटान के लिए शेड के अधिकारियों द्वारा वन विभाग द्वारा पेड़ों का मूल्यांकन तो करा लिया गया था। लेकिन नीलामी एवं कटान की सूचना वन विभाग को नहीं दी गई थी। नियमानुसार ठेकेदार अथवा शेड के अधिकारियों द्वारा वन विभाग से पेड़ों को काटने की अनुमति को प्रदान करने के साथ ही वन विभाग में एनएससी (नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट) जमा की जाती है। एनएससी जमा होने के बाद ही वन विभाग द्वारा कटान और निकासी की अनुमति को प्रदान किया जाता है। लेकिन डीजल लोको शेड के अधिकारियों की मौजूदगी में ही ठेकेदार ने बिना अनुमति के पेड़ों को काट दिया है। प्रभारी डीएफओ एमपी गौतम ने बताया कि पेड़ों को काटने की अनुमति को प्रदान नहीं किया गया है। मामले की पड़ताल की जाएगी। संबंधित के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा। वहीं रेलवे पीआरओ मनोज कुमार ने बताया कि रेलवे द्वारा सभी औपचारिकताओं को पूरा कर पेड़ों की नीलामी की गई थी। वन विभाग से अनुमति लेना ठेकेदार की जिम्मेदारी है।
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यह है एनएससी (नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट)
किसी भी पेड़ को काटने के लिए एक हजार रुपये प्रति पेड़ की एनएससी डाक विभाग से बनवाकर वन विभाग में जमा की जाती है। एक पेड़ काटने के एवज में कटान करने वाले को दस पेड़ लगाने पड़ते हैं। पांच साल के बाद वन विभाग द्वारा लगाए गए पेड़ों की स्थिति देखने के बाद एनएससी को वापस कर दिया जाता है।
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