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डिफेंस कॉरिडोर के लिए किसानों ने मांगा नोएडा के बराबर मुआवजा
Thu, 17 Jan 2019 01:22 AM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
Published by: Priyesh Mishra
Updated Thu, 17 Jan 2019 01:22 AM IST
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डिफेंस कॉरिडोर के लिए जिले में अधिग्रहीत हो रही जमीन का मुआवजा नोएडा के बराबर देने की मांग को लेकर बुधवार को किसानों ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। बुंदेलखंड किसान पंचायत पानी आंदोलन के बैनर तले किसानों ने प्रदर्शन किया। पंचायत अध्यक्ष गौरीशंकर बिदुआ ने कहा कि डिफेंस कॉरिडोर में गरौठा तहसील के बामौर ब्लॉक के ग्राम एरच, झबरा, नेकौरा, गेंदा, कठर्री, इस्किल, लमेरा, गोरा, जुझारपुरा, हरदुआ, पुराटेरका, शमशेरपुरा, वैंदा, सुरवई, पथरेड़ी गांव चिह्नित किए गए हैं। अब जमीन अधिग्रहीत की जा रही है। जमीन सिंचित तथा बहुफसलीय है। जमीन का सर्किल रेट बहुत कम है। सरकार के सर्किल रेट से जमीन खरीदने पर किसानों का विकास नहीं होगा, क्योंकि किसानों के परिवारों के भरण पोषण का मुख्य साधन खेती है।
उन्होंने कहा कि सिंचित और बहुफसलीय भूमि को सर्किल रेट 12.50 लाख रुपये प्रति एकड़ से दिया जा रहा है। यही जमीन अधिग्रहीत कर उद्योगपतियों को वर्ग फिट के हिसाब से बेची जाएगी। ऐसे में जिस रेट से जमीन उद्योगपति खरीदें, उसी हिसाब से किसानों को सर्किल रेट दिया जाए। अथवा नोएडा के सर्किल रेट से मुआवजा दिया जाए। डिफेंस कॉरिडोर मे कर्मचारियों की भर्ती में उन किसानों या उनके परिजनों को भर्ती में वरीयता दी जाए, जिनकी जमीन अधिग्रहीत की जा रही है। किसानाें को पूरी जमीन, कुआं, पेड़, बंधी और बोरिंग का मुआवजा एक साथ दिया जाए।
बता दें कि नोएडा में 22 साल पहले हुए जमीन के अधिग्रहण में 1.10 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा दिया गया था। इस मौके पर लल्लूराम, राजेंद्र यादव, शंकर सिंह, बृजबिहारी, भगवत नापित, रामेश्वर पटेल, रामप्रकाश खरे, दयाराम, साकिर अली, अजय गुप्ता, अशोक कुमार पटेल मौजूद रहे।
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बिना जमीन के दे दी सहमति
किसानों ने आरोप लगाया कि जिन किसानों ने जमीन के लिए सहमति दे दी है, उनमें से अधिकतर के पास या तो जमीन नहीं है। यदि है तो नदी के किनारे की बेकार अनुपजाऊ जमीन है। आरोप लगाया कि उनको बातों में लेकर जमीन अधिग्रहण की सहमति ले ली गई है। सच्चाई यह है कि वास्तविक किसानों को इससे कोई लेना देना ही नहीं है।
1470 किसान दायरे में
पहले चरण में जिन किसानों की जमीन अधिग्रहीत होगी, उस दायरे में 1470 किसान आ रहे हैं। जबकि, कुल 35 सौ से अधिक किसान अधिग्रहण के दायरे में आ रहे हैं।
हमारी पूरी जमीन सिंचित है। तीन फसलें लेते हैं। सरकार मुआवजा बहुत कम दे रही है। यदि देना है तो 50 लाख रुपये प्रति एकड़ दिया जाए और प्रत्येक किसान के परिवार में सरकारी नौकरी दी जाए।
- संजीव कुमार, गांव नैकोरा
हमारी चार बीघा जमीन है। तीन फसलें लेते हैं। जो मुआवजा दिया जा रहा है वह बहुत कम है। इसे बढ़ाकर नोएडा के बराबर दिया जाए, ताकि किसान अपनी जरूरतें पूरी कर सकें।
- शंकर, गांव इस्किल
खेती बाड़ी छूट जाने से हमारा पूरा परिवार बेरोजगार हो जाएगा, क्योंकि हमारे पास आमदनी का कोई दूसरा जरिया नहीं है। सरकार को सोचना चाहिए कि जमीन का मुआवजा उचित दिया जाए।
- रमाकांत, गांव एरच
हमारी जमीन दो लोगों के नाम है। परिवार में केवल जमीन ही आमदनी का आधार है। यदि जमीन चली गई तो हम बेरोजगार हो जाएंगे। मुआवजा उचित दिया जाए, क्योंकि कमाने खाने का दूसरा जरिया नहीं है।
- मलखान सिंह यादव, गांव जुझारपुरा
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उन्होंने कहा कि सिंचित और बहुफसलीय भूमि को सर्किल रेट 12.50 लाख रुपये प्रति एकड़ से दिया जा रहा है। यही जमीन अधिग्रहीत कर उद्योगपतियों को वर्ग फिट के हिसाब से बेची जाएगी। ऐसे में जिस रेट से जमीन उद्योगपति खरीदें, उसी हिसाब से किसानों को सर्किल रेट दिया जाए। अथवा नोएडा के सर्किल रेट से मुआवजा दिया जाए। डिफेंस कॉरिडोर मे कर्मचारियों की भर्ती में उन किसानों या उनके परिजनों को भर्ती में वरीयता दी जाए, जिनकी जमीन अधिग्रहीत की जा रही है। किसानाें को पूरी जमीन, कुआं, पेड़, बंधी और बोरिंग का मुआवजा एक साथ दिया जाए।
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बता दें कि नोएडा में 22 साल पहले हुए जमीन के अधिग्रहण में 1.10 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा दिया गया था। इस मौके पर लल्लूराम, राजेंद्र यादव, शंकर सिंह, बृजबिहारी, भगवत नापित, रामेश्वर पटेल, रामप्रकाश खरे, दयाराम, साकिर अली, अजय गुप्ता, अशोक कुमार पटेल मौजूद रहे।
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बिना जमीन के दे दी सहमति
किसानों ने आरोप लगाया कि जिन किसानों ने जमीन के लिए सहमति दे दी है, उनमें से अधिकतर के पास या तो जमीन नहीं है। यदि है तो नदी के किनारे की बेकार अनुपजाऊ जमीन है। आरोप लगाया कि उनको बातों में लेकर जमीन अधिग्रहण की सहमति ले ली गई है। सच्चाई यह है कि वास्तविक किसानों को इससे कोई लेना देना ही नहीं है।
1470 किसान दायरे में
पहले चरण में जिन किसानों की जमीन अधिग्रहीत होगी, उस दायरे में 1470 किसान आ रहे हैं। जबकि, कुल 35 सौ से अधिक किसान अधिग्रहण के दायरे में आ रहे हैं।
हमारी पूरी जमीन सिंचित है। तीन फसलें लेते हैं। सरकार मुआवजा बहुत कम दे रही है। यदि देना है तो 50 लाख रुपये प्रति एकड़ दिया जाए और प्रत्येक किसान के परिवार में सरकारी नौकरी दी जाए।
- संजीव कुमार, गांव नैकोरा
हमारी चार बीघा जमीन है। तीन फसलें लेते हैं। जो मुआवजा दिया जा रहा है वह बहुत कम है। इसे बढ़ाकर नोएडा के बराबर दिया जाए, ताकि किसान अपनी जरूरतें पूरी कर सकें।
- शंकर, गांव इस्किल
खेती बाड़ी छूट जाने से हमारा पूरा परिवार बेरोजगार हो जाएगा, क्योंकि हमारे पास आमदनी का कोई दूसरा जरिया नहीं है। सरकार को सोचना चाहिए कि जमीन का मुआवजा उचित दिया जाए।
- रमाकांत, गांव एरच
हमारी जमीन दो लोगों के नाम है। परिवार में केवल जमीन ही आमदनी का आधार है। यदि जमीन चली गई तो हम बेरोजगार हो जाएंगे। मुआवजा उचित दिया जाए, क्योंकि कमाने खाने का दूसरा जरिया नहीं है।
- मलखान सिंह यादव, गांव जुझारपुरा