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सिविक एमीनिटीज = जेडीए में नहीं स्टाफ-City
Updated Wed, 02 Aug 2017 10:50 PM IST
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जेडीए में बड़े अफसरों की कुर्सियां खाली, दे ताली
यही हाल टाउन प्लानिंग विभाग का, कामकाज प्रभावित, योजनाएं ठप
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
झांसी विकास प्राधिकरण पर शहर के विकास का जिम्मा है, लेकिन यहां कई बड़े अधिकारियों की कुर्सियां अरसे से खाली हैं। उपाध्यक्ष और सचिव भी नहीं हैं। यही स्थिति टाउन प्लानिंग विभाग की भी है। यहां 24 में 10 पदों पर अधिकारी और कर्मचारी नहीं हैं। इससे पता लगता है कि झांसी के विकास पर शासन कितना गंभीर है।
शहर का सुनियोजित तरीके से विकास हो, इसके लिए झांसी विकास प्राधिकरण का गठन किया गया। इसके लिए महायोजना बनाकर काम किया जाता है। 2021 तक के लिए महायोजना तो बनी पर इस पर काम नहीं हो रहा है। जेडीए ने बूढ़ा गांव में बेतवा विहार कालोनी विकसित करने का निर्णय लिया था, लेकिन दस साल हो गए, पर कुछ नहीं हुआ। जेडीए के पूर्व उपाध्यक्ष चंद्रविजय सिंह के कार्यकाल में कालोनी के काम ने गति पकड़ी थी। उन्होंने पार्क, सड़क और पानी का ओवरहेड टैंक बनवाने का निर्णय लिया था, लेकिन पहले विधानसभा चुनाव के कारण काम नहीं हो सका। बाद में सरकार बनी तो ई- टेंडरिंग प्रक्रिया अनिवार्य कर दी गई। इससे अब तक न तो टेंडर हो सका है और न ही बेतवा विहार कालोनी में कोई काम हो सका है।
इतना ही नहीं, तत्कालीन सचिव आरपी मिश्रा ने करारी में आवासीय कालोनी विकसित करने के लिए नगर निगम की जमीन लेने के काम में तेजी शुरू की थी। जमीन की नापजोख कर ली गई थी, लेकिन उनके जाने के बाद मामला फिर से ठंडे बस्ते में चला गया। जेडीए उपाध्यक्ष, सचिव और अवर अभियंता का तबादला दो महीने पहले कर दिया गया था, पर उनकी जगह कोई तैनाती नहीं की गई। अस्थायी तौर पर जिलाधिकारी उपाध्यक्ष और नगर मजिस्ट्रेट सचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ये दोनों अधिकारी जिले के अन्य कामों में ज्यादा व्यस्त रहते हैं, इस कारण प्राधिकरण का काम नियमित नहीं देख पाते। अवर अभियंताओं की कमी के कारण एक- एक के पास दो- दो जेई के कार्यों की जिम्मेदारी है।
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यही स्थित टाउन प्लानर कार्यालय की है। सांख्यकी अधिकारी और अपर सांख्यकी अधिकारी महानगर के विकास का प्लान बनाते हैं। विभाग में 24 कर्मचारी होने चाहिए, लेकिन यहां पर कर्मचारी सिर्फ 14 हैं। इसमें भी एक महिला कर्मचारी ने वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) के लिए आवेदन कर दिया है। इस कारण विभाग का काम प्रभावित हो रहा है। आसपास के 62 गांवों को शहर में शामिल कर इसका नक्शा तैयार करना है, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण इसमें देर हो गई। उम्मीद जताई जा रही है कि अगली बोर्ड बैठक तक महायोजना तैयार हो जाएगी।
कोट--
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काम प्रभावित है
स्टाफ की कमी है। इसलिए शासन को पत्र लिखा गया है। कोई उत्तर नहीं आया, इसलिए फिर से रिमाइंडर भेजा गया है। कर्मचारियों की कमी से काम प्रभावित होता है।
- एनके पुष्कर्णा, टाउन प्लानर
जल्द आने की है उम्मीद
जिलाधिकारी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान जेडीए में स्टाफ की कमी की बात उच्च अधिकारियों को बताई थी। पता लगा है कि यहां के लिए अधिकारी तय हो गए हैं पर सूची अभी जारी नहीं हुई है। शीघ्र ही अधिकारियों और कर्मचारियों की समस्या का समाधान होने की उम्मीद है।
- सीपी तिवारी
प्रभारी सचिव, जेडीए
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जेडीए में बड़े अफसरों की कुर्सियां खाली, दे ताली
यही हाल टाउन प्लानिंग विभाग का, कामकाज प्रभावित, योजनाएं ठप
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
झांसी विकास प्राधिकरण पर शहर के विकास का जिम्मा है, लेकिन यहां कई बड़े अधिकारियों की कुर्सियां अरसे से खाली हैं। उपाध्यक्ष और सचिव भी नहीं हैं। यही स्थिति टाउन प्लानिंग विभाग की भी है। यहां 24 में 10 पदों पर अधिकारी और कर्मचारी नहीं हैं। इससे पता लगता है कि झांसी के विकास पर शासन कितना गंभीर है।
शहर का सुनियोजित तरीके से विकास हो, इसके लिए झांसी विकास प्राधिकरण का गठन किया गया। इसके लिए महायोजना बनाकर काम किया जाता है। 2021 तक के लिए महायोजना तो बनी पर इस पर काम नहीं हो रहा है। जेडीए ने बूढ़ा गांव में बेतवा विहार कालोनी विकसित करने का निर्णय लिया था, लेकिन दस साल हो गए, पर कुछ नहीं हुआ। जेडीए के पूर्व उपाध्यक्ष चंद्रविजय सिंह के कार्यकाल में कालोनी के काम ने गति पकड़ी थी। उन्होंने पार्क, सड़क और पानी का ओवरहेड टैंक बनवाने का निर्णय लिया था, लेकिन पहले विधानसभा चुनाव के कारण काम नहीं हो सका। बाद में सरकार बनी तो ई- टेंडरिंग प्रक्रिया अनिवार्य कर दी गई। इससे अब तक न तो टेंडर हो सका है और न ही बेतवा विहार कालोनी में कोई काम हो सका है।
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इतना ही नहीं, तत्कालीन सचिव आरपी मिश्रा ने करारी में आवासीय कालोनी विकसित करने के लिए नगर निगम की जमीन लेने के काम में तेजी शुरू की थी। जमीन की नापजोख कर ली गई थी, लेकिन उनके जाने के बाद मामला फिर से ठंडे बस्ते में चला गया। जेडीए उपाध्यक्ष, सचिव और अवर अभियंता का तबादला दो महीने पहले कर दिया गया था, पर उनकी जगह कोई तैनाती नहीं की गई। अस्थायी तौर पर जिलाधिकारी उपाध्यक्ष और नगर मजिस्ट्रेट सचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ये दोनों अधिकारी जिले के अन्य कामों में ज्यादा व्यस्त रहते हैं, इस कारण प्राधिकरण का काम नियमित नहीं देख पाते। अवर अभियंताओं की कमी के कारण एक- एक के पास दो- दो जेई के कार्यों की जिम्मेदारी है।
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यही स्थित टाउन प्लानर कार्यालय की है। सांख्यकी अधिकारी और अपर सांख्यकी अधिकारी महानगर के विकास का प्लान बनाते हैं। विभाग में 24 कर्मचारी होने चाहिए, लेकिन यहां पर कर्मचारी सिर्फ 14 हैं। इसमें भी एक महिला कर्मचारी ने वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) के लिए आवेदन कर दिया है। इस कारण विभाग का काम प्रभावित हो रहा है। आसपास के 62 गांवों को शहर में शामिल कर इसका नक्शा तैयार करना है, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण इसमें देर हो गई। उम्मीद जताई जा रही है कि अगली बोर्ड बैठक तक महायोजना तैयार हो जाएगी।
कोट--
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काम प्रभावित है
स्टाफ की कमी है। इसलिए शासन को पत्र लिखा गया है। कोई उत्तर नहीं आया, इसलिए फिर से रिमाइंडर भेजा गया है। कर्मचारियों की कमी से काम प्रभावित होता है।
- एनके पुष्कर्णा, टाउन प्लानर
जल्द आने की है उम्मीद
जिलाधिकारी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान जेडीए में स्टाफ की कमी की बात उच्च अधिकारियों को बताई थी। पता लगा है कि यहां के लिए अधिकारी तय हो गए हैं पर सूची अभी जारी नहीं हुई है। शीघ्र ही अधिकारियों और कर्मचारियों की समस्या का समाधान होने की उम्मीद है।
- सीपी तिवारी
प्रभारी सचिव, जेडीए