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16 साल पहले हुआ 1600 करोड़ का घोटला, कार्रवाई अब तक नहीं

Tue, 10 Aug 2021 12:42 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 10 Aug 2021 12:42 AM IST
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16 years before 1600 crore sccam, no arrest yet
16 साल पहले हुआ 1600 करोड़ का घोटाला, गिरफ्तारी अब तक नहीं
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झांसी। राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना में 16 साल पहले 1600 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था। गांवों को रोशन करने के लिए आई रकम का अफसरों ने बंदरबांट कर लिया था। खुलासा होने के बाद भी पुलिस अब तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं कर पाई है। पुलिस की कार्रवाई एफआईआर दर्ज करने तक सीमित रह गई है।
बुंदेलखंड समेत प्रदेश के 12 जिलों में सन 2005 में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना का काम हुआ था। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के खंभे लगाकर उन पर तार खींचे जाने थे तथा ट्रांसफार्मरों पर मीटर लगाने का काम किया जाना था। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों को रोशन करने के लिए विद्युतीकरण के कई अन्य काम भी किए जाने थे। केंद्र सरकार की ओर से योजना के क्रियान्वयन के लिए भरपूर बजट उपलब्ध कराया गया था। लेकिन, अफसरों ने योजना में पलीता लगा दिया था। शिकायतों के बाद हुई जांच में योजना में 1600 करोड़ रुपये का घपला पाया गया था। हालात ये रहे थे कि 87 प्रतिशत ट्रांसफार्मरों पर इलेक्ट्रानिक मीटर नहीं पाए गए थे, जबकि कागजों में मीटर लगे दिखाकर भुगतान ले लिया गया था। ट्रांसफार्मर की कीमतें भी अधिक दर्शाई गई थी। कई स्थानों पर लगाए गए खंभों में तार नहीं मिले थे। यहां तक कि योजना के तहत 33 गांव ऐसे शामिल कर लिए गए थे, जिनमें पहले से ही विद्युतीकरण हो चुका था। जबकि, ये योजना उन गांवों के लिए थी, जिनमें बिजली नहीं पहुंची थी। कुल मिलाकर विद्युतीकरण की इस योजना में कदम-कदम पर घोटाला हुआ था। घोटाले का खुलासा होने के बाद पांच जुलाई 2019 को थाना नवाबाद में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। लेकिन, पुलिस अब तक किसी भी घोटालेबाज पर शिकंजा नहीं कस पाई है।
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घटिया काम का लिया था पूरा दाम
झांसी। विद्युतीकरण की इस योजना में जमकर घालमेल हुआ था। घटिया काम का पूरा दाम वसूला गया था। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि झांसी में योजना के तहत 9505 खंभे लगाए गए थे। जांच में 50 प्रतिशत खंभों में मानक के अनुरूप ग्राउंटिंग व कंक्रीट का उपयोग नहीं पाया गया था। इसके अलावा योजना से जुड़े अफसरों द्वारा मापन पुस्तिकाएं तैयार की गईं थीं। इन पुस्तिकाओं में सभी कार्यों को मानक के अनुरूप दिखाकर भुगतान की नियमानुसार संस्तुति की गई थी।
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घपलेबाज अफसरों की क्यों नहीं हो रही गिरफ्तारी: हाईकोर्ट
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1600 करोड़ के इस घोटाले की विवेचना में देरी पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि विवेचना पूरी करने में देरी क्यों की जा रही है। ऐसे कौन से कारण हैं, जिनके चलते भ्रष्टाचार के आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है। कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 24 अगस्त तक का अतिरिक्त समय दिया है। कोर्ट ने एफआईआर में 1600 करोड़ के घोटाले को गंभीर माना और कहा कि यदि संसाधनों की कमी के कारण संबंधित थाने की पुलिस विवेचना नहीं कर पा रही है तो सरकार दूसरी जांच एजेंसी को विवेचना क्यों स्थानांतरित नहीं कर देती। अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच में देरी की सराहना नहीं की जा सकती। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि यदि आरोपी अधिकारी जमानत पर नहीं हैं तो क्यों उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है। गिरफ्तार न करने के कारण क्या हैं।
मामले के संबंध में सभी जानकारियां जुटाईं जाएंगी। विधिसम्मत सभी कार्रवाई जल्द से जल्द पूरी की जाएगी।
- शिवहरि मीणा, एसएसपी
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