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जन्नत के दरवाजे पर सब्र की दस्तक है रोजा
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जन्नत के दरवाजे पर सब्र की दस्तक है रोजा
झांसी। तेज तपिश में भी रोजेदार दिन भर भूखे प्यासे रहकर रोजा रख रहे हैं। रोजे के दौरान रोजेदार सुबह से लेकर शाम तक पानी भी नहीं पीते हैं और सिर्फ अल्लाह की इबादत करते हैं। ऐसे में पांच वक्त की नमाज भी अदा की जाती है। इस पांच वक्त की नमाज से पहले वजू किया जाती है। इससे रोजेदार मुंह में पानी भर कर फेंक देते हैं। पानी का एक कतरा भी हलक के भीतर नहीं जाता है। मुफ्ती साबिर कासमी नेे बताया की जन्नत के दरवाजे पर सब्र की दस्तक है रोजा।
माहे रमजान में इबादतों का दौर शुरू हो जाता है। इस पवित्र माह में लोग रोजे रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं। इस माह में सवाब का दर्जा सत्तर गुना होने के कारण हर कोई नेक व भला काम करने में लग जाता है। इस महीने में ही लोग जकात व फितरा अदा करते हैं जिससे की सवाब (पुण्य) में इजाफा हो सके। मौसम में लगातार तेजी होेने से सुबह से लेकर शाम तक आसमान से आग बरसती है। ऐसे में रोजेदार सुबह चार बजे से शाम सात बजे तक भूखे व प्यासे रहकर अल्लाह की इबादत में मशगूल रहते हैं। अल्लाह से दुआ मांगते हैं।
मुफ्ती साबिर कासमी ने बताया कि रोजे का दूसरा नाम ही सब्र है, अर्थात रोजे का श्रगांर ही सब्र है। उन्होंने कहा की कुराने पाक में जिक्र है कि अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है। बताया कि जन्नत के आठ दरवाजे हैं जिसके एक दरवाजे से सिर्फ रोजेदार ही दाखिल होंगे। बताया कि अल्लाह कयामत के दिन रोजेदारों को अपने दस्तरख्वान पर ही खाना खिलाएंगे। कहा की रोजे का बदला अल्लाह पाक खुद देते हैं। मौलाना सैय्यद कामिल ने बताया कि रमजान के महीने में हर दिन का बड़ा महत्व होता है। इस महीने में ही एतकाफ व लैलतुल कद्र होती है जो हजार महीनों से अफजल होती है।
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झांसी। तेज तपिश में भी रोजेदार दिन भर भूखे प्यासे रहकर रोजा रख रहे हैं। रोजे के दौरान रोजेदार सुबह से लेकर शाम तक पानी भी नहीं पीते हैं और सिर्फ अल्लाह की इबादत करते हैं। ऐसे में पांच वक्त की नमाज भी अदा की जाती है। इस पांच वक्त की नमाज से पहले वजू किया जाती है। इससे रोजेदार मुंह में पानी भर कर फेंक देते हैं। पानी का एक कतरा भी हलक के भीतर नहीं जाता है। मुफ्ती साबिर कासमी नेे बताया की जन्नत के दरवाजे पर सब्र की दस्तक है रोजा।
माहे रमजान में इबादतों का दौर शुरू हो जाता है। इस पवित्र माह में लोग रोजे रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं। इस माह में सवाब का दर्जा सत्तर गुना होने के कारण हर कोई नेक व भला काम करने में लग जाता है। इस महीने में ही लोग जकात व फितरा अदा करते हैं जिससे की सवाब (पुण्य) में इजाफा हो सके। मौसम में लगातार तेजी होेने से सुबह से लेकर शाम तक आसमान से आग बरसती है। ऐसे में रोजेदार सुबह चार बजे से शाम सात बजे तक भूखे व प्यासे रहकर अल्लाह की इबादत में मशगूल रहते हैं। अल्लाह से दुआ मांगते हैं।
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मुफ्ती साबिर कासमी ने बताया कि रोजे का दूसरा नाम ही सब्र है, अर्थात रोजे का श्रगांर ही सब्र है। उन्होंने कहा की कुराने पाक में जिक्र है कि अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है। बताया कि जन्नत के आठ दरवाजे हैं जिसके एक दरवाजे से सिर्फ रोजेदार ही दाखिल होंगे। बताया कि अल्लाह कयामत के दिन रोजेदारों को अपने दस्तरख्वान पर ही खाना खिलाएंगे। कहा की रोजे का बदला अल्लाह पाक खुद देते हैं। मौलाना सैय्यद कामिल ने बताया कि रमजान के महीने में हर दिन का बड़ा महत्व होता है। इस महीने में ही एतकाफ व लैलतुल कद्र होती है जो हजार महीनों से अफजल होती है।
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