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धीरे- धीरे खत्म होंगे आईसीएफ कोच
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धीरे- धीरे खत्म होंगे आईसीएफ कोच
झांसी। रेलवे बोर्ड ने पिछले दो साल से आईसीएफ (इंट्रीगल कोच फैक्ट्री) कोचों का निर्माण बंद कर रखा है। इनकी जगह एलएचबी (लिंक हॉफमैन बुश) बनाए जाने लगे हैं। जैसे- जैसे एलएचबी कोचों का निर्माण होता जा रहा है, वैसे- वैसे आईसीएफ कोचों को पटरियों से हटाने का काम शुरू हो गया है। साथ ही आईसीएफ कोचों को अब 12 साल बाद दोबारा नहीं बनाया जा जाएगा। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। झांसी कोच फैक्ट्री में भी इस आदेश पर काम शुरू कर दिया गया है।
रेट पटरियों पर अभी आधे से अधिक आईसीएफ (इंट्रीगल कोच फैक्ट्री) कोच (सवारी डिब्बे) दौड़ रहे हैं। आईसीएफ कोच में दो डिब्बों की कपलिंग के बीच एक लोहे की रॉड डाल दी जाती है। दुर्घटना होने पर इन डिब्बों के एक दूसरे पर चढ़ने की संभावना रहती है। मगर, पिछले दो साल से इन कोचों का निर्माण बंद कर दिया गया है। इनकी जगह अब सभी फैक्ट्रियों में एलएचबी कोच बनाए जा रहे हैं।
नई तकनीक की कपलिंग में डिब्बों के एक-दूसरे पर चढ़ने की संभावना कम होती है। झांसी कोच मरम्मत कारखाने में अभी पुरानी तकनीक के आधी उम्र पूरा कर चुके आईसीएफ कोचों को ही दोबारा नया बनाया जा रहा है। मगर, रेलवे बोर्ड ने आदेश जारी किए हैं कि एलएचबी कोचों का उत्पादन जैसे- जैसे बढ़ता जाए, आईसीएफ कोचों को दोबारा नया बनाने का काम धीरे - धीर खत्म करते जाइये।
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मालूम हो कि रेलवे वर्कशॉप के निकट महावीरन स्क्रैप यार्ड में कोच मरम्मत कारखाने (सवारी डिब्बा) का निर्माण अक्तूबर 2014 में किया गया था। इस फैक्ट्री में 12 साल पुराने कोचों को दोबारा नया बनाया जाता है। हर माह नौ से दस कोच बनकर निकल रहे हैं।
‘रेलवे बोर्ड के आदेश पर आईसीएफ कोचों का दोबारा निर्माण धीरे- धीरे कम करना है। आगे एलएचबी कोचों को ही दोबारा तैयार किया जाएगा।’
आरडी मौर्य, मुख्य कारखाना प्रबंधक।
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झांसी। रेलवे बोर्ड ने पिछले दो साल से आईसीएफ (इंट्रीगल कोच फैक्ट्री) कोचों का निर्माण बंद कर रखा है। इनकी जगह एलएचबी (लिंक हॉफमैन बुश) बनाए जाने लगे हैं। जैसे- जैसे एलएचबी कोचों का निर्माण होता जा रहा है, वैसे- वैसे आईसीएफ कोचों को पटरियों से हटाने का काम शुरू हो गया है। साथ ही आईसीएफ कोचों को अब 12 साल बाद दोबारा नहीं बनाया जा जाएगा। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। झांसी कोच फैक्ट्री में भी इस आदेश पर काम शुरू कर दिया गया है।
रेट पटरियों पर अभी आधे से अधिक आईसीएफ (इंट्रीगल कोच फैक्ट्री) कोच (सवारी डिब्बे) दौड़ रहे हैं। आईसीएफ कोच में दो डिब्बों की कपलिंग के बीच एक लोहे की रॉड डाल दी जाती है। दुर्घटना होने पर इन डिब्बों के एक दूसरे पर चढ़ने की संभावना रहती है। मगर, पिछले दो साल से इन कोचों का निर्माण बंद कर दिया गया है। इनकी जगह अब सभी फैक्ट्रियों में एलएचबी कोच बनाए जा रहे हैं।
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नई तकनीक की कपलिंग में डिब्बों के एक-दूसरे पर चढ़ने की संभावना कम होती है। झांसी कोच मरम्मत कारखाने में अभी पुरानी तकनीक के आधी उम्र पूरा कर चुके आईसीएफ कोचों को ही दोबारा नया बनाया जा रहा है। मगर, रेलवे बोर्ड ने आदेश जारी किए हैं कि एलएचबी कोचों का उत्पादन जैसे- जैसे बढ़ता जाए, आईसीएफ कोचों को दोबारा नया बनाने का काम धीरे - धीर खत्म करते जाइये।
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मालूम हो कि रेलवे वर्कशॉप के निकट महावीरन स्क्रैप यार्ड में कोच मरम्मत कारखाने (सवारी डिब्बा) का निर्माण अक्तूबर 2014 में किया गया था। इस फैक्ट्री में 12 साल पुराने कोचों को दोबारा नया बनाया जाता है। हर माह नौ से दस कोच बनकर निकल रहे हैं।
‘रेलवे बोर्ड के आदेश पर आईसीएफ कोचों का दोबारा निर्माण धीरे- धीरे कम करना है। आगे एलएचबी कोचों को ही दोबारा तैयार किया जाएगा।’
आरडी मौर्य, मुख्य कारखाना प्रबंधक।