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खास खबर
Updated Fri, 24 Nov 2017 02:26 AM IST
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जन प्रतिनिधियों ने नहीं दिया शिक्षा पर ध्यान
तालबेहट। नगर में चुनाव के समय जनप्रतिनिधि विकास कराने और करने की बातें तो बड़े जोर से कर रहे हैं, लेकिन कसबे में आज तक शिक्षा की ओर किसी भी जनप्रतिनिधि ने ध्यान नहीं दिया। इससे लोगों में बहुत नाराजगी है।
आजादी के इतने वर्षों बाद नगर को सुंदर एवं स्वच्छ बनाने, रेल सुविधाएं तथा पेयजल के अलावा अन्य बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए नगर पंचायत की कुर्सी पर काबिज जनप्रतिनिधियों ने अपने स्तर से कोई खास ध्यान नहीं दिया। पंद्रह हजार से अधिक आबादी वाले इस नगर में मात्र एक राजकीय बालिका इंटर कालेज है। इसमें मात्र दस तक की छात्राओं के लिए विज्ञान के अध्ययन की सुविधा है। आज भी नगर की छात्राओं को इंटर मीडिएट विज्ञान वर्ग की शिक्षा के लिए बाहर जाना पड़ता है। या फिर मजबूरी में छात्रों के साथ श्री मर्दन सिंह इंटर कालेज में पढ़ना पड़ता है।
इससे पूर्व कई जन प्रतिनिधियों ने चुनाव के समय जनता को शिक्षा की कमी दूर कराने के हवाई वादे किए, परंतु चुनाव जीतने के बाद वह सब भूल गए। इससे नगर की जनता में मलाल है। हालाकि हर बार की तरह इस बार भी जन प्रति निधि शिक्षा में विकास के तमाम दावे कर रहे हैं, लेकिन यह समय की बात है कि वह लोग अपने वादों पर कितना खरा उतरते हैं या हर बार की तरह इस बार भी उनके वादे खोखले साबित होंगे।
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तालबेहट। नगर में चुनाव के समय जनप्रतिनिधि विकास कराने और करने की बातें तो बड़े जोर से कर रहे हैं, लेकिन कसबे में आज तक शिक्षा की ओर किसी भी जनप्रतिनिधि ने ध्यान नहीं दिया। इससे लोगों में बहुत नाराजगी है।
आजादी के इतने वर्षों बाद नगर को सुंदर एवं स्वच्छ बनाने, रेल सुविधाएं तथा पेयजल के अलावा अन्य बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए नगर पंचायत की कुर्सी पर काबिज जनप्रतिनिधियों ने अपने स्तर से कोई खास ध्यान नहीं दिया। पंद्रह हजार से अधिक आबादी वाले इस नगर में मात्र एक राजकीय बालिका इंटर कालेज है। इसमें मात्र दस तक की छात्राओं के लिए विज्ञान के अध्ययन की सुविधा है। आज भी नगर की छात्राओं को इंटर मीडिएट विज्ञान वर्ग की शिक्षा के लिए बाहर जाना पड़ता है। या फिर मजबूरी में छात्रों के साथ श्री मर्दन सिंह इंटर कालेज में पढ़ना पड़ता है।
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इससे पूर्व कई जन प्रतिनिधियों ने चुनाव के समय जनता को शिक्षा की कमी दूर कराने के हवाई वादे किए, परंतु चुनाव जीतने के बाद वह सब भूल गए। इससे नगर की जनता में मलाल है। हालाकि हर बार की तरह इस बार भी जन प्रति निधि शिक्षा में विकास के तमाम दावे कर रहे हैं, लेकिन यह समय की बात है कि वह लोग अपने वादों पर कितना खरा उतरते हैं या हर बार की तरह इस बार भी उनके वादे खोखले साबित होंगे।
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