{"_id":"5c95488bbdec2213f80163db","slug":"141553287307-jhansi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"टेस्ट में फेल हुए तो जाएगी थानेदारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टेस्ट में फेल हुए तो जाएगी थानेदारी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
परीक्षा में फेल हुए तो जाएगी थानेदारी
झांसी। थाने पर जनरल डायरी (जीडी) भले ही ऑनलाइन हो गई हो लेकिन जिले के कुछ थानेदार ऐसे भी हैं। जिनको अब भी सीसीटीएनएस की (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम) की बारीकियोें का ज्ञान नहीं है। ऐसे थानेदारों की परीक्षा लेने के लिए डीजीपी ने निर्देश दिए हैं। अगले माह डीजीपी सभी थानेदारों की परीक्षा लेंगे। पास होने वाले थानेदारों को थानेदारी मिलेगी और जो फेल होगा उसे लाइन का रास्ता दिखाया जाएगा।
पुलिस को हाईटेक बनाने की दिशा में कारगर कदम उठाते हुए महकमे ने सभी थानोें को सीसीटीएनएस से जोड़ा था, जिसके बाद थाने का हर काम ऑनलाइन हो जाने से पुलिस को भी राहत मिली थी। सीसीटीएनएस से सभी थानों के जुड़ने के बाद ऑनलाइन जीडी लिखने की व्यवस्था भी शुरू हो गई थी। इसके लिए बाकायदा थानेदार समेत पुलिसकर्मियों को सीसीटीएनएस की जानकारियां भी दी थीं। मुंशी से लेकर अन्य पुलिसकर्मी तो सीसीटीएनएस को समझने लगे, लेकिन कई थानेदार ऐसे भी रहे, जो इसको बोझ समझकर टालने लगे। हर काम मुंशी से ही करा रहे हैं। काम सेे जी चुराने वाले ऐसे थानेदारों को चिन्हित करने के लिए डीजीपी ने निर्देश दिए हैं।
एसएसपी डॉ. ओपी सिंह ने बताया कि डीजीपी का निर्देश मिलने के बाद एसएसपी जल्द ही जल्द ही थानेदारों का सीसीटीएनएस संबंधी परीक्षा लेंगे। जिसमें रोज काम आने वाले विकल्पों के बारे में पूछा जाएगा, जो थानेदारों के लिए उपयोगी हैं। इसमें फेल होने वालों को पुलिस लाइन भेजा जाएगा। टेस्ट में पास होने वाले थानेदारों को प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा।
विज्ञापन
यह है सीसीटीएनएस
सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम) यानी थाने की जनरल डायरी का उद्देश्य प्रदेश के सभी थानों को इंटरनेट के माध्यम से जोड़ना था। एक ऐसा सॉफ्टवेयर जिससे कंप्यूटर पर किसी केस का विवरण मिल जाए। सीसीटीएनएस में किसी भी मुकदमे और उसके स्टेसस को तत्काल देख जा सकता है। एक बार कंप्यूटर में लिखा पढ़ी होने के बाद इसमें किसी तरह का कोई हेरफेर भी नहीं हो सकता है।
यह होता फायदा
- देश के किसी भी क्षेत्र के अपराध व अपराधियों के बारे में जानकारी मिल सकती है।
- अफसर थानों की व विवेचनाओं की ऑनलाइन निगरानी कर सकते हैं।
- इस सॉफ्टेवयर को हैक नहीं किया जा सकता है। बिना इंटरनेट चलता है।
- ऑनलाइन हो रही एफआईआर, जांच पड़ताल भी देख रहे अधिकारी।
विज्ञापन
झांसी। थाने पर जनरल डायरी (जीडी) भले ही ऑनलाइन हो गई हो लेकिन जिले के कुछ थानेदार ऐसे भी हैं। जिनको अब भी सीसीटीएनएस की (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम) की बारीकियोें का ज्ञान नहीं है। ऐसे थानेदारों की परीक्षा लेने के लिए डीजीपी ने निर्देश दिए हैं। अगले माह डीजीपी सभी थानेदारों की परीक्षा लेंगे। पास होने वाले थानेदारों को थानेदारी मिलेगी और जो फेल होगा उसे लाइन का रास्ता दिखाया जाएगा।
पुलिस को हाईटेक बनाने की दिशा में कारगर कदम उठाते हुए महकमे ने सभी थानोें को सीसीटीएनएस से जोड़ा था, जिसके बाद थाने का हर काम ऑनलाइन हो जाने से पुलिस को भी राहत मिली थी। सीसीटीएनएस से सभी थानों के जुड़ने के बाद ऑनलाइन जीडी लिखने की व्यवस्था भी शुरू हो गई थी। इसके लिए बाकायदा थानेदार समेत पुलिसकर्मियों को सीसीटीएनएस की जानकारियां भी दी थीं। मुंशी से लेकर अन्य पुलिसकर्मी तो सीसीटीएनएस को समझने लगे, लेकिन कई थानेदार ऐसे भी रहे, जो इसको बोझ समझकर टालने लगे। हर काम मुंशी से ही करा रहे हैं। काम सेे जी चुराने वाले ऐसे थानेदारों को चिन्हित करने के लिए डीजीपी ने निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
एसएसपी डॉ. ओपी सिंह ने बताया कि डीजीपी का निर्देश मिलने के बाद एसएसपी जल्द ही जल्द ही थानेदारों का सीसीटीएनएस संबंधी परीक्षा लेंगे। जिसमें रोज काम आने वाले विकल्पों के बारे में पूछा जाएगा, जो थानेदारों के लिए उपयोगी हैं। इसमें फेल होने वालों को पुलिस लाइन भेजा जाएगा। टेस्ट में पास होने वाले थानेदारों को प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा।
विज्ञापन
यह है सीसीटीएनएस
सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम) यानी थाने की जनरल डायरी का उद्देश्य प्रदेश के सभी थानों को इंटरनेट के माध्यम से जोड़ना था। एक ऐसा सॉफ्टवेयर जिससे कंप्यूटर पर किसी केस का विवरण मिल जाए। सीसीटीएनएस में किसी भी मुकदमे और उसके स्टेसस को तत्काल देख जा सकता है। एक बार कंप्यूटर में लिखा पढ़ी होने के बाद इसमें किसी तरह का कोई हेरफेर भी नहीं हो सकता है।
यह होता फायदा
- देश के किसी भी क्षेत्र के अपराध व अपराधियों के बारे में जानकारी मिल सकती है।
- अफसर थानों की व विवेचनाओं की ऑनलाइन निगरानी कर सकते हैं।
- इस सॉफ्टेवयर को हैक नहीं किया जा सकता है। बिना इंटरनेट चलता है।
- ऑनलाइन हो रही एफआईआर, जांच पड़ताल भी देख रहे अधिकारी।