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एसएफएस स्टाफ का सिर्फ पांच फीसदी मानदेय बढ़ा-City
Updated Sat, 27 Jan 2018 09:28 PM IST
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एसएफएस स्टाफ का पांच फीसदी मानदेय बढ़ा
- अधिकतम तीन हजार और न्यूनतम 700 रुपये होगी बढ़ोतरी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में स्ववित्त योजनांतर्गत कार्यरत शिक्षक, कर्मचारियों का सिर्फ पांच फीसदी मानदेय बढ़ गया है। इससे अधिकतम तीन हजार और न्यूनतम 700 रुपये मानदेय में बढ़ोतरी होगी। गणतंत्र दिवस पर इसकी घोषणा हुई।
लगभग दो साल पहले सेल्फ फाइनेंस स्कीम (एसएफएस) स्टाफ का मानदेय बढ़ा था। साथ ही शिक्षकों का न्यूनतम मानदेय 39,200, तृतीय श्रेणी कर्मचारियों का 16,000 और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का 14,000 रुपये निर्धारित कर दिया गया था। इसके बाद कई बार मानदेय बढ़ोतरी की मांग की गई लेकिन कुछ नहीं हुआ। कई महीनों से मानदेय बढ़ने की आस लगाए स्ववित्त पोषित योजनांतर्गत कार्यरत शिक्षक और कर्मचारियों की निगाहें गणतंत्र दिवस पर होने वाली घोषणा पर टिकी थी। शुक्रवार को कुलपति ने पांच फीसदी मानदेय बढ़ाने की बात कही। वीसी ने कहा कि बजट के अभाव में इतनी ही बढ़ोतरी संभव है। अधिकांश एसएफएस स्टाफ इससे संतुष्ट नहीं है। बातचीत में एसएफएस शिक्षक, कर्मचारियों ने कहा कि पांच फीसदी में अधिकतम लगभग तीन हजार रुपये और न्यूनतम 700 रुपये ही बढ़ेंगे। जब 60 लाख से अधिक के सीसीटीवी कैमरे लग गए, तब बजट का ध्यान नहीं था। वो कैमरे भी अब तक शुरू नहीं हो पाए हैं। कहा कि 15 फीसदी मानदेय बढ़ोतरी की उम्मीद थी।
बॉक्स..
चल सकता हस्ताक्षर अभियान
विश्वविद्यालय में स्ववित्त पोषित योजनांतर्गत लगभग 150 शिक्षक और 170 कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। बताया गया कि एसएफएस शिक्षकों की तुलना में कर्मचारियों का वेतन और भी कम है। बढ़ती महंगाई में इतने में गुजारा करना मुश्किल है। ऐसे में एसएफएस कर्मचारियों में हस्ताक्षर अभियान चलाकर कुलपति से और मानदेय बढ़ाने की मांग करने का विचार चल रहा है।
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एसएफएस स्टाफ का पांच फीसदी मानदेय बढ़ा
- अधिकतम तीन हजार और न्यूनतम 700 रुपये होगी बढ़ोतरी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में स्ववित्त योजनांतर्गत कार्यरत शिक्षक, कर्मचारियों का सिर्फ पांच फीसदी मानदेय बढ़ गया है। इससे अधिकतम तीन हजार और न्यूनतम 700 रुपये मानदेय में बढ़ोतरी होगी। गणतंत्र दिवस पर इसकी घोषणा हुई।
लगभग दो साल पहले सेल्फ फाइनेंस स्कीम (एसएफएस) स्टाफ का मानदेय बढ़ा था। साथ ही शिक्षकों का न्यूनतम मानदेय 39,200, तृतीय श्रेणी कर्मचारियों का 16,000 और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का 14,000 रुपये निर्धारित कर दिया गया था। इसके बाद कई बार मानदेय बढ़ोतरी की मांग की गई लेकिन कुछ नहीं हुआ। कई महीनों से मानदेय बढ़ने की आस लगाए स्ववित्त पोषित योजनांतर्गत कार्यरत शिक्षक और कर्मचारियों की निगाहें गणतंत्र दिवस पर होने वाली घोषणा पर टिकी थी। शुक्रवार को कुलपति ने पांच फीसदी मानदेय बढ़ाने की बात कही। वीसी ने कहा कि बजट के अभाव में इतनी ही बढ़ोतरी संभव है। अधिकांश एसएफएस स्टाफ इससे संतुष्ट नहीं है। बातचीत में एसएफएस शिक्षक, कर्मचारियों ने कहा कि पांच फीसदी में अधिकतम लगभग तीन हजार रुपये और न्यूनतम 700 रुपये ही बढ़ेंगे। जब 60 लाख से अधिक के सीसीटीवी कैमरे लग गए, तब बजट का ध्यान नहीं था। वो कैमरे भी अब तक शुरू नहीं हो पाए हैं। कहा कि 15 फीसदी मानदेय बढ़ोतरी की उम्मीद थी।
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चल सकता हस्ताक्षर अभियान
विश्वविद्यालय में स्ववित्त पोषित योजनांतर्गत लगभग 150 शिक्षक और 170 कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। बताया गया कि एसएफएस शिक्षकों की तुलना में कर्मचारियों का वेतन और भी कम है। बढ़ती महंगाई में इतने में गुजारा करना मुश्किल है। ऐसे में एसएफएस कर्मचारियों में हस्ताक्षर अभियान चलाकर कुलपति से और मानदेय बढ़ाने की मांग करने का विचार चल रहा है।
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