{"_id":"599ed5b34f1c1bb4328b470c","slug":"141503581619-jhansi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कृषि- सूखा की संभावना, सर्वे शुरू-City","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कृषि- सूखा की संभावना, सर्वे शुरू-City
Updated Thu, 24 Aug 2017 07:03 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कृषि
-------
बुंदेलखंड में फिर सूखे की आहट, सबको घबराहट
सब हेड: कृषि विभाग ने शुरू किया सर्वे, उड़द में नहीं आया दाना
क्रासर:
जिले में औसत के सापेक्ष 33 फीसदी से भी कम बारिश हुई
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
एक बार फिर सूखा बुंदेलखंड में दस्तक देने की तैयारी कर रहा है। सूखे की आहट से किसान, प्रशासन और आम लोग सभी घबराए हुए हैं। उड़द की फसल में अभी एक दाना भी नहीं आया है। कृषि विभाग ने हालातों की नब्ज टटोलने के लिए सर्वे शुरू कर दिया है। अगर सर्वे में 33 फीसदी से अधिक नुकसान की रिपोर्ट आती है तो सूखा तय है। बता दें कि जिले में औसत वर्षा के सापेक्ष अभी तक 33 फीसदी से भी कम पानी बरसा है।
जिले की औसत वर्षा 879.10 मिलीमीटर है। बरसात के तीन महीने निकल गए, लेकिन अभी तक सिर्फ 283 मिलीमीटर पानी बरसा है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बरसात की कितनी खराब स्थिति है। 2013-14 में अगस्त में अधिकतम 482.30 मिलीमीटर बरसात और 2003-04 में सितंबर में अधिकतम 583.80 मिलीमीटर बरसात हुई थी, जो अब तक का रिकार्ड है। अकेले चित्रकूट जिले को छोड़ दिया जाए तो बुंदेलखंड के बाकी छह जिले बरसात में पानी के लिए तरस रहे हैं। बुंदेलखंड की त्रासदी है कि हर तीसरे साल यहां पर सूखा पड़ता है। अबकी बार भी ऐसी ही स्थितियां हैं। उप्र के कई जिले बाढ़ की विभीषिका झेल रहे हैं तो बुंदेलखंड के जिले पानी के लिए तरस रहे हैं। ऐसे में किसानों के सामने एक बार फिर मुसीबत आने वाली है।
किसान ने कर्ज लेकर जैसे-तैसे बुवाई तो कर दी, लेकिन अब पैदावार न होने से किसान फिर से दोराहे पर आकर खड़ा हो गया है। खरीफ फसलों में जिले के किसानों ने 77,350 हेक्टेयर क्षेत्रफल में तिल और 86,210 हेक्टेयर में उर्द की बुवाई की थी। अभी तक तिल की स्थिति तो ठीक है, लेकिन उड़द में या तो कीड़ा लग गया है या फिर फसल सूख गई है। फसल में दाना नहीं आया है। सूखे की संभावनाओं को देखते हुए कृषि विभाग ने खेतों का सर्वे कराने का निर्णय लिया। सभी एसडीएम को गांव-गांव में लेखपालों के माध्यम से सर्वे कराने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि पता लगाया जा सके कि किस गांव में खेती की क्या स्थिति है।
विज्ञापन
यहां बरसा इतना पानी
जिला बारिश
झांसी 283 मिलीमीटर
जालौन 203 मिलीमीटर
बांदा 426 मिलीमीटर
हमीरपुर 226 मिलीमीटर
ललितपुर 215 मिलीमीटर
चित्रकूट 742 मिलीमीटर
महोबा 292 मिलीमीटर
बारिश नहीं हुई तो मुसीबत
दस दिन के अंदर यदि अच्छा पानी बरस जाता है तो ठीक, अन्यथा की स्थिति में सूखे की संभावनाएं नजर आ रही हैं। इसे देखते हुए सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे में वास्तविकता सामने आ जाएगी।
- दुर्गेश कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी
विज्ञापन
-------
बुंदेलखंड में फिर सूखे की आहट, सबको घबराहट
सब हेड: कृषि विभाग ने शुरू किया सर्वे, उड़द में नहीं आया दाना
क्रासर:
जिले में औसत के सापेक्ष 33 फीसदी से भी कम बारिश हुई
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
एक बार फिर सूखा बुंदेलखंड में दस्तक देने की तैयारी कर रहा है। सूखे की आहट से किसान, प्रशासन और आम लोग सभी घबराए हुए हैं। उड़द की फसल में अभी एक दाना भी नहीं आया है। कृषि विभाग ने हालातों की नब्ज टटोलने के लिए सर्वे शुरू कर दिया है। अगर सर्वे में 33 फीसदी से अधिक नुकसान की रिपोर्ट आती है तो सूखा तय है। बता दें कि जिले में औसत वर्षा के सापेक्ष अभी तक 33 फीसदी से भी कम पानी बरसा है।
जिले की औसत वर्षा 879.10 मिलीमीटर है। बरसात के तीन महीने निकल गए, लेकिन अभी तक सिर्फ 283 मिलीमीटर पानी बरसा है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बरसात की कितनी खराब स्थिति है। 2013-14 में अगस्त में अधिकतम 482.30 मिलीमीटर बरसात और 2003-04 में सितंबर में अधिकतम 583.80 मिलीमीटर बरसात हुई थी, जो अब तक का रिकार्ड है। अकेले चित्रकूट जिले को छोड़ दिया जाए तो बुंदेलखंड के बाकी छह जिले बरसात में पानी के लिए तरस रहे हैं। बुंदेलखंड की त्रासदी है कि हर तीसरे साल यहां पर सूखा पड़ता है। अबकी बार भी ऐसी ही स्थितियां हैं। उप्र के कई जिले बाढ़ की विभीषिका झेल रहे हैं तो बुंदेलखंड के जिले पानी के लिए तरस रहे हैं। ऐसे में किसानों के सामने एक बार फिर मुसीबत आने वाली है।
विज्ञापन
किसान ने कर्ज लेकर जैसे-तैसे बुवाई तो कर दी, लेकिन अब पैदावार न होने से किसान फिर से दोराहे पर आकर खड़ा हो गया है। खरीफ फसलों में जिले के किसानों ने 77,350 हेक्टेयर क्षेत्रफल में तिल और 86,210 हेक्टेयर में उर्द की बुवाई की थी। अभी तक तिल की स्थिति तो ठीक है, लेकिन उड़द में या तो कीड़ा लग गया है या फिर फसल सूख गई है। फसल में दाना नहीं आया है। सूखे की संभावनाओं को देखते हुए कृषि विभाग ने खेतों का सर्वे कराने का निर्णय लिया। सभी एसडीएम को गांव-गांव में लेखपालों के माध्यम से सर्वे कराने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि पता लगाया जा सके कि किस गांव में खेती की क्या स्थिति है।
विज्ञापन
यहां बरसा इतना पानी
जिला बारिश
झांसी 283 मिलीमीटर
जालौन 203 मिलीमीटर
बांदा 426 मिलीमीटर
हमीरपुर 226 मिलीमीटर
ललितपुर 215 मिलीमीटर
चित्रकूट 742 मिलीमीटर
महोबा 292 मिलीमीटर
बारिश नहीं हुई तो मुसीबत
दस दिन के अंदर यदि अच्छा पानी बरस जाता है तो ठीक, अन्यथा की स्थिति में सूखे की संभावनाएं नजर आ रही हैं। इसे देखते हुए सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे में वास्तविकता सामने आ जाएगी।
- दुर्गेश कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी