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बिजली: सिस्टम में चल रहा बिल-Lalitpur
Updated Sat, 17 Jun 2017 08:55 PM IST
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बिल नहीं आ रहा तो खुश न हो
बिजली विभाग बना रहा ऐसे उपभोक्ताओं को बकायेदार
पांच हजार से अधिक लोगों के मीटर रीडरों ने नहीं बनाए बिल
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
अगर आपके घर बिजली का बिल नहीं आ रहा है तो खुश होने की जरूरत नहीं है। आपका नाम बिजली विभाग के बकायेदारों की सूची में चढ़ गया है। दरअसल, मीटर रीडर शहर के पांच हजार से अधिक उपभोक्ताओं के बिल नहीं बना रहे हैं। मीटर रीडरों की लापरवाही का खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ता है। अधिक बिल होने पर विभाग उन्हें नोटिस भेज देता है। नोटिस आने के बाद उपभोक्ताओं का बिल संशोधन के नाम पर शोषण होता है।
कोछाभांवर निवासी जगदीश प्रसाद का पिछले पांच साल से बिजली का बिल नहीं आया। पिछले दिनों वह बिल बनवाने कार्यालय पहुंचे। यहां पता लगा कि उन पर 91265 रुपये बकाया हैं। उनके दो किलोवाट के कनेक्शन पर हर महीने 160 यूनिट के हिसाब से औसत बिल बनता जा रहा है। अब वे विभाग की व्यवस्थाओं को कोस रहे हैं। बिजली विभाग के अफसर यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं कि बिल नहीं आ रहा था तो उपभोक्ता को शिकायत करनी चाहिए।
जगदीश प्रसाद तो एक उदाहरण हैं। महानगर के कोछाभांवर, पिछोर, गुमनावारा, करगुवा, महाराणा प्रताप नगर, पाल कॉलोनी, ब्रह्मनगर कॉलोनी, खोड़न, लहरगिर्द समेत कई क्षेत्रों में पांच हजार से अधिक अधिक ऐसे उपभोक्ता हैं, जिनके मीटर रीडर घर न मिल पाने के कारण या खुद की लापरवाही से बिल नहीं बना रहे हैं। ऐेसे उपभोक्ताओं के हर महीने कंप्यूटर में निर्धारित यूनिट के हिसाब से बिल बनते जा रहे हैं।
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‘20 जून के बाद ऐसे उपभोक्ताओं की कंप्यूटर सिस्टम से सूची निकाली जाएगी। पहले सूची मीटर रीडरों को बिल बनाने के लिए दी जाएगी। इसके बाद क्रास चेकिंग की जाएगी कि रीडर बिल बनाकर आया कि नहीं। इसके बाद अगर उपभोक्ता बिल जमा नहीं करता है तो उनको नोटिस भेजकर कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जाएगी।’
हेमराज, अधिशासी अभियंता (द्वितीय)
ऐसे बनता है औसत बिल
अगर किसी उपभोक्ता का बिल नहीं बन रहा है तो विभाग एक किलोवाट पर न्यूनतम 80 यूनिट और दो किलोवाट पर 160 यूनिट का औसत बिल बनाता है। इस हिसाब से एक किलोवाट पर करीब सात और रुपये दो किलोवाट का करीब 1500 रुपये का बिल बनता है।
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बिजली विभाग बना रहा ऐसे उपभोक्ताओं को बकायेदार
पांच हजार से अधिक लोगों के मीटर रीडरों ने नहीं बनाए बिल
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
अगर आपके घर बिजली का बिल नहीं आ रहा है तो खुश होने की जरूरत नहीं है। आपका नाम बिजली विभाग के बकायेदारों की सूची में चढ़ गया है। दरअसल, मीटर रीडर शहर के पांच हजार से अधिक उपभोक्ताओं के बिल नहीं बना रहे हैं। मीटर रीडरों की लापरवाही का खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ता है। अधिक बिल होने पर विभाग उन्हें नोटिस भेज देता है। नोटिस आने के बाद उपभोक्ताओं का बिल संशोधन के नाम पर शोषण होता है।
कोछाभांवर निवासी जगदीश प्रसाद का पिछले पांच साल से बिजली का बिल नहीं आया। पिछले दिनों वह बिल बनवाने कार्यालय पहुंचे। यहां पता लगा कि उन पर 91265 रुपये बकाया हैं। उनके दो किलोवाट के कनेक्शन पर हर महीने 160 यूनिट के हिसाब से औसत बिल बनता जा रहा है। अब वे विभाग की व्यवस्थाओं को कोस रहे हैं। बिजली विभाग के अफसर यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं कि बिल नहीं आ रहा था तो उपभोक्ता को शिकायत करनी चाहिए।
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जगदीश प्रसाद तो एक उदाहरण हैं। महानगर के कोछाभांवर, पिछोर, गुमनावारा, करगुवा, महाराणा प्रताप नगर, पाल कॉलोनी, ब्रह्मनगर कॉलोनी, खोड़न, लहरगिर्द समेत कई क्षेत्रों में पांच हजार से अधिक अधिक ऐसे उपभोक्ता हैं, जिनके मीटर रीडर घर न मिल पाने के कारण या खुद की लापरवाही से बिल नहीं बना रहे हैं। ऐेसे उपभोक्ताओं के हर महीने कंप्यूटर में निर्धारित यूनिट के हिसाब से बिल बनते जा रहे हैं।
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‘20 जून के बाद ऐसे उपभोक्ताओं की कंप्यूटर सिस्टम से सूची निकाली जाएगी। पहले सूची मीटर रीडरों को बिल बनाने के लिए दी जाएगी। इसके बाद क्रास चेकिंग की जाएगी कि रीडर बिल बनाकर आया कि नहीं। इसके बाद अगर उपभोक्ता बिल जमा नहीं करता है तो उनको नोटिस भेजकर कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जाएगी।’
हेमराज, अधिशासी अभियंता (द्वितीय)
ऐसे बनता है औसत बिल
अगर किसी उपभोक्ता का बिल नहीं बन रहा है तो विभाग एक किलोवाट पर न्यूनतम 80 यूनिट और दो किलोवाट पर 160 यूनिट का औसत बिल बनाता है। इस हिसाब से एक किलोवाट पर करीब सात और रुपये दो किलोवाट का करीब 1500 रुपये का बिल बनता है।