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रेलवे को लाखों का चूना लगा रही प्लेटफार्म पर लगने वाली 14 टेबल
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झांसी। रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्मोें पर लगने वालीं अनाधिकृत 14 टेबलों से हो रही खाने की बिक्री से हर माह लाखों रुपये की चपत लग रही है। जानकारों का कहना है कि अगर रेलवे इन टेबलों से लाइसेंस फीस ले तो उसे एक साल में करीब एक करोड़ का राजस्व प्राप्त होगा। यह टेबल सबकी नजर में हैं, लेकिन कार्रवाई कोई नहीं करता।
रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म एक से लेकर पांच तक खानपान के 14 स्टॉल संचालित हैं। संचालक सिर्फ अपने स्टॉल से ही खाने- पीने के सामान को बेच सकते हैं। प्लेटफार्म एक पर खुले कमसम फास्ट फूड प्लाजा को जरूर चार वेंडरों को अनुमति दी गई है जो ट्रेन के प्लेटफार्म पर आने पर गाड़ी के बाहर से ही इधर- उधर घूमकर सामान बेच सकते हैं। ट्रेन के अंदर जाकर सामान बेचने की अनुमति नहीं है।
वहीं, सभी खानपान स्टॉल संचालक ट्रेन के आने पर अपनी एक लोहे की टेबल अनाधिकृत रूप से कोच के पास लगा लेते हैं। इन टेबल पर पूड़ी भांजी, छोले भटूरे व विरयानी को बेचा जाता है। प्रतिस्पर्धा के चक्कर में संचालक स्टॉल के साथ एक- एक अनाधिकृत टेबल का संचालन कर रहे हैं। सबसे बुरा हाल प्लेटफार्म एक पर रहता है, जब कानपुर की तरफ जाने और आने वाली ट्रेनें आतीं हैं। इन टेबल के लगने से प्लेटफार्म पर अतिक्रमण की स्थिति रहती है। यात्री को टेबल से बचकर निकलना पड़ता है। अन्यथा टेबल से टकराने की आशंका बनी रहती है। अनाधिकृत टेबलों का संचालन चर्चा में है। कई बार शिकायत हो चुकी है, लेकिन अधिकारी एक दूसरे की जिम्मेदारी बताकर कार्रवाई से बचते हैं। जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि स्टेशन पर निरंतर अवैध वेंडरों व दूसरे अनाधिकृत कार्यों के खिलाफ अभियान चलता रहता है।
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डीआरएम को ट्वीट कर ओवर रेटिंग की शिकायत
रेल यात्री अक्षय ने डीआरएम आशुतोष को ट्वीटर पर शिकायत दर्ज कराई कि उसने झांसी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर स्थित एक स्टॉल से चिप्स के दो पैकेट खरीदे। बदले में उससे 50 रुपये लिए गए। जबकि पैकेज पर दाम 20 रुपये लिखा था। उसने स्टॉल पर पहुंचकर विरोध जताया। स्टॉल की फोटो भी खींची। ट्रेन चलने वाली थी कि इस कारण वह स्टॉल पर तैनात कर्मचारी से बात नहीं कर सका। डीआरएम ने यात्री को जवाब देते हुए मामले की जांच करवाकर स्टॉल संचालक के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया।
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रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म एक से लेकर पांच तक खानपान के 14 स्टॉल संचालित हैं। संचालक सिर्फ अपने स्टॉल से ही खाने- पीने के सामान को बेच सकते हैं। प्लेटफार्म एक पर खुले कमसम फास्ट फूड प्लाजा को जरूर चार वेंडरों को अनुमति दी गई है जो ट्रेन के प्लेटफार्म पर आने पर गाड़ी के बाहर से ही इधर- उधर घूमकर सामान बेच सकते हैं। ट्रेन के अंदर जाकर सामान बेचने की अनुमति नहीं है।
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वहीं, सभी खानपान स्टॉल संचालक ट्रेन के आने पर अपनी एक लोहे की टेबल अनाधिकृत रूप से कोच के पास लगा लेते हैं। इन टेबल पर पूड़ी भांजी, छोले भटूरे व विरयानी को बेचा जाता है। प्रतिस्पर्धा के चक्कर में संचालक स्टॉल के साथ एक- एक अनाधिकृत टेबल का संचालन कर रहे हैं। सबसे बुरा हाल प्लेटफार्म एक पर रहता है, जब कानपुर की तरफ जाने और आने वाली ट्रेनें आतीं हैं। इन टेबल के लगने से प्लेटफार्म पर अतिक्रमण की स्थिति रहती है। यात्री को टेबल से बचकर निकलना पड़ता है। अन्यथा टेबल से टकराने की आशंका बनी रहती है। अनाधिकृत टेबलों का संचालन चर्चा में है। कई बार शिकायत हो चुकी है, लेकिन अधिकारी एक दूसरे की जिम्मेदारी बताकर कार्रवाई से बचते हैं। जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि स्टेशन पर निरंतर अवैध वेंडरों व दूसरे अनाधिकृत कार्यों के खिलाफ अभियान चलता रहता है।
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डीआरएम को ट्वीट कर ओवर रेटिंग की शिकायत
रेल यात्री अक्षय ने डीआरएम आशुतोष को ट्वीटर पर शिकायत दर्ज कराई कि उसने झांसी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर स्थित एक स्टॉल से चिप्स के दो पैकेट खरीदे। बदले में उससे 50 रुपये लिए गए। जबकि पैकेज पर दाम 20 रुपये लिखा था। उसने स्टॉल पर पहुंचकर विरोध जताया। स्टॉल की फोटो भी खींची। ट्रेन चलने वाली थी कि इस कारण वह स्टॉल पर तैनात कर्मचारी से बात नहीं कर सका। डीआरएम ने यात्री को जवाब देते हुए मामले की जांच करवाकर स्टॉल संचालक के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया।