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ग्राम पंचायतों से मांगा ब्योरा-Cordination
Updated Wed, 22 Aug 2018 08:48 PM IST
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आमदनी बढ़ाएंगे, तभी मिलेगा गांवों को पैसा
- भारत सरकार ने प्रधानों से मांगा आय का ब्योरा
- प्रोत्साहन राशि बढ़ाने के कारण भी बताने होंगे
- रिपोर्ट भेजने के लिए 31 अगस्त तक का मौका
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। भारत सरकार ने गांवों के विकास के लिए परफॉरमेंस ग्रांट (प्रोत्साहन राशि) देने के लिए ग्राम प्रधानों से आय का ब्योरा मांगा है। इसमें गांवों को अपनी आमदनी बढ़ाने के उपाय भी बताने होंगे। ग्राम पंचायतों को रिपोर्ट भेजने के लिए 31 अगस्त तक का मौका दिया गया है।
गांवों के विकास के नाम पर सरकार बहुत पैसा खर्च कर चुकी है, लेकिन विकास उस स्तर का नजर नहीं आ रहा है जैसा होना चाहिए। इसलिए भारत सरकार ने तय किया है कि गांव में यदि किसी तरह से आमदनी हो रही है तो पहले उसका ब्योरा लिया जाएगा। इस ब्योरे को भारत सरकार को भेजा जाएगा। यदि ब्योरे में आमदनी बढ़ाने का कोई संतोषजनक कारण लिखा होगा, तभी परफॉरमेंस ग्रांट जारी की जाएगी। जिले में 496 ग्राम पंचायतें हैं। ग्राम पंचायतों में आमदनी के लिए हाट बाजार से तहबाजारी, दान, नीलामी, तालाब से आय, मेला या जलकर मुख्य आमदनी के स्रोत हैं। पूर्व में यह व्यवस्था लागू थी कि ग्राम पंचायतों ने जो लिखकर भेज दिया, उसे ही सही मान लिया जाता है और परफॉरमेंस ग्रांट भेज दी जाती थी। इसका कोई सत्यापन नहीं होता है। इसलिए ग्राम पंचायतों ने इस पैसे का भरपूर दुरुपयोग किया लेकिन, अब ऐसा नहीं है। पंचायती राज निदेशक मासूम अली सरबर ने इस संबंध में जिलाधिकारी को पत्र भेजकर अंतिम तिथि घोषित कर दी है।
भारत सरकार ने सारी जानकारियों को ऑनलाइन कर दिया है। अब जो रिपोर्ट भेजी जाती है, उसका सत्यापन होता है। इससे पहले मार्च में रिपोर्ट गई थी। उसमें किसी भी ग्राम पंचायत ने अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए किसी तरह का कोई प्रयास करने का हवाला नहीं दिया था, इस कारण भारत सरकार ने जिले को एक नया पैसा नहीं दिया। अब दोबारा रिपोर्ट मांगी गई है। यह रिपोर्ट अधिकतम 31 अगस्त तक भेजी जा सकती है। जिला पंचायत राज अधिकारी एपी त्रिपाठी ने बताया कि ग्राम पंचायतों से दोबारा आवेदन मांगे गए हैं।
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तीन सदस्यीय कमेटी करेगी सत्यापन
ग्राम पंचायतें जो रिपोर्ट भेजेंगी, उसका पहले सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन करने के लिए बनाई गई कमेटी के अध्यक्ष मुख्य विकास अधिकारी, सचिव जिला पंचायत राज अधिकारी और सदस्य अपर मुख्य अधिकारी हैं। ग्राम पंचायतें यदि सीडीओ तक अपनी रिपोर्ट नहीं भेज पा रहीं हैं तो उसे एसडीएम स्तर पर भी भेजा जा सकता है।
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- भारत सरकार ने प्रधानों से मांगा आय का ब्योरा
- प्रोत्साहन राशि बढ़ाने के कारण भी बताने होंगे
- रिपोर्ट भेजने के लिए 31 अगस्त तक का मौका
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। भारत सरकार ने गांवों के विकास के लिए परफॉरमेंस ग्रांट (प्रोत्साहन राशि) देने के लिए ग्राम प्रधानों से आय का ब्योरा मांगा है। इसमें गांवों को अपनी आमदनी बढ़ाने के उपाय भी बताने होंगे। ग्राम पंचायतों को रिपोर्ट भेजने के लिए 31 अगस्त तक का मौका दिया गया है।
गांवों के विकास के नाम पर सरकार बहुत पैसा खर्च कर चुकी है, लेकिन विकास उस स्तर का नजर नहीं आ रहा है जैसा होना चाहिए। इसलिए भारत सरकार ने तय किया है कि गांव में यदि किसी तरह से आमदनी हो रही है तो पहले उसका ब्योरा लिया जाएगा। इस ब्योरे को भारत सरकार को भेजा जाएगा। यदि ब्योरे में आमदनी बढ़ाने का कोई संतोषजनक कारण लिखा होगा, तभी परफॉरमेंस ग्रांट जारी की जाएगी। जिले में 496 ग्राम पंचायतें हैं। ग्राम पंचायतों में आमदनी के लिए हाट बाजार से तहबाजारी, दान, नीलामी, तालाब से आय, मेला या जलकर मुख्य आमदनी के स्रोत हैं। पूर्व में यह व्यवस्था लागू थी कि ग्राम पंचायतों ने जो लिखकर भेज दिया, उसे ही सही मान लिया जाता है और परफॉरमेंस ग्रांट भेज दी जाती थी। इसका कोई सत्यापन नहीं होता है। इसलिए ग्राम पंचायतों ने इस पैसे का भरपूर दुरुपयोग किया लेकिन, अब ऐसा नहीं है। पंचायती राज निदेशक मासूम अली सरबर ने इस संबंध में जिलाधिकारी को पत्र भेजकर अंतिम तिथि घोषित कर दी है।
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भारत सरकार ने सारी जानकारियों को ऑनलाइन कर दिया है। अब जो रिपोर्ट भेजी जाती है, उसका सत्यापन होता है। इससे पहले मार्च में रिपोर्ट गई थी। उसमें किसी भी ग्राम पंचायत ने अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए किसी तरह का कोई प्रयास करने का हवाला नहीं दिया था, इस कारण भारत सरकार ने जिले को एक नया पैसा नहीं दिया। अब दोबारा रिपोर्ट मांगी गई है। यह रिपोर्ट अधिकतम 31 अगस्त तक भेजी जा सकती है। जिला पंचायत राज अधिकारी एपी त्रिपाठी ने बताया कि ग्राम पंचायतों से दोबारा आवेदन मांगे गए हैं।
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तीन सदस्यीय कमेटी करेगी सत्यापन
ग्राम पंचायतें जो रिपोर्ट भेजेंगी, उसका पहले सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन करने के लिए बनाई गई कमेटी के अध्यक्ष मुख्य विकास अधिकारी, सचिव जिला पंचायत राज अधिकारी और सदस्य अपर मुख्य अधिकारी हैं। ग्राम पंचायतें यदि सीडीओ तक अपनी रिपोर्ट नहीं भेज पा रहीं हैं तो उसे एसडीएम स्तर पर भी भेजा जा सकता है।