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छुट्टा जानवरों का विधानसभा में उठा सवाल-City
Updated Fri, 21 Jul 2017 08:58 PM IST
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विधानसभा में उठा छुट्टा जानवरों का मुद्दा
विधायक ने ग्राम पंचायत की जमीन पर गोशाला निर्माण का दिया सुझाव
इस पर अमर उजाला लगातार चला रहा है अभियान
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
जिले में अन्ना प्रथा की (छुट्टा जानवर) समस्या को विधायक जवाहर लाल राजपूत ने विधानसभा में उठाया। उन्होंने कहा कि छुट्टा जानवरों के कारण किसानों की फसल खराब हो रही हैं। इस समस्या के निदान के लिए उन्होंने गोशाला का निर्माण कर मनरेगा की तरह कर्मचारियों की तैनाती करने का सुझाव दिया। बता दें कि छुट्टा जानवरों की समस्या पर अमर उजाला लगातार अभियान चला रहा है।
विधानसभा में विधायक राजपूत ने कहा कि अन्ना पशुओं से अपने खेतों की रखवाली बुंदेलखंड का किसान रात-रात भर जाग कर करता है। आवारा पशुओं द्वारा फसल खा जाने से किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाती है तथा परिवार भुखमरी की स्थिति में आ जाता है। प्रत्येक ग्राम पंचायत के पास परती/ चारागाह के लिए भूमि उपलब्ध है। ग्राम पंचायत की परती भूमि पर गोवंशों को इकट्ठा कर गोशाला का निर्माण कराके रखा जा सकता है। मनरेगा जैसी योजनाओं से गोवंशों की देखभाल के लिए चरवाहे (कर्मचारी) की व्यवस्था की जा सकती है।
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विधानसभा में उठा छुट्टा जानवरों का मुद्दा
विधायक ने ग्राम पंचायत की जमीन पर गोशाला निर्माण का दिया सुझाव
इस पर अमर उजाला लगातार चला रहा है अभियान
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
जिले में अन्ना प्रथा की (छुट्टा जानवर) समस्या को विधायक जवाहर लाल राजपूत ने विधानसभा में उठाया। उन्होंने कहा कि छुट्टा जानवरों के कारण किसानों की फसल खराब हो रही हैं। इस समस्या के निदान के लिए उन्होंने गोशाला का निर्माण कर मनरेगा की तरह कर्मचारियों की तैनाती करने का सुझाव दिया। बता दें कि छुट्टा जानवरों की समस्या पर अमर उजाला लगातार अभियान चला रहा है।
विधानसभा में विधायक राजपूत ने कहा कि अन्ना पशुओं से अपने खेतों की रखवाली बुंदेलखंड का किसान रात-रात भर जाग कर करता है। आवारा पशुओं द्वारा फसल खा जाने से किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाती है तथा परिवार भुखमरी की स्थिति में आ जाता है। प्रत्येक ग्राम पंचायत के पास परती/ चारागाह के लिए भूमि उपलब्ध है। ग्राम पंचायत की परती भूमि पर गोवंशों को इकट्ठा कर गोशाला का निर्माण कराके रखा जा सकता है। मनरेगा जैसी योजनाओं से गोवंशों की देखभाल के लिए चरवाहे (कर्मचारी) की व्यवस्था की जा सकती है।
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